भारतीय जनता पार्टी अगर पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में जीत नहीं पायी तो पंजाब में चुनाव से पहले अपनी सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है, ऐसी संभावनाएं प्रबल हैं।
कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ यह मानने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में भाजपा पंजाब को हमेशा के लिए खो देगी। इसका एक बड़ा कारण वे बताते हैं कि तब तक किसान आंदोलन हुआ नहीं था। अगर थोड़ा पीछे जाएं और पडोसी राज्य हरियाणा को देखें तो स्थितियां लगभग ऐसी थीं जहां किसान वर्ग में भारी असंतोष था जिसके चलते भाजपा ने स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का वादा किया था और हरियाणा में अपनी राजनीति की राह आसान की।
भाजपा का सता के प्रति मोह किसी से छुपा हुआ नहीं है। सरोकारों के नाम पर व्यापारी और पूंजीपतियों की चौखट पर जाने से वे कतराते नहीं। पोलिटिकल लीडर और पोलिटिकल डीलर का अंतर पिछली दो दहाई में लगभग समाप्त हो चुका है। सामाजिक बोध में एकजुटता वर्तमान राजनीति को अब गंभीर रूप से अखरती है। विभाजन एक नया राजनीतिक अस्त्र बन कर उभरा है। राजनीतिक लाभ के लिए विभिन्न सामाजिक वर्गों में अपनी पहचान के महत्व को हवा देकर सामाजिक संरचना को अंतर्द्वंद में धकेलने की रणनीति नए आदर्श के रूप में प्रस्तुत की गई है।
अमृत काल में भाजपा द्वारा सत्ता प्राप्ति के कुछ विशेष रूल्स की ब्लू बुक है। उसके अनुसार ऐसी संभावनाएं हो सकती हैं। डबल इंजन के मूल सिद्धांत को साकार करना भाजपा का लक्ष्य हर राज्य में पूरा करना भी है। राज्यपाल सहयोग, चुनाव आयोग के निर्बाध कार्य, स्थानीय तंत्र और मीडिया का उपयोग आदि भी ब्लू बुक के रूल्स में हैं ही। प्रमुख योजनाओं के लिए केंद्रीय निधि जारी न करना और यह सुनिश्चित करना कि विपक्षी दलों के सदस्य अपनी सारी ऊर्जा जेल से बचने की कोशिश में लगाएं, पार्टियों की धनराशि के बैंक खातों पर रोक लगाना और दानदाताओं को गायब कर देना।
सहयोगी दलों में महत्वाकांक्षी नेताओं को विभाजन के लिए प्रेरित करके उनको सता में लाना और उनका भाजपा में विलय करवाना या फिर हाशिये पर धकेलना। महिला सम्मान के लिए धन योजना सबसे कारगर है। संवैधानिक प्रक्रियाओं की गुत्थी और महत्वपूर्ण संस्थागत एजेंसी के प्रयोग से सत्ता प्राप्ति का अपना लक्ष्य हासिल करना भाजपा की कार्य व्यवस्था का अनूठा उपक्रम विगत में देखा गया है।
2022 चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने पंजाब को कुछ गारंटी की घोषणा की थी। फ्री पानी, फ्री बिजली, शिक्षा क्रांति, स्वास्थ्य क्रांति, नशामुक्त पंजाब, बेरोजगारों के लिए लाभकारी योजनाएं और महिलाओं को मासिक धन सहायता, किसानों के लिए नई कृषि नीति। प्रचार किया जाता था कि प्रदेश के कुल बजट में से जो पैसा नेताओं के स्विस बैंकों में चला जाता है उसको रोक कर प्रदेश की महिलाओं के खातों में डाला जाएगा। पंजाब को रेवेन्यू प्लस राज्य बनाएंगे। सभी तरह के माफिया- ट्रांसपोर्ट माफिया, रेत बजरी माफिया, शराब माफिया, ड्रग माफिया ख़त्म कर दिया जाएगा और भविष्य में युवाओं को भागीदारी अवसर उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रदेश में चल रही लूट को बंद करके रंगला पंजाब फिर से बनाया जाएगा। जन लोकपाल कानून को लाकर पंजाब को भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाया जाएगा।
आम आदमी पार्टी के कार्यकाल में जो अपेक्षाएं पंजाब के आमजन ने की थीं वो धरातल पर उतरती हुई कहीं दिखाई दी नहीं। बेअदबी मामले में न्याय के लिए संघर्ष वैसे ही अभी भी जारी है। विदेशों में पलायन और प्रदेश में नशे को जड़ से खत्म करने की दिशा में कोई ठोस परिणाम पंजाब को संतुष्ट कर नहीं रहे। पंजाब के छोटे और मध्यम उद्योगों के पुनरुत्थान की नीति पूर्ण सापेक्ष आकार ले नहीं पायी। निरंतर आए दिन हो रही हत्याओं और गैंगस्टरवाद को सरकार द्वारा नियंत्रित करने पर जनता का विश्वास डगमगा चुका है। नई किसान नीति की कोई चर्चा होना तो दूर, किसानों की फसल की खरीद में आवश्यक सुधार तक नदारद है। कट्टर ईमानदार का दावा हवा हवाई हो गया। मोहल्ला क्लीनिक, वर्ल्ड क्लास स्कूल का सपना जाने किस ढेर में गुम है। प्रदेश के प्रशासन में नीति निर्माण में दिल्ली से लाए गए लोगों के नियंत्रण की गूंज शुरू से ही पंजाब के अधिकारियों कर्मचारियों पार्षदों से ले कर विधायक और मंत्रियों तक को विचलित करने की खबरें बनाती रहीं।
भाजपा द्वारा एक नयी अवधारणा पंजाब को देने के लिए आम आदमी पार्टी की विफलताओं ने अनुकूल वातावरण का निर्माण प्रदेश में कर ही दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी कुर्सी के लिए आम आदमी पार्टी की दिल्ली टीम के साथ एक तरह का समझौता किया हुआ है, ऐसे आरोप बार बार विपक्षी दलों द्वारा लगाए जाते रहे हैं। पंजाब के बड़े मुद्दों- चंडीगढ़ पंजाब को देने, पानियों के बंटवारे, राज्य के सीमावर्ती जिलों को विशेष सहायता और सुविधा देने का मामला और पडोसी देश में स्थित सिख धार्मिक स्थानों पर जाने की सुविधा पर भगवंत मान द्वारा आम आदमी पार्टी की दिल्ली टीम के साथ साथ केंद्रीय सरकार से साहसपूर्वक विरोध न करने को पंजाब में निराशाजनक रूप से देखा जा रहा है।
इन सब परिस्थितियों में भाजपा एक नए विकल्प के रूप में खुद को पंजाब के उद्धार के लिए आगे कर सकती है।

