बीमारियों से तबाह दुनिया में बॉलीवुड का नायक कब तक भगवान भरोसे रहेगा?

एक ज़माना था जब सिनेमा एक तरफ डॉक्टर को भगवान दिखाता था और दूसरी ओर मरीजों को भगवान के भरोसे दिखाता था। घर वाले बेचारगी में मंदिर-मंदिर सिर पटकते थे। घंटे से सिर फोड़ते थे। एक ज़माना आज है, जब चिकित्सा व्यवस्था भगवान भरोसे है और मरीज भी भगवान के भरोसे। सिनेमा कॉर्पोरेट भरोसे है।

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एक सदी से पूंजी के जाले में फंसा किसान क्‍या करे?

इस व्यवस्था के जाल में फंसा हुआ किसान इससे बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा है। यदि किसानों को इस व्यवस्था के जाल से बाहर निकलना होगा, तो तय है पूंजीपतियों द्वारा जाति धर्म के बुने हुए जाल को खत्म करते हुए देश की संसद पर अपना हक जमाना होगा। मांगें पेश करने भर से काम नहीं चलेगा क्योंकि जो पूरी व्यवस्था है, वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पूंजीपतियों के कब्जे में है।

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“सरकार के खिलाफ़ गुस्सा बढ़ रहा है, अन्ना आंदोलन के सबक और घुसपैठियों के प्रति सतर्क रहें लोग”!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के अधिनायकवादी प्रोजेक्ट के विरुद्ध व्यापक आंदोलन के साथ ही समाज के राजनीतिकरण पर सर्वाधिक जोर देना होगा और सामाजिक संतुलन को बदलना होगा।

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कोयले से होने वाला बिजली उत्पादन कैसे निगल रहा है हमारे बच्चों की ज़िन्दगी?

इस विडियो को बनाने वाली मुख्य संस्थाएं हैं सीआरईए (CREA), डॉक्टर फॉर क्लीन एयर, दिल्ली ट्री एसओएस, एक्स्टिंक्ट रेबेलियन इंडिया, हेल्दी एनर्जी इनिशिएटिव, लेट मी ब्रीथ, माइ राइट टू ब्रीथ, पेरेंट्स फॉर फ्यूचर, वारिअर मॉम्स।

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लोग अपना पेट काटकर मिटा रहे हैं बच्‍चों की भूख, कहां गया 68% बच्‍चों के मिड-डे मील का पैसा?

जून में अनलॉक के बाद मोबाइलवाणी ने राशन कार्ड के संबंध में सर्वे किया, जिसमें 637 लोगों ने अपनी बात मोबाइलवाणी पर रिकॉर्ड की और उनमें से 77 फीसदी राशन कार्ड धारकों ने बताया कि उन्हें राशन नहीं मिला और बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों से पोषण आहार।

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बनारस, सोनभद्र और कौशाम्बी में जन्म के हफ्ते भर में ही मर रहे हैं 82 फीसद बच्चे: CRY

‍वाराणसी, कौशाम्बी और सोनभद्र में नवजात स्वास्थ्य की स्थिति पर क्राइ (CRY) संस्था ने माताओं और नवजात के लिए प्रभावी स्वास्थ्य सेवा में बाधा उत्पन्न करने वाले कारकों पर प्रकाश डाला

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COVID-19 से लड़ने के लिए शून्य उत्सर्जन की सूची में दिल्ली समेत भारत के तीन शहर शामिल: UN

संयुक्त राष्ट्र के रेस टू जीरो अभियान की तर्ज़ पर यह शहर और उद्योग 2050 तक शून्य-कार्बन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने की दौड़ में हैं। रेस टू जीरो अभियान, 2040-50 के दशक में शून्य उत्सर्जन के लिए प्रतिबद्ध स्थानीय सरकारों, व्यवसायों, निवेशकों और अन्य लोगों का सबसे बड़ा गठबंधन है।

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Article 21 पर यह संजीदा होने का वक्‍त है, ताकि दफ़न न होने पाएं बेगुनाहों को मिले ज़ख्‍म

अगर हम अपने करीब देखें तो ऐसे तमाम लोग मिल सकते हैं जो इसी तरह व्यवस्था के निर्मम हाथों का शिकार हुए- मामूली अपराधों में न्याय पाने के लिए उनका लम्बे समय तक जेलों में सड़ते रहना या फर्जी आरोपों के चलते लोगों का अपनी जिन्दगी के खूबसूरत वर्षों को जेल की सलाखों के पीछे दफना देना।

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तीनों कृषि विधेयक केवल किसानों पर ही नहीं, हमारी थाली पर भी सीधा हमला हैं!

विधेयक में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक अनाज व तेल के दाम पिछले साल के औसत मूल्य की तुलना में डेढ़ गुना व आलू-प्याज, सब्जी-फलों के दाम दोगुने से ज्यादा नहीं बढ़ेंगे, तब तक सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसका अर्थ है कि खाद्य वस्तुओं में महंगाई को 50-100% की दर से और अनियंत्रित ढंग से बढ़ाने की कानूनी इजाज़त दी जा रही है

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दिल्‍ली को झुग्‍गीमुक्‍त करने का केजरीवाल और मोदी का वादा क्‍या ऐसे पूरा होगा?

क्या देश को झुग्गीमुक्त बनाने का प्रयास झुग्गियों को तोड़ कर और लाखों लोगों को बेघर कर के किया जाएगा? क्या झुग्गी के मलबे के ढेर के साथ इन लाखों झुग्गीवासियों के वर्तमान और भविष्य को भी अंधकार की गोद में धकेल दिया जाएगा?

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