नोबेल पुरस्कार के लिए नामित हुए ऐक्टिविस्ट दम्पत्ति ने शुरू किया बेरोजगारी मुक्त काशी अभियान

नोबेल पीस प्राइज़ वॉच ने 2021 के नोबेल शांति पुरस्‍कारों के लिए जिन 50 व्‍यक्तियों के नाम शॉर्टलिस्‍ट कर के नोबेल कमेटी को भेजे हैं उनमें दो नाम भारत से भी हैं और दोनों ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस से हैं- डॉ. लेनिन रघुवंशी और श्रुति नागवंशी

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क्या टल सकती थी चमोली में ग्लेशियर फटने से हुई तबाही?

साल 2019 के इस अध्ययन में साफ़ कहा गया है कि भारत, चीन, नेपाल और भूटान में 40 वर्षों के उपग्रह अवलोकन से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन हिमालय के ग्लेशियरों को खा रहा है।

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ज़मानत देने के बाद भी मुनव्वर फारुकी की रिहाई के लिए SC जज को करना पड़ा फोन!

शुक्रवार को जहां सुप्रीम कोर्ट ने केवल पंद्रह मिनिट में उन्हें जमानत दी थी इसके बाद उम्मीद थी कि उन्हें जल्दी ही रिहाई दे दी जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शुक्रवार को रिहाई नहीं हुई और इसके बाद मुनव्वर के वकील शनिवार रात को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने इंदौर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को फोन कर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए ऑर्डर देखने की अपील की। जिसके बाद उन्हें रिहा किया गया।

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टिकरी बॉर्डर पर एक और किसान मृत, लिखा-सरकार के रवैये से हो गया था परेशान!

कृषि कानूनों के खिलाफ बीते ढाई महीने से जारी किसानों के आंदोलन में एक और किसान ने अपनी क़ुरबानी दे दी. दिल्ली-हरियाणा के टिकरी बॉर्डर पर बीती देर रात एक किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी. मरने से पहले मृतक किसान कर्मबीर ने सुसाइड लिखा जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के खराब रवैये से परेशान होने की बात लिखी है.

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चक्का जाम ने फिर साबित किया, देश भर के किसान एकजुट हैं इन कानूनों के खिलाफ: SKM

कल ससंद में कृषि मंत्री द्वारा यह देशभर के किसानों के संघर्ष का अपमान किया गया कि केवल एक राज्य के किसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे है। परंतु आज के देशव्यापी चक्का जाम ने एक बार फिर साबित किया कि देश भर के किसान इन कानूनों के खिलाफ एकजुट है। किसान पूरी तरह शांतमयी और अहिंसक रहे।

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इंदौर: किसान-मजदूर संगठनों ने किया चक्काजाम, कृषि कानून वापस न होने पर आंदोलन होगा तेज

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानून देश को बर्बाद करने वाले कानून हैं और यदि यह लागू किए गए तो ना केवल किसानी बर्बाद होगी बल्कि मजदूर छोटे दुकानदार और आम आदमी रोजी रोटी के लिए मोहताज हो जाएगा तथा खेती किसानी पर कारपोरेट का कब्जा हो जाएगा। इसलिए इसका आंदोलन बिल वापस लेने तक चलाया जाना जरूरी है।

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बनारस: उत्पीड़न के खिलाफ पत्रकार संगठनों ने किया उपवास, PM के नाम ज्ञापन

वर्तमान समय में जिस तरह पत्रकारों के साथ दमनात्मक कार्यवाही हो रही है, उससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ गयी है। धरने के पश्चात अपनी मांगों से सम्बंधित एक ज्ञापन एसीएम चतुर्थ को सौंपा गया। प्रधानमंत्री को भेजे गये इस ज्ञापन में सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए मांग की गयी कि पत्रकारों के उत्पीड़न को बंद करने के साथ ही पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल लागू किया जाए।

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कील तंत्र में तब्दील हुआ भारतीय लोकतंत्र: सुनीलम

आज देशभर में तीनों कृषि कानूनो को रद्द करने, सभी कृषि उत्पादों की लागत से डेढ़ गुना दाम पर सरकारी खरीद की कानूनी गारंटी देने,आंदोलनकारी किसानों पर लादे गए फर्जी मुकदमे वापस लेने तथा आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस दमन बंद करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय किसान सँघर्ष समन्वय समिति-संयुक्त किसान मोर्चा के आव्हान पर आज देशभर में 12 बजे से 3 बजे तक चक्काजाम शांतिपूर्ण सम्पन्न हुआ।

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कृषि कानूनों की वापसी के लिए IPF कार्यकर्ताओं ने PM को भेजा ज्ञापन

केन्द्र की मोदी सरकार इन कानूनों के बारे में लगातार देश को गुमराह कर रही है कि इनमें काला क्या है। जबकि सभी लोग बखूबी जानते है कि ये कानून देशी विदेशी कारपोरेट घरानों के लाभ के लिए ही बनाए गए है और इनसे हमारी देश की आर्थिक सम्प्रभुता तहस नहस हो जायेगी और खेती किसानी बर्बाद हो जायेगी।

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UP: संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आज़मगढ़ में प्रतिरोध मार्च आयोजित

सरकार अंबानी अदानी जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों के दबाव में है वह आंदोलन के साथ न्याय नहीं कर रही है आंदोलन के साथ कर रही है किसान संगठनों के साथ हर दौर की वार्ता में उसका हटवा दी रवैया निंदनीय बसना योग्य है। पत्रकारों को धरना स्थल पर जाने से रोकने का प्रयास देश के लोकतंत्र के खिलाफ है।

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