पंचतत्व: सोन से रूठी माँ रेवा कहीं हमसे भी न रूठ जाए

लगातार होते रेत खनन, नदियों के पास ताबड़तोड़ कथित विकास परियोजनाओं, बांध बनाए जाने और इसके जलागम क्षेत्र में जंगल का अबाध कटाई ने नर्मदा को बहुत बीमार बना दिया है. पिछली गर्मियों में नर्मदा का जलस्तर तो इतना गिर गया था कि कोई पांव-पैदल भी नदी को पार कर सकता था. इस नदी को नदी-जोड़ परियोजना ने भी काफी नुक्सान पहुंचाया है

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दक्षिणावर्त: सेकुलर खोल, बाइनरी बोल और अश्लीलताओं के बीच

हरेक घटना के पक्ष या विपक्ष में बैटिंग तो हो रही है, लेकिन किनारे बैठकर थोड़ी धूल बैठ जाने का इंतजार नहीं किया जा रहा है। राजनेताओं का तो समझ में आता है, लेकिन हम जैसे जो आम लोग हैं, उन्हें पंजाब पर राहुल गांधी को और हाथरस पर योगी आदित्यनाथ को घेरने में क्यों संकोच हो रहा है, यह समझ के बाहर है।

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आर्टिकल 19: मीडिया निगल गया वरना दिल्ली के दंगे पर कोर्ट की टिप्पणी आज राष्ट्रीय शर्म होती

अदालत ने कहा कि “इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाना पूर्व-नियोजित साजिश के बिना संभव नहीं है।” कौन थे वो साजिशकर्ता और कौन थे उनके आका? यह बताने में दिल्ली पुलिस का दिल बैठ जाता है। वह इधर-उधर की बात करने लगती है। इसकी वजह हम भी जानते हैं और आप भी।

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तिर्यक आसन: कवि प्रोफेसर डॉक्टर मौलिक जी और उनके चार अंगरक्षक

चुम्बक सिर्फ धातुओं को आकर्षित करता है। स्वार्थ ऐसा शक्तिशाली चुम्बक है जो हाड़-माँस से बने आदमियों को एक दूसरे से जोड़े रखता है। सात जन्मों की गाँठ सात दिन में टूट सकती है; स्वार्थ की गाँठ स्वार्थ की सिद्धि होने के बाद टूटती है।

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बात बोलेगी: डर के आगे नहीं, डर में ही जीत है!

टाटा ने इस विज्ञापन को दिखाने और हटाने की अल्पावधि के अभ्यास से मौजूदा सत्ता के लिए एक बहुत ठोस सर्वे का काम किया है। देश में सहिष्णुता मापने का सबसे प्रामाणिक मापक यंत्र फिलवक्त हिन्दू-मुस्लिम एकता ही है। इसे बेहद मुलायमियत भरे लहजे में दिखाइए और असर का आकलन कीजिए।

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तन मन जन: महामारी से भी बड़ी बीमारी है लॉकडाउन से उपजी गरीबी

कोरोनाकाल में सामूहिक तौर पर भारत के आम लोगों की स्थिति इसी मरणासन्न मरीज की तरह हो गई है जिसे अपनी जिन्दगी भी बचानी है। सवाल अस्तित्व का है। संकट विकट है।

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गाहे बगाहे: कहु धौं छूत कहां सों उपजी, तबहि छूत तुम मानी

जिस तरह बनारस में कबीर का मान था उसी तरह नसुड़ी का मान था। उनके जाने के बरसों बाद भी उनकी जगह भरी नहीं जा सकी है और अभी बिरहा विधा की जो गति है, उसको देखते हुए उस जगह के भरने का भी कोई आसार नहीं दीखता। नसुड़ी सदियों में एकाध पैदा होते हैं।

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दक्षिणावर्त: तनिष्क का ‘एकत्वम’ और विकृत अस्मिताओं का दोयम

मजहब या रिलीजन के बदले हम धर्म शब्द का प्रयोग कतई नहीं कर सकते। दूसरे, अब्राहमिक मजहबों के बरक्स जिस क्षण आप सनातन धर्म को खड़ा करते हैं, आप ठीक वही गलतियां करते हैं जो 200 वर्षों तक हमारे आका रहे अंग्रेज आक्रांताओं ने सोच समझ कर की।

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पंचतत्व: देश में जंगल क्षेत्र बढ़ने का ‘बिकिनी’ सत्य

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट, 2019 के आंकड़े बता रहे हैं कि देश में आजादी के बाद से ही जंगलों के क्षेत्रफल में कोई कमी नहीं आई है. इसके मुताबिक, देश में वन क्षेत्र में करीब 5,188 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है और दिल्ली और गोवा को मिलाकर भूभाग इतना ही है..

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आर्टिकल 19: TRP की नपाई रोकने के पीछे Zee और BARC का बाप-बेटा कनेक्शन!

बार्क के इंडिया बोर्ड का चेयरमैन कौन है? उनका नाम है पुनीत गोयनका। पुनीत गोयनका ज़ी न्यूज के संस्थापक और एस्सेल समूह के मालिक सुभाष चंद्रा के सुपुत्र हैं। सुभाष चंद्रा को बीजेपी ने राज्यसभा का सांसद बनाया है। खबरों का डीएनए जांचने वाले सुधीर चौधरी, पुनीत गोयनका के चाचा-पापा-ताऊ के मुलाजिम हैं। कुछ समझ पा रहे हैं?

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