धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश पर इलाहाबाद HC का UP सरकार को नोटिस
सभी याचिकाकर्ताओं की समान दलील है कि यह अध्यादेश चयन और धार्मिक आस्था की आज़ादी के मूलभूत अधिकार का हनन करता है।
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सभी याचिकाकर्ताओं की समान दलील है कि यह अध्यादेश चयन और धार्मिक आस्था की आज़ादी के मूलभूत अधिकार का हनन करता है।
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एक्सेटर विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर पियरे फ्राइडलिंगस्टीन ने कहा -“हालांकि वैश्विक उत्सर्जन पिछले साल इतना अधिक नहीं था पर अभी भी लगभग 39 बिलियन टन CO2 की मात्रा में है ।जबकि वातावरण में CO2 में और वृद्धि हुई है वायुमंडल में CO2 स्तर और परिणाम स्वरूप विश्व की जलवायु केवल तभी स्थिर होगी जब वैश्विक CO2 उत्सर्जन जीरो के आस पास होगा।
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मोदी कैबिनेट की पूर्व मंत्री और अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने ट्वीट कर लिखा है कि केंद्र सरकार की जिद और किसानों की हालत को नजरअंदाज करने के कारण सिंघरा वाले बाबा राम सिंह जी ने ख़ुदकुशी कर ली।
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किसान आंदोलन का पहला अध्याय वार्ताओं का रहा। वार्ता विफल होने के बाद दूसरा अध्याय प्रदर्शनों का था। सोमवार को यह चरण भी अनशन के साथ समाप्त हो गया। इस बीच सरकार ने चारों तरफ से आंदोलन को घेर लिया है और किसानों का दिल्ली घेरने का कार्यक्रम विफल हो चुका है। आगे क्या होगा, कोई नहीं जानता…
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वॉल स्ट्रीट जर्नल में जेफ होरवित्ज़ और न्यूली पुर्नेल पहले भी फेसबुक की भारत केंद्रित श्रृंखला में दो अहम खुलासे कर चुके हैं। इस ताजा रिपोर्ट में वे बताते हैं कि फेसबुक के प्रवक्ता एंडी स्टोन के मुताबिक उनकी सुरक्षा टीम द्वारा बजरंग दल को प्रतिबंधित करने पर दी गयी चेतावनी के बारे में मानक प्रक्रिया के हिसाब से विचार-विमर्श किया गया था।
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‘ईज आफ डूयिंग बिजनेस’ के लिए मोदी सरकार द्वारा लाए मौजूदा लेबर कोड मजदूरों की गुलामी के दस्तावेज है। सरकार इनके जरिए रोजगार सृजन के जो भी सब्जबाग दिखाए सच्चाई यही है कि ये रोजगार को खत्म करने और लोगों की कार्यक्षमता व क्रय शक्ति को कम करने वाले ही साबित होंगे। इससे मौजूदा आर्थिक संकट घटने के बजाए और भी बढ़ेगा और पर्याप्त कानूनी सुरक्षा के अभाव में औद्योगिक अशांति बढेगी जो औद्योगिक विकास को भी बुरी तरह से प्रभावित करेगी।
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लेखकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई का एजेंडा कोई छुपा हुआ नहीं था जो अचानक कल सामने आ गया। किसान यूनियनों ने सरकार को जो सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था, उनमें शामिल एक मांग की तहत यह किया गया। यह बात पहले से पर्याप्त सार्वजनिक है।
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मोबाइलवाणी के मंच पर देश के कोने-कोने से किसानों ने अपनी बात रिकॉर्ड की है. बिहार का छोटा सा गांव हो या झारखंड का कोई ब्लॉक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश से 400 से भी ज्यादा किसानों ने इस मंच के जरिये साफ तौर पर कहा है कि वे इस कानून को नहीं मानते. वे नहीं मानते कि सरकार उनका भला चाहती है!
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बिना महिलाओं के योगदान एवं हस्तक्षेप के मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा सर्वसमावेशी नहीं बन पाती बल्कि इसके एकांगी होकर पुरुषों के अधिकारों की सार्वभौम घोषणा बन जाने का खतरा था।
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कायदे से छठे दौर की बैठक का दिन आज तय था, लेकिन जाने किस जल्दबाज़ी और उम्मीद में गृहमंत्री ने बैठक एक दिन पहले बुलवा ली। बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने पहले से तय आज की बैठक को रद्द करते हुए कहा कि किसान संगठनों को सरकार एक प्रस्ताव लिखित में भेजेगी। उसके बाद उक्त प्रस्ताव पर बैठक गुरुवार को होगी।
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