अपने तीन पत्रकारों पर दिल्ली में दिनदहाड़े हमले पर The Caravan ने जारी किया बयान, पूरी कहानी
समूह ने कारवां की महिला स्टाफर के विरुद्ध शारीरिक और यौन हिंसा की
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समूह ने कारवां की महिला स्टाफर के विरुद्ध शारीरिक और यौन हिंसा की
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राष्ट्रीय सेक्युलर मंच के संयोजक श्री लज्जा शंकर हरदेनिया और मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव शैलेन्द्र शैली ने एक शोक प्रस्ताव में कहा कि राहत इंदौरी जी मानवीय मूल्यों, सामाजिक न्याय, विश्व शांति और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध शायर थे।
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सिविल सोसाइटी संगठन उड़ीसा श्रमजीवी मंच, महिला श्रमजीवी मंच, सोनभद्र विकास संगठन और आत्मशक्ति ट्रस्ट ने इस घटना की निंदा की है एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश पुलिस एवं बुलंदशहर के जिलाधिकारी को टैग करते हुए ट्विट करते हुए सुदीक्षा और उनके परिवार को तत्काल न्याय देने की मांग सरकार से की है।
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शोधकर्ता सज्जाद हुसैन तुहिन ने कहा कि बांग्लादेश अडानी गोड्डा पावर प्लांट से 7.53 टका प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदेगा लेकिन भारत में सौर ऊर्जा की कीमत केवल 2.74 टका है।
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केवाईएस ने डीयू के उदासीन रवैये की कड़ी भर्त्सना की! एमएचआरडी और यूजीसी से तुरंत हस्तक्षेप कर छात्रों का भविष्य बचाने की मांग की!
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अपने आसपास की दुनिया को ध्यान से पढ़ने वाले सभी लोगों को पहले से लग रहा था कि इस महामारी को डिजिटल तकनीकी के प्रसार के लिए बहाने के तौर पर प्रयोग किया जायेगा. यह आशंका सही सिद्ध हो गयी है।
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मजदूर एकता केंद्र मांग करता है कि श्रम-क़ानूनों के स्थगन को तुरंत वापस लिया जाये| साथ ही, राज्य सरकारों से कंपनियों और कॉर्पोरेटों के हित में मजदूरों के अति-शोषण की इजाज़त देने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करता है|
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भारत छोड़ो आंदोलन के ऐतिहासिक दिन ‘कारपोरेट भगाओ-किसान बचाओ’ के नारे पर पूरे देश के सैकड़ों किसान और मजदूरों संगठनों के आव्हान पर उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड, ओडिशा, कर्नाटक व महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट व सहमना संगठनों द्वारा लोकतंत्र बचाओ दिवस मनाया गया।
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उनके नेतृत्व में चले स्वतंत्रता संग्राम में गुरिल्ला क्रांतिकारियों ने लाठी-डंडे, तलवार, फरसा, भाला, किर्च आदि लेकर मनोरमा नदी पार कर रहे अंग्रेज अफसरों पर 10 जून, 1857 को धावा बोल दिया जिसमें लेफ्टिनेंट लिंडसे, लेफ्टिनेंट थामस, लेफ्टिनेंट इंगलिश, लेफ्टिनेंट रिची, लेफ्टिनेंट काकल और सार्जेंट एडवर्ड की मौके पर मौत हो गई थी।
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इतालवी दार्शनिक जॉर्जो आगम्बेन कोविड के दौर में चर्चा में रहे हैं। अकादमिया में संभवत: वे पहले व्यक्ति थे, जिसने नावेल कोरोना वायरस के अनुपातहीन भय के खिलाफ आवाज़ उठाई। कोविड से संबंधित उनकी टिप्पणियों का हिंदी अनुवाद प्रमोद रंजन की शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक “भय की महामारी” के परिशिष्ट में संकलित है।
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