डेटा पर नियंत्रण के रास्ते बनते कंपनियों के नये बहुराष्ट्रीय उपनिवेश: संदर्भ फ़ेसबुक
काफी समय से साम्राज्यों का अध्ययन उनके सूचना-संचार का अध्ययन के रूप में प्रकट हुआ है. अब तो यह निष्कर्ष सामने आ गया है कि संचार का माध्यम ही साम्राज्य था.
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काफी समय से साम्राज्यों का अध्ययन उनके सूचना-संचार का अध्ययन के रूप में प्रकट हुआ है. अब तो यह निष्कर्ष सामने आ गया है कि संचार का माध्यम ही साम्राज्य था.
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उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य और भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक केदार नाथ सिंह ने गत 18 फरवरी को 64 परिवारों की घनी बस्ती खाली कराने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधीन मीरजापुर नगर प्रखंड के जिलेदार (द्वितीय) ने गत 19 जून को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अंदर मांगा जवाब। रॉबर्ट्सगंज विकास खंड के ग्राम पंचायत बहुअरा में वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग किनारे 15 बीघा जमीन का मामला।
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अब हम अपने भारतमाता का हिरदय से नमन करत हई, जेका अपने सब सबसे ज्यादा पियार कीन जात है, जउन बहुत पुरान अहै, जउन जनम-जनम से जगमगात अहै, औ जउन सबसे नई अहै
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अपने आसपास की दुनिया को ध्यान से पढ़ने वाले सभी लोगों को पहले से लग रहा था कि इस महामारी को डिजिटल तकनीकी के प्रसार के लिए बहाने के तौर पर प्रयोग किया जायेगा. यह आशंका सही सिद्ध हो गयी है।
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आज भारत के प्रधानमंत्री ने इस पर पहले जैसी रस्म-अदायगी के तौर पर भी कुछ नहीं कहा है जबकि उनके ट्विटर पर मंदिर की भव्यता और ऐतिहासिकता पर एक दर्जन से अधिक टीपें शाया हुई हैं.
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कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटे 5 अगस्त 2020 को एक साल पूरा हुआ। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र कुमार ने मशहूर डाक्यूमेंट्री निर्माता फिल्मकार संजय काक से कश्मीर पर बात की।
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उनकी मृत्यु एक लंबी बीमारी के बाद 28 अप्रैल 2010 को लखनऊ के मेयो अस्पताल में हो गई। उनकी मृत्यु का दुख उनके कुछ थोड़े-से मित्रों और लंबे समय तक सहयोगी मीरा बहन ने ही महसूस किया। लखनऊ से बाहर चिनहट में अक्षय ब्रह्मचारी आश्रम है जो आज भी इस अयोध्या के गांधी का कार्य आगे बढ़ाने में लगा हुआ है।
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यह स्पष्ट है कि अयोध्या रणनीति का विचार यहीं पैदा हुआ। साथ ही इसमें एक उपहास का भाव भी मिला हुआ था कि योजना व्यावहारिक हो भी सकती है या नहीं?
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पूर्ण रोजगार की एक नीति के सभी विचारों को नीतिगत चर्चा से दूर रखा जाता है और बेरोजगारी एवं विनाश को बढ़ने दिया जाता है. यह कदम मजदूरी को लेकर मोलभाव करने की मजदूरों की शक्ति को कमजोर करने की नीयत से सिर्फ मजदूरों की एक आरक्षित सेना नहीं बनाये रख रहा है, बल्कि मज़दूरों की उनकी औकात भी दिखाता है.
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आपराधिक अवमानना पर एक कानून की आवश्यकता की समीक्षा करने से आगे बढ़कर अवमानना के पैमाने का भी मूल्यांकन किये जाने की ज़रूरत है। यदि ऐसा कोई पैमाना वास्तव में होना ही चाहिए, तो वो यह हो कि क्या सवालिया टिप्पणी कोर्ट को उसका काम करने से रोके दे रही है। इसके अतिरिक्त, संस्थान की कैसी भी आलोचना को रोकने का साधन इसे नहीं बनने देना चाहिए।
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