COVID-19 से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए जलवायु को खतरे में डाल रहे हैं G-20 के देश

कोविड से पहले जहाँ दुनिया भर में पर्यावरण अनुकूल नीतिगत फैसलों के नतीजे दिखना शुरू ही हुए थे, वहीँ कोविड की आर्थिक मार से उबरने के नाम पर दुनिया की कुछ चुनिन्दा अर्थव्‍यवस्‍थाएं अब जीवाश्‍म ईंधन से जुड़े उद्योगों पर अच्छा ख़ासा निवेश कर रही हैं। इससे न सिर्फ़ पिछले फैसलों के नतीजों पर पानी फिर रहा है, बल्कि अगले दस सालों में रिन्यूएबिल ऊर्जा अपनाने के रास्ते पर ख़ासी रुकावटें भी पैदा होंगी।

Read More

शपथ ग्रहण तो हो गया, अब नीतीश की ‘ग्रेसफुल विदाई’ तय करेगी सरकार की उम्र

या तो खट्टर और फडणवीस की तरह बिहार में भी तारकिशोर प्रसाद औऱ रेणु देवी को लाया-बढ़ाया जा रहा है या फिर मोदी-शाह द्वय ने सोच लिया है कि बिहार में नीतीश से सीधा वे ही डील करेंगे

Read More

ऑनलाइन मीडिया मंचों के गले तक पहुंचा सरकारी निगरानी का फंदा, OTT भी जद में

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से टीवी, मीडिया के प्रसारण पर नियंत्रण और कन्टेन्ट पर निगरानी के सम्बन्ध में जवाब मांगा था, जिसके जवाब में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दिया था कि ऑनलाइन माध्यमों का रेगुलेशन टीवी से ज्यादा जरूरी है.

Read More

पचनद पर दीप पर्व: एक दिया शहीदों के नाम, एक दिया चंबल में शिक्षा के नाम

स्थानीय जलवायु व भौगोलिक परिस्थितियों की उपेक्षा से मुक्ति के लिए यहां की पहचान को वैश्विक राष्ट्रीय धरातल पर उतारने का यह छोटा सा कदम है। यमुना चंबल के बीहड़ों की जो पहचान आजादी से पूर्व और आजादी के बाद रही है उसे चंबल फाउंडेशन के जरिये नए कलेवर में दुनिया के सामने रखने का यह सामूहिक प्रयास है।

Read More

उत्तर प्रदेश में मायावती राज और दलित उत्पीड़न

अब यह सामान्य अपेक्षा है कि जिस राज्य में सवर्ण मुख्यमंत्री के स्थान पर कोई दलित मुख्यमंत्री बनेगा वह दलित उत्पीड़न को रोकने के लिए वांछित इच्छाशक्ति दिखायेगा और अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण कानून को प्रभावी ढंग से लागू कराएगा ताकि दलित उत्पीड़न कम हो सके. पर क्या वास्तव में ऐसा होता है?

Read More

अंतिम नतीजा चाहे जो हो, यह जनादेश सिर्फ और सिर्फ नीतीश के खिलाफ है!

तेजस्वी अगर इस चुनाव के एकल विजेता हैं, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हार के सर्वाधिक उचित व्यक्तित्व। वैसे तो राजनीति में नैतिकता और शर्म नामक शब्द होते नहीं, लेकिन नीतीश को नतीजे देखते हुए खुद ही अब संन्यास ले लेना चाहिए, केंद्र की राजनीति चाहें तो करते रहें।

Read More

फ़ैसल खान की गिरफ़्तारी साझा संस्कृति के नये नारे की जरूरत को रेखांकित करती है

भारत के अन्दर तेजी से बदलता यह घटनाक्रम दरअसल सदिच्छा रखने वाले तमाम लोगों- जो तहेदिल से सांप्रदायिक सद्भाव कायम करना चाहते हैं, जहां सभी धर्मों के तथा नास्तिकजन भी मेलजोल के भाव से रह सकें- के विश्वदृष्टिकोण की सीमाओं को भी उजागर करता है।

Read More

बिहार: बनमनखी चीनी मिल के भव्य खंडहरों में छुपी है रोज़गार के चुनावी वादों की कड़वाहट

विडम्‍बना है कि जिस राज्‍य में कुछ दशक पहले तक सिर्फ चीनी से कई लाख लोगों को रोजगार मिलता था, आज वही रोजगार चुनावी वायदों और घोषणाओं में ढूंढा जा रहा है।

Read More

COVID-19 से उपजे आर्थिक दबाव में पांच लाख से ज्यादा लड़कियां बाल विवाह के लिए मजबूर

सिविल सोसाइटी संगठनों की मदद से चलाये जा रहे वैश्विक प्रयासों द्वारा पिछले एक दशक में बाल विवाहों की संख्या में 15% तक की कमी अवश्य आयी है, लेकिन 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने के लक्ष्य को प्राप्त करने लिए एक लंबा रास्ता तय करना अभी बाकी है।

Read More

कृषि विरोधी कानूनों के खिलाफ किसानों के सफल चक्का जाम का व्यापक असर

गुरुवार को 500 से अधिक किसान संगठनों द्वारा “कॉर्पोरेट भगाओ-खेती-किसानी बचाओ-देश बचाओ” के केंद्रीय नारे पर देशव्यापी चक्का जाम का आह्वान किया गया था। माकपा सहित प्रदेश की पांचों वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ता भी इस आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतरे।

Read More