‘खतरनाक संगठन’ मानने के बावजूद फ़ेसबुक ने बजरंग दल को प्रतिबंधित नहीं किया! WSJ की रिपोर्ट

वॉल स्‍ट्रीट जर्नल में जेफ होरवित्‍ज़ और न्‍यूली पुर्नेल पहले भी फेसबुक की भारत केंद्रित श्रृंखला में दो अहम खुलासे कर चुके हैं। इस ताजा रिपोर्ट में वे बताते हैं कि फेसबुक के प्रवक्‍ता एंडी स्‍टोन के मुताबिक उनकी सुरक्षा टीम द्वारा बजरंग दल को प्रतिबंधित करने पर दी गयी चेतावनी के बारे में मानक प्रक्रिया के हिसाब से विचार-विमर्श किया गया था।

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मोदी सरकार के लेबर कोड मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज़ हैं!

‘ईज आफ डूयिंग बिजनेस’ के लिए मोदी सरकार द्वारा लाए मौजूदा लेबर कोड मजदूरों की गुलामी के दस्तावेज है। सरकार इनके जरिए रोजगार सृजन के जो भी सब्जबाग दिखाए सच्चाई यही है कि ये रोजगार को खत्म करने और लोगों की कार्यक्षमता व क्रय शक्ति को कम करने वाले ही साबित होंगे। इससे मौजूदा आर्थिक संकट घटने के बजाए और भी बढ़ेगा और पर्याप्त कानूनी सुरक्षा के अभाव में औद्योगिक अशांति बढेगी जो औद्योगिक विकास को भी बुरी तरह से प्रभावित करेगी।

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राजनैतिक बंदियों की रिहाई तो किसान आंदोलन के माँगपत्र का हिस्सा है, फिर हल्ला किस बात का?

लेखकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई का एजेंडा कोई छुपा हुआ नहीं था जो अचानक कल सामने आ गया। किसान यूनियनों ने सरकार को जो सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था, उनमें शामिल एक मांग की तहत यह किया गया। यह बात पहले से पर्याप्‍त सार्वजनिक है।

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अगर आपको अब भी लगता है कि किसान आंदोलन सिर्फ पंजाब का है, तो ये आवाज़ें सुनें!

मोबाइलवाणी के मंच पर देश के कोने-कोने से किसानों ने अपनी बात रिकॉर्ड की है. बिहार का छोटा सा गांव हो या झारखंड का कोई ब्लॉक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश से 400 से भी ज्यादा किसानों ने इस मंच के जरिये साफ तौर पर कहा है कि वे इस कानून को नहीं मानते. वे नहीं मानते कि सरकार उनका भला चाहती है!

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इन महिलाओं के बिना पुरुषों तक ही सीमित रह जाती मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा

बिना महिलाओं के योगदान एवं हस्तक्षेप के मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा सर्वसमावेशी नहीं बन पाती बल्कि इसके एकांगी होकर पुरुषों के अधिकारों की सार्वभौम घोषणा बन जाने का खतरा था।

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‘मुर्गी बैठे रही, अंडा नहीं दिया’: अब सरकार के प्रस्‍ताव पर कल होगी अगली बातचीत, आज वाली रद्द

कायदे से छठे दौर की बैठक का दिन आज तय था, लेकिन जाने किस जल्‍दबाज़ी और उम्‍मीद में गृहमंत्री ने बैठक एक दिन पहले बुलवा ली। बेनतीजा रहने के बाद उन्‍होंने पहले से तय आज की बैठक को रद्द करते हुए कहा कि किसान संगठनों को सरकार एक प्रस्‍ताव लिखित में भेजेगी। उसके बाद उक्‍त प्रस्‍ताव पर बैठक गुरुवार को होगी।

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किसान आंदोलन: कांग्रेस, AAP और लेखक-सांस्कृतिक संगठनों ने किया भारत बंद का समर्थन

आज न्यू सोशलिस्ट इनीशिएटिव, दलित लेखक संघ, अखिल भारतीय दलित लेखिका मंच, प्रगतिशील लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, इप्टा, संगवारी, प्रतिरोध का सिनेमा और जनवादी लेखक संघ ने किसान आंदोलन की माँगों और 8 दिसंबर के भारत बंद के समर्थन में बयान जारी किया।

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धर्मांतरण विधेयक: पितृसत्ता के इस्लामिक मर्ज़ के खिलाफ़ पितृसत्ता का हिंदुत्ववादी पहरा

कुरान के नियम केवल यह बताते हैं कि कोई धार्मिक-नैतिक सिद्धांत पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवनकाल में सातवीं शताब्दी के अरब की तत्कालीन परिस्थितियों में किस प्रकार क्रियान्वित किया गया था। आज जब परिस्थितियां और संदर्भ पूरी तरह बदल चुके हैं तब उस समय बनाए गए नियम कानून उस मूल सिद्धांत को अभिव्यक्त नहीं कर सकते जिस पर ये आधारित हैं।

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बॉर्डर पर किसान आंदोलन और मिडिल क्लास का ‘बॉर्डर’!

ऐसा लगता है मिडिल क्लास ने अपने और आंदोलनों के बीच एक बार्डर बना रखा है- यह जानते हुए भी कि ये आंदोलन जनता के अधिकारों और देश के संवैधानिक मूल्यों को बचाने के लिए देश के मजदूरों और किसानों द्वारा चलाये जा रहे हैं– वो अपने ही द्वारा बनाए हुए बार्डर को लांघना नहीं चाहता।

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हजारों करोड़ के कर्ज़ पर टिका शिवराज का ‘गरम’ हिन्दुत्व!

सूबे की माली हालत तो पहले से ही खराब थी, कोरोना और जीएसटी में कमी के कारण सरकार के राजस्व में भारी कमी आई है. हालत यह है कि इस साल मार्च में चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद से पिछले 8 महीने के दौरान ही शिवराज सरकार अभी तक कुल दस बार में करीब 11500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है.

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