डिक्टा-फिक्टा: युद्धोन्मादी विचारधारा अमेरिकी लॉबीस्टों का काम आसान कर रही है

भद्रकुमार जैसा वरिष्ठ और अनुभवी कूटनीतिक जब यह कहता है कि डोवाल की कोशिशों को नाक़ामयाब बनाने और उसे ग़लत साबित करने की रिपोर्टों और विश्लेषणों के पीछे दिल्ली में मौजूद ताक़तवर अमेरिकी लॉबी है, तो हमें गंभीरता से इसे सुनना-समझना चाहिए.

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डिक्टा फिक्टा: मेलज़र की चेतावनी, भुतहा फिल्में और ‘सब याद रखा जाएगा’ की फंतासी

प्रोफ़ेसर मेलज़र ने स्पष्ट लिखा है कि इतने साल तक वे जूलियन असांज के विरुद्ध चल रहे दुष्प्रचार के प्रभाव में रहे और उन्हें भी लगता रहा था कि असांज पर लगाए जा रहे आरोप सही हैं, जबकि सच यह है कि यह सब उन अपराधों से ध्यान हटाने के लिए किया गया है जिन्हें असांज ने हमारे सामने उजागर किया है.

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डिक्टा-फिक्टा: बदलती विश्व व्यवस्था और पुतिन का आलेख

पश्चिमी देशों में इस लेख के महत्व पर चर्चा करने के बजाय पुतिन पर आरोपों का दौर शुरू हो गया है कि रूसी राष्ट्रपति इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास कर रहे हैं

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डिक्टा-फ़िक्टा : फ़र्ज़ी तख्तापलट, क़ैद में दो पत्रकार और बोल्टन की उद्घाटक किताब

आज से जनपथ पर प्रकाश के. रे का स्तम्भ डिक्टा-फिक्टा शुरू हो रहा है. इस स्तम्भ में इन्टरनेट पर चल रही विविध चर्चाओं और समकालीन विषयों की संक्षिप्त सूचनाएं होंगी …

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गुलाबो सिताबो: सामंतवाद की ढहती हवेली में इंसानी विडंबनाओं से साक्षात्कार

मनोवैज्ञानिक विल्हेम राइख़ ने अपने पर्चे ‘लिसेन लिटिल मैन’ (1945) में लिखा था- ‘लघु मानव, तुम मुझसे पूछते हो कि तुम कब एक अच्छा, व्यवस्थित जीवन जी सकोगे, मेरा उत्तर …

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दुनिया के मजदूर थके हैं, पस्त हैं, अपनी मुक्ति के बारे में वे नहीं सोच पाएंगे!

मज़दूरों से क्रांति या विरोध की उम्मीद करना. ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ है. उसके लिए या तो क्रांतिकारी मज़दूर की विशेष पृष्ठभूमि होनी चाहिए या फिर उसे अन्य वर्ग से नेतृत्व मिले.

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कोरोना संकट के बाद बदल जाएंगे अमेरिका-चीन समीकरण

कोरोना वायरस के विश्वव्यापी संक्रमण, ढहती अर्थव्यवस्थाओं और बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच जो कुछ भी दुर्भाग्यपूर्ण एवं भयावह हो सकता है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसके सूत्रधार बनकर उभरे हैं.

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