आर्कटिक में बर्फ न्‍यूनतम स्‍तर पर, अब तक का सबसे गर्म महीना रहा सितम्‍बर

पूरे यूरोप में भी सितंबर में औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह इससे पहले सबसे गर्म सितंबर के तौर पर दर्ज किए गए वर्ष 2018 के इसी महीने के मुकाबले 0.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रहा।

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अदालत का फैसला अगर ‘न्याय’ से चूक जाए, तो आदमी क्या करे? कहां जाए?

जिस तरह भारतीय किसान की उम्मीद मानसून पर होती है हर साल, ठीक उसी तरह एक आम नागरिक की उम्मीद अदालत और देश की न्याय व्यवस्था से होती है। मानसून पर इन्सान का वश नहीं है, किन्तु अदालतें इन्सान यानी न्यायाधीशों के सहारे चलती हैं।

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अकेले वामपंथ ही क्यों है भगत सिंह की विरासत का असली दावेदार?

भगत सिंह को सब अपनाना चाहते हैं लेकिन भगत सिंह की वैचारिक विरासत का संवाहक एवं दावेदार वामपंथ है। भगत सिंह मसीहा नहीं थे और ना ही मसीहाई में विश्वास रखते थे। भगत सिंह में वर्गीय समझ थी जो तर्कपूर्ण अध्ययन से मिलती है।

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नए कृषि कानून का विरोध और आंदोलन बड़े किसानों का मसला है! चुनावी बिहार से प्रतिक्रियाएं…

एक ऐसे वक़्त में जब किसान अपनी आवाज मीडिया में दर्ज नहीं करा पा रहे हैं, मोबाइल वाणी ने उन्‍हें कृषि बिल पर अपनी राय दर्ज करवाने का एक मौका दिया और उनकी बात रिकॉर्ड की। आइए जमीन से आयी किसानों की आवाज़ के जरिये समझते हैं कि कृषि बिल को लेकर वे क्‍या सोच रहे हैं।

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बेलारूस में लोकतंत्र बहाली की आड़ में कोई और खेल खेला जा रहा है!

इसमें कोई दो राय नहीं है कि लुकाशेंको को देर-सबेर जाना होगा. पुतिन को भी उनसे छुटकारा पाना होगा, लेकिन रूस ऐसा पश्चिम की शर्तों के मुताबिक नहीं करेगा और उसे ऐसा करना भी नहीं चाहिए. यह भी समझना चाहिए कि लुकाशेंको का बेलारूस यानुकोविच का यूक्रेन नहीं है. लुकाशेंको पुराने ढंग के तानाशाह हैं.

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हाथरस: परिवार ने DM-SP और कांग्रेस ने योगी का नार्को टेस्ट कराने को कहा, HC में याचिका

गोखले के मुताबिक परिवार का नार्को टेस्‍ट कराने का योगी सरकार का फैसला न केवल गैरकानूनी है बल्कि इलाहाबाद हाइकोर्ट के सामने आगामी 12 अक्‍टूबर को परिवार की पेशी के सम्‍बंध में उसे डराये धमकाये जाने का बहाना भी है।

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महात्मा गाँधी की ‘नयी तालीम’ के आईने में नयी शिक्षा नीति 2020

गाँधी की नयी तालीम क संदर्भ में तुलनात्मक ढंग से अगर इस नीति की समीक्षा की जाए, तो यह एक प्रकार से पहले से चली आ रही शिक्षा नीतियों में एक अपडेट नोटिफिकेशन की तरह आया है। शिक्षा एवं शिक्षण संबंधी संरचना के अलावे इसमें ऐसा कुछ भी नया या रचनात्मक नहीं है

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गाँधी स्मृति: कितनी दूर, कितनी पास?

मेरे मित्र एवं प्रसिद्ध बुद्धिजीवी अपूर्वानन्द इस प्रश्न को अपनी कई सभाओं में उठा चुके हैं। उनका यह भी कहना है कि दिल्ली के तमाम स्कूलों में उन्होंने यह जानने की कोशिश की और उन्होंने यही पाया कि लगभग 99 फीसदी छात्रों ने इस स्थान के बारे में ठीक से सुना नहीं है, वहां जाने की बात तो दूर रही।

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झारखंड में 60 फीसद अमीरों की जेब में जा रहा है बिजली सब्सिडी का पैसा

करीब 900 परिवारों पर किए गए इस सर्वे के मुताबिक शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों में बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी में से कम से कम 60% हिस्सा अमीरों (रिचेस्ट टू फिफ्थ) के पास पहुंच रहा है वहीं सिर्फ 25% भाग गरीबों (पुअरेस्ट टू फिफ्थ) के पास जा रहा है।

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हाथरस कांड के आगे और पीछे सिर्फ और सिर्फ जाति का खेल है, और कुछ नहीं!

हाथरस की घटना दलितों पर होने वाले अत्याचार का आईना मात्र है, लेकिन यह घटना सामूहिक बलात्कार की अन्य घटनाओं से भी आगे बढ़कर है जहां पीड़िता की जीभ को काट दिया गया, रीढ़ की हड्डी को तोड़ दिया गया तथा सामूहिक बलात्कार ने उस लड़की के आत्मसम्मान, स्वाभिमान और मानव गरिमा को धूमिल कर दिया। जहां तक सामाजिक न्याय, सम्मान, विश्वास का सवाल है वह प्रत्येक दिन दलितों के साथ उड़ जाता है।

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