“बनारस में रह कर मैं बनारस से कितना दूर था और गिरीश कितने पास”!

बात 1990 के दशक की है जब मैं प्रो. इरफ़ान हबीब के एक आमंत्रण पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास, उच्च अध्ययन केंद्र में एक माह की विज़िटरशिप के लिए …

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पर्यावरण बचाने की लड़ाई एक नयी दुनिया बनाने की लड़ाई है

आज विश्व पर्यावरण दिवस है। आज हमें ये मौका मिला है कि प्रकृति के साथ हमारे रिश्ते का आकलन करें– एक सामूहिकता बनाने के लिए इन पहलुओं को समझें। इंसान …

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भारत और चीन दोनों को सम्प्रभुता का एक संदेश है नेपाल का नया नक्शा

नेपाल ने आधिकारिक तौर पर अपना नया नक्शा जारी किया जिसमें कालापानी, लिम्पियाधुरा तथा लिपुलेक को नेपाल का भू-भाग बताया है

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सीताराम सिंह: समाजवाद का एक आफ़ताब

सीताराम सिंह जी आज हमारे बीच होते तो हम उनकी 101वीं सालगिरह मना रहे होते। वे सौ की उम्र पूरी करने से पहले 2018 में हमारे बीच से चले गए

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इंक़लाब ज़िंदाबाद के सौ साल और हसरत मोहानी के तीन ‘एम’!

1 जनवरी 1875 को उन्नाव के मोहान गांव में जन्मे हसरत मोहानी ने 13 मई 1951 को कानपुर में दुनिया को अलविदा कहा था

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कलियुग से दुखी जनता को सतयुग और त्रेता में वापस खींच ले जाने के सरकारी नुस्खे

पुरानी अफ़ीम नई पैकेजिंग में निगलने को दे दी गयी है। वन टाइम टास्क को अब फुल टाइम कर दिया गया है।

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