जुलाई तक कैसे पूरी हो पाएगी 25 करोड़ आबादी के टीकाकरण की योजना

कोरोना की दूसरी लहर में जहां सबसे बुरे हालात गांव में बने वही हालात फिर से टीकाकरण के दौरान बन रहे हैं। इसके पीछे सरकार की वो प्रक्रिया है, जिस पर चलते हुए टीकाकरण केन्द्र तक पहुंचा जा सकता है। यह प्रक्रिया ही इतनी जटिल है कि आम आदमी टीका लगवाने के बजाय घर में दुबके बैठे रहने को ही एकमात्र रास्ता समझ रहा है।

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वैक्सीन लेने के बाद भी हो रही मौतों के कारण फैलते डर और संदेह के बीच सरकार चुप क्यों है?

सरकार को तत्‍काल वैक्‍सीन के बाद हुए संक्रमण और मौतों के आंकड़े जारी करने होंगे, ताकि इस मामले में पारदर्शिता बनी रहे क्‍योंकि आंकड़े छुपाने से अफ़वाहों को ही बल मिलेगा, उसका कोई लाभ नहीं होगा।

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अवसाद की महामारी: पहले बीमारी का डर, बाद में इलाज के खर्च का दोतरफा तनाव

लोग यह सोच-सोच कर परेशान और अवसादग्रस्त हो रहे हैं कि अगर लाख सावधानी के बावजूद भी उनको कोविड-19 हो गया तो क्या समय पर उनके इलाज के लिए साधन उपलब्ध हो पाएंगे और क्या वह इससे निजात पा सकेंगे।

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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में हादसा, दो मजदूर मृत, ठेकेदार पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग

उन्होंने कहा कि कॉरिडोर का ठेका लेने वाली कंपनी को बंगाल के गरीब मुस्लिम मजदूरों से काम कराना पड़ रहा है क्योंकि मोदी जी के इस धर्मविरोधी काम के लिए कोई भी स्थानीय हिंदू मजदूर तैयार नहीं है. मारे गए दो और घायल सातों मुस्लिम मजदूर बंगाल के निवासी हैं.

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लॉकडाउन में कोयला-चालित संयंत्रों ने जहां-तहां फेंका कचरा, साल भर में घटे 17 हादसे

‘कोल ऐश इन इंडिया- वॉल्यूम 2: ऐन एनवायरमेंटल सोशल एंड लीगल कम्पेंडियम ऑफ़ कोल ऐश मिस मैनेजमेंट इन इंडिया 2020-21’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट की मानें तो बिजली कंपनियों ने कोविड-19 के कारण लागू हुए लॉकडाउन को अपने पावर प्लांट में जमा हुई कोल फ्लाई ऐश को जहां-तहां फेंकने के मौके के तौर पर इस्तेमाल किया और यह एक बड़ी वजह बना प्रदूषण बढ़ने का।

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2020 से भी गरम होंगे आने वाले साल, ‘रेस टु ज़ीरो’ में शामिल हुए दुनिया भर के स्वास्थ्य संस्थान

इस बात का पता चला है वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाइजेशन (डब्लूएमओ) और UKMET यूके (यूनाइटेड किंगडम) मेट (मौसम) कार्यालय की सालाना जारी होने वाली ताज़ा ग्लोबल क्लाइमेट अपडेट नाम की रिपोर्ट में, जो अगले पांच वर्षों के लिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों की भविष्यवाणी करती है।

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यास और तौकते: चक्रवाती तूफानों के बनने का कारण और हानियां

तूफ़ान के कारण ओडिशा और पश्चिम बंगाल राज्य ख़ासे प्रभावित हुए हैं। ओडिशा में बालासोर, भद्रक, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा प्रभावित हुए हैं तो वहीं पश्चिम बंगाल के दक्षिणी और उत्तरी 24 परगना, दिगहा, पूर्वी मिदनापुर और नंदीग्राम पर बहुत असर पड़ा है। कोलकाता के 13 निचले इलाक़ों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हुए। ओडिशा ने अपने यहां पर 5.8 लाख लोगों को और पश्चिम बंगाल ने 15 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।

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विज्ञान-विरोधी आग्रहों के दौर में एक वैज्ञानिक राजनेता जवाहरलाल नेहरू की याद

आज जब हम कोरोना के महान संकट के दौर से गुजर रहे हैं, तो जवाहरलाल नेहरू की याद आना स्वाभाविक है। मेरी राय में जवाहरलाल नेहरू एक महान क्रांतिकारी, एक लोकप्रिय राजनीतिज्ञ, एक सक्षम प्रशासक तो थे ही परंतु इसके साथ ही वे वैज्ञानिक भी थे। उनकी स्पष्ट राय थी कि आम आदमी में वैज्ञानिक समझ पैदा करना आवश्यक है।

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जलवायु परिवर्तन: रॉयल डच शेल के खिलाफ हेग की अदालत का ऐतिहासिक फैसला

यह अपनी तरह का पहला कानूनी निर्णय है जो वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप एक प्रदूषणकारी अंतरराष्ट्रीय कम्पनी को अपने उत्सर्जन को कम करने के लिए आदेश देता है।

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शैक्षिक सिद्धांतों के आलोक में ‘छोकरी-टोकरी’ का गैर-जरूरी विवाद

कविता की समीक्षा शैक्षिक सिद्धांतों की मौलिकता के आधार पर ही होनी चाहिए, जिनको मैंने ऊपर वर्णित और रेखांकित किया है। इन्हीं आधारों पर इसकी विषयवस्तु में कई एक जगह मुझे विचलन देखने को मिला है, जिसमें सुधार की गुंजाइश बनती है हालाँकि विवाद का दूसरा अंश मुझे ग़ैरज़रूरी जान पड़ता है।

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