फर्जी मुठभेड़ों को सभी सियासी दलों की स्वीकृति का दो दशक पुराना इतिहास
आनंद स्वरूप वर्मा की एक टिप्पणी का अंश जो उनकी पुस्तक ‘पत्रकारिता का अंधा युग’ से लिया गया है।
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आनंद स्वरूप वर्मा की एक टिप्पणी का अंश जो उनकी पुस्तक ‘पत्रकारिता का अंधा युग’ से लिया गया है।
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उसने न सिर्फ अपने परिवार के सदस्यों को तीन गांवों की प्रधानी दिलवायी बल्कि खुद के लिए भी जिला पंचायत सदस्य का पद प्राप्त किया। इस पद पर वो 15 वर्षों तक काबिज़ रहा। विकास का प्रभाव क्षेत्र अब शिवली समेत मंधना, बिल्हौर, शिवराजपुर और कानपुर शहर तक फैल चुका था।
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पं. सुन्दरलाल महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी हैं तथा गांधीवादी के रूप में विख्यात हैं। ब्रिटिश शासन के जमाने में उन्होंने हलचल मचा देने वाली एक किताब लिखी थी ‘भारत में अंग्रेजीराज’, जिसे ब्रिटिश सरकार ने तुरंत जब्त कर लिया था। 1951 ई. में वे चीन जाने वाले भारतीय शिष्टमंडल के नेता थे। वहां से लौटकर उन्होंने चीन के संबंध में ‘आज का चीन’ प्रसिद्ध पुस्तक लिखी।
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प्रचंड खेमा ओली के विरोध के पीछे समझौते के अलावा भी कई कारण गिनाता है. मिसाल के लिए, प्रचंड खेमे का आरोप है कि दो पार्टियों के बीच एकता के वक्त जो प्रतिबद्धताएं से ओली ने की थीं वह उनसे पीछे हट गए हैं. इन प्रतिबद्धताओं में से एक थी कि ओली और प्रचंड बारी-बारी से प्रधानमंत्री पद संभालेंगे.
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ओली और प्रचंड के बीच जो टकराव चल रहा है वह सिर्फ इन दो नेताओं की टक्कर का मामला नहीं है बल्कि यह नेपाल की भूराजनीति को और चीन के साथ उसके संबंध को लंबे कालखंड के लिए बदल सकता है.
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नवायन को समझ में आया कि जिस तरह किताबों से लेकर दर्जियों तक सब पर लॉकडाउन की मार पड़ी है, कुछ ऐसा किया जाना चाहिए ताकि दोनों अपने अपने अस्तित्व को एक दूसरे के सहारे बचा सकें. इस तरह बुनावट और लिखावट की दुनिया का संगमेल हुआ.
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जब एक अदीब और शायर गद्य और पद्य दोनों में एक जैसी महारत रखता है तो अक्सर ऐसा होता है कि उसका एक पहलू लोगों की निगाह से ओझल हो जाता है. इब्ने इंशा के साथ भी ऐसा ही हुआ है. कुछ सिर्फ़ उनकी शायरी को जानते हैं और कुछ सिर्फ़ उनके गद्य को.
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कोरोना महामारी के चढ़ते ग्राफ़ के बीच पत्रकारों की नौकरी जिस गति से जा रही है, वह दिन दूर नहीं जब कोरोना से संक्रमित होने वाले नागरिकों की संख्या को …
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डॉ. श्याम बिहारी राय से मेरे पहली मुलाक़ात 1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में किसी समय दिल्ली में हुई थी और तब से अंत तक उनके साथ जीवंत संबंध …
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जिस तरह से हिन्दू साम्प्रदायिकता का अपना अलग आधार है उसी तरह से मुस्लिम साम्प्रदायिकता का। दोनों एक दूसरे के सहारे पली पुसी हैं यह इस समस्या एक पहलू भर …
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