गाँधीवाद के सही पाठ का सवाल हमारी अस्तित्व-रक्षा से जुड़ा है!

हम गांधी की सीखों पर अमल न कर पाए और हमने स्वयं को हिंसा-प्रतिहिंसा एवं घृणा की लपटों में झुलसकर नष्ट होने के लिए छोड़ दिया है। गांधीवाद हमारी अस्तित्व रक्षा के लिए आवश्यक है और इससे हमारा विचलन हमें गंभीर सामाजिक विघटन की ओर ले जा सकता है।

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पंजाब-हरियाणा: पवार की राह पर कैप्‍टन, आंदोलन की नाव से पार उतरने की कोशिश में चौटाला!

किसान आंदोलन के दस महीने पूरे होने पर पंजाब और हरियाणा की राजनीति में जो उथल-पुथल देखी जा रही है, वो इस बात का गवाह है कि पंजाब और हरियाणा के शांतिपूर्ण किसानों की जिद के आगे सत्‍ता के गलियारों में भयंकर बेचैनी है। ये बेचैनी क्‍या शक्‍ल अख्तियार करेगी यह तो आने वाले दिन ही बताएंगे लेकिन दोनों राज्‍यों में हो रही सियासी हलचलों को समझना जरूरी है। दो अलग-अलग टिप्‍पणियों में पंजाब और हरियाणा के सियासी माहौल का जायज़ा ले रहे हैं वरिष्‍ठ टिप्‍पणीकार जगदीप सिंह सिंधु।

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कांग्रेस का आंतरिक संकट और नये दरबारियों से घिरे शीर्ष नेतृत्व की भटकन

भाजपा को आगामी लोकसभा चुनावों में पराजित करने की कोई भी रणनीति कांग्रेस की उपेक्षा करके अथवा उसे पूर्ण रूप से खारिज करके तैयार नहीं की जा सकती। यह भी एक ध्रुव सत्य है कि नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस अविभाज्य रूप से अन्तरसम्बन्धित हैं। एक के बिना दूसरे की कल्पना नहीं की जा सकती। यह रिश्ता इतना अनूठा और अपरिभाषेय है कि कांग्रेस की दुर्दशा के लिए नेहरू-गांधी परिवार को जिम्मेदार मानने वाले भी यह जानते हैं कि अगर कांग्रेस को सत्ता वापस कोई दिला सकता है तो वह नेहरू-गांधी परिवार ही है।

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हवाना सिन्ड्रोम: वायरस के बाद अब खुफिया माइक्रोवेव हथियारों के आतंक का नया अध्याय

पिछले दिनों सीआइए के निदेशक विलियम बर्न्‍स के साथ भारत आए उक्त अधिकारी में पाए गए इन लक्षणों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कम्प मचा हुआ है। सीआइए के अधिकारी इसे ‘‘अमरीका विरोधी साजिश’’ करार दे रहे हैं। एक महीने में यह दूसरी बार ऐसा हुआ है जिसमें अमरीका के दो खुफिया अधिकारी इस ‘हवाना सिन्ड्रोम’ के शिकार हुए हैं। पिछले महीने अमरीकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के वियतनाम दौरे में भी ऐसी ही घटना हुई थी।

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अफीम की खेती, तालिबान का राज और साम्राज्यवादी नीतियां

जानकारों का कहना है कि अगर तालिबान अफीम की खेती पर काबू पाना चाहे, तब भी उसके लिए ये मुश्किल चुनौती होगी। उस हाल में जिन किसानों की आमदनी का यह मुख्य स्रोत है, उनकी बगावत का उसे सामना करना पड़ेगा।

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अफगानी महिलाओं के दुख से बेखबर विश्व समुदाय

यूएनओ और सार्क जैसे संगठन हैं, नारी स्वतंत्रता एवं मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली ढेर सारी संस्थाएं हैं, उत्तरोत्तर उदार और प्रजातांत्रिक होते विश्व के लोकप्रिय और शक्तिशाली सत्ता प्रमुख हैं किंतु जो बात अपरिवर्तित है वह है अफगान महिलाओं की नारकीय स्थिति। क्या यह स्थिति अपरिवर्तनीय भी है?

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इतिहास बहुत क्रूर होता है, प्रधानसेवक महोदय! जन्मदिन की शुभकामनाएं…

गडकरी की बात डराती है, सीएम और मिनिस्टर्स का डर डराता है, किसी को आपके अगले मूव, अगली चाल का पता न होना डराता है। सूचनाओं का एकतरफा प्रवाह डराता है, शासन का बिल्कुल केंद्रशासित हो जाना डराता है। आज ट्विटर पर हो रहे ख़तरनाक ट्रेंड डरा रहे हैं, एक गुट भक्तएंथम ट्रेंड कर रहा है, तो दूसरा अखंड पनौती दिवस ट्रेंड करवा रहा है, समाज का इतना तीखा बंटवारा डरा रहा है।

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NHRC ने राज्यों और अन्य प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर किसान आंदोलन की रिपोर्ट मांगी

आयोग ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार, मुख्य सचिव, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पुलिस आयुक्त, दिल्‍ली को नोटिस जारी कर उनसे संबंधित कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आह्वान किया।

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हार्दिक पटेल के कांग्रेस में होने का मतलब क्या है?

यह किसी के भी समझ में न आनेवाली बात है कि आखिर कांग्रेस अपने संभावनाशील युवा नेताओं की कद्र क्यों नहीं कर पा रही। सुष्मिता देब, जितिन प्रसाद और ज्योतिरादित्य सिंधिया का जाना कांग्रेस के लिए नुकसानदेह रहा, लेकिन जो बचे हैं उनमें हार्दिक पटेल जैसे क्षमतावान युवा नेता को ताकत देने के मामले में कांग्रेस की कंजूसी समझ से परे है। गुजरात में वैसे भी कांग्रेस के पास खोने को बाकी रहा क्या है!

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मुफलिसी और मिशन से अब वास्तविकता के भी परे जा चुकी हिंदी की पत्रकारिता

आज पत्रकारिता के कामकाज की दशाएं बदली हैं। आज पत्रकारिता में इस मिशन या समर्पण को बनाए रखने के लिए समाज के सहारे और व्यापक समर्थन की जरूरत है।

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