इंदौर: किसान-मजदूर संगठनों ने किया चक्काजाम, कृषि कानून वापस न होने पर आंदोलन होगा तेज

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानून देश को बर्बाद करने वाले कानून हैं और यदि यह लागू किए गए तो ना केवल किसानी बर्बाद होगी बल्कि मजदूर छोटे दुकानदार और आम आदमी रोजी रोटी के लिए मोहताज हो जाएगा तथा खेती किसानी पर कारपोरेट का कब्जा हो जाएगा। इसलिए इसका आंदोलन बिल वापस लेने तक चलाया जाना जरूरी है।

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बनारस: उत्पीड़न के खिलाफ पत्रकार संगठनों ने किया उपवास, PM के नाम ज्ञापन

वर्तमान समय में जिस तरह पत्रकारों के साथ दमनात्मक कार्यवाही हो रही है, उससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ गयी है। धरने के पश्चात अपनी मांगों से सम्बंधित एक ज्ञापन एसीएम चतुर्थ को सौंपा गया। प्रधानमंत्री को भेजे गये इस ज्ञापन में सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए मांग की गयी कि पत्रकारों के उत्पीड़न को बंद करने के साथ ही पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल लागू किया जाए।

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कील तंत्र में तब्दील हुआ भारतीय लोकतंत्र: सुनीलम

आज देशभर में तीनों कृषि कानूनो को रद्द करने, सभी कृषि उत्पादों की लागत से डेढ़ गुना दाम पर सरकारी खरीद की कानूनी गारंटी देने,आंदोलनकारी किसानों पर लादे गए फर्जी मुकदमे वापस लेने तथा आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस दमन बंद करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय किसान सँघर्ष समन्वय समिति-संयुक्त किसान मोर्चा के आव्हान पर आज देशभर में 12 बजे से 3 बजे तक चक्काजाम शांतिपूर्ण सम्पन्न हुआ।

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कृषि कानूनों की वापसी के लिए IPF कार्यकर्ताओं ने PM को भेजा ज्ञापन

केन्द्र की मोदी सरकार इन कानूनों के बारे में लगातार देश को गुमराह कर रही है कि इनमें काला क्या है। जबकि सभी लोग बखूबी जानते है कि ये कानून देशी विदेशी कारपोरेट घरानों के लाभ के लिए ही बनाए गए है और इनसे हमारी देश की आर्थिक सम्प्रभुता तहस नहस हो जायेगी और खेती किसानी बर्बाद हो जायेगी।

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UP: संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आज़मगढ़ में प्रतिरोध मार्च आयोजित

सरकार अंबानी अदानी जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों के दबाव में है वह आंदोलन के साथ न्याय नहीं कर रही है आंदोलन के साथ कर रही है किसान संगठनों के साथ हर दौर की वार्ता में उसका हटवा दी रवैया निंदनीय बसना योग्य है। पत्रकारों को धरना स्थल पर जाने से रोकने का प्रयास देश के लोकतंत्र के खिलाफ है।

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चक्काजाम: IFTU, CITU और AIUTUC सहित कई संगठनों के नेता गिरफ्तार

ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन के सचिव मैनेजर चौरसिया को भी पुलिस ने आज सुबह गिरफ्तार कर लिया. जनपथ से बात करते हुए AIUTUC के प्रेसिडेंट हरीश त्यागी ने बताया कि, नेताओं के अलावा पुलिस ने अब तक सौ से अधिक लोगों को दिल्ली गेट के पास से गिरफ्तार कर लिया है.

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शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने और अपनी बात रखने के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए: UNHR

हम भारत में चल रहे किसान आंदोलन में अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों से अधिकतम संयम बरतने की अपील करते हैं. शांतिपूर्ण इकट्ठा होने और अभिव्यक्ति के अधिकारों को ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही तरह से सुरक्षा होने चाहिए. सभी के लिए मानवाधिकार के संबंध में समान समाधान खोजना बेहद जरूरी है

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भीड़ भरे चौराहे पर कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ झंडा बुलंद किये हुए एक आदमी

अकेले ही सही लेकिन तब तक विरोध करते रहेंगे जब तक केंद्र सरकार तीनों कानून वापस नहीं ले लेती। उनकी योजना स्थानीय सांसद शंकर लालवानी के घर पर जाकर प्रदर्शन करने की भी है। अब तक प्रशासन और राजनेता उनके इस विरोध प्रदर्शन को लेकर खास चिंतित नहीं हैं लेकिन जयेश का विरोध अब लोगों का ध्यान खींच रहा है।

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दिल्ली: किसान आंदोलन कवर कर रहे पत्रकारों के उत्पीड़न का मामला पहुंचा प्रेस काउंसिल

दिल्‍ली में पुलिस मुख्‍यालय के सामने 31 जनवरी को हुए पत्रकारों के विशाल विरोध प्रदर्शन के बाद अगला विरोध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट बनारस पर आज आयोजित किया गया है। काशी पत्रकार संघ ने पत्रकारों के मुद्दे पर आज एक दिन के उपवास की घोषणा की है और एक संयुक्‍त संघर्ष समिति के गठन का फैसला लिया है।

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पेरिस: कोर्ट ने कहा फ़्रांस जलवायु परिवर्तन निष्क्रियता का दोषी, देना होगा मुआवज़ा!

मामला है दो मिलियन नागरिकों द्वारा समर्थित गैर सरकारी संगठनों के एक समूह का जिसने फ्रांसीसी सरकार पर जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए क़दम उठाने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज की थी, जिसे “केस ऑफ़ द सेंचुरी” करार दिया गया है। अदालत ने राज्य को मुआवज़े के रूप में 1 यूरो की प्रतीकात्मक रकम का भुगतान करने का आदेश भी दिया।

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