छात्रसंघ चुनाव 2026 : क्या GenZ का जनादेश बदल पाएगा DU की सियासत?


दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के चुनाव की तारीख 18 सितंबर तय की गई है और उसके नतीजे 19 सितंबर को आने वाले हैं। पूरे देश की निगाहें इस चुनाव पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह चुनाव यह तय करेगा कि आज की ‘जेन-जी’ पीढ़ी का झुकाव किस राजनीतिक विचारधारा की ओर है।

कुछ ही दिन पहले जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के एक फंक्शन में गए थे, तो उन्होंने वहां 100 रुपये के विशेष सिक्के का विमोचन किया था और छात्रों को ‘ओजी’ कहकर संबोधित किया था, जिससे यह साफ झलकता है कि उनका पूरा ध्यान देश की युवा पीढ़ी पर है। इसके बावजूद छात्रों के उनसे कई सवाल हैं। जैसे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को दिल्ली विश्वविद्यालय का एलुम्नाइ बताते हैं और कहते हैं कि उन्होंने अपनी मास्टर डिग्री पॉलिटिकल साइंस में यहीं से की है। ऐसे में छात्रों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब मोदी जी एक फोन कॉल करके यूक्रेन का युद्ध रुकवा सकते हैं, तो क्या वे दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को एक फोन करके यहां सस्ते हॉस्टल क्यों नहीं बनवा सकते? वे लगातार बढ़ती हुई फीस को क्यों नहीं रुकवा सकते? हॉस्टलों की कैंटीन से जुड़ी समस्याओं को क्यों खत्म नहीं करवा सकते? और छात्रों के ऊपर जो लगातार प्रयोग किए जा रहे हैं, उन्हें क्यों नहीं रोक सकते?

दिल्ली विश्वविद्यालय का आम छात्र जहां एक तरफ लगातार बढ़ती हुई फीस की दोहरी मार झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ बदतर होती सुविधाओं का भी गंभीर सामना कर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लागू होने के बाद से दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों को महज एक प्रयोगशाला के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार और प्रशासन छात्रों को प्रयोगशाला के चूहों की तरह प्रयोग कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण फोर ईयर अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) और सेक-वैक (SEC-VAC) जैसे विषयों का लगातार छात्रों द्वारा किया जा रहा विरोध है। छात्रों के सामने केवल अकादमिक चुनौतियां नहीं हैं, बल्कि बुनियादी जीवन से जुड़ी समस्याएं भी विकराल रूप ले चुकी हैं। विश्वविद्यालय परिसर के भीतर पर्याप्त हॉस्टलों का न होना एक बहुत बड़ी समस्या है, जिसके कारण छात्रों को मनमानी फीस वसूलने वाले पीजी माफिया और उनके मालिकों के चंगुल में फंसना पड़ रहा है। हॉस्टलों के अंदर भी कई प्रकार की गंभीर समस्याएं हैं और जो कैंटीन मौजूद हैं वे भी पूरी तरह से हाइजीनिक नहीं हैं। इसके अलावा, मेट्रो कंसेशन पास की सुविधा का न मिलना भी छात्रों के बीच एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।



इस चुनाव को कई ऐसी दर्दनाक और गंभीर घटनाएं प्रभावित कर रही हैं जो सीधे तौर पर प्रशासन और सरकार से कड़े सवाल पूछती हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ऊपर चले पैलेट गन और लाठीचार्ज जैसी घटनाएं, तथा सत्य निकेतन (साउथ कैंपस) में पीजी की इमारत गिरने से दिल्ली विश्वविद्यालय के सात मासूम छात्रों की हुई दर्दनाक मौत ने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। ये तमाम हादसे आज विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

इन तमाम शैक्षणिक और बुनियादी मुद्दों के साथ-साथ एक और बड़ा बदलाव जो कैंपस के अंदर देखा जा रहा है, वह है दिल्ली विश्वविद्यालय का लगातार हो रहा भगवाकरण। टीचिंग पदों से लेकर नॉन-टीचिंग पदों और यहां तक कि पीएचडी के एडमिशन तक में लगातार संघ का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है, जो आज के समय में एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे माहौल में यह देखना बेहद दिलचस्प हो गया है कि इस बार के चुनाव में दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र आखिरकार किस पर अपना भरोसा जताता है।

मैदान में कई बड़े छात्र संगठन आमने-सामने हैं, जिनमें आरएसएस का छात्र संगठन ABVP, कांग्रेस का छात्र संगठन NSUI, लेफ्ट का साझा पैनल (AISA-SFI) तथा आम आदमी पार्टी का छात्र संगठन ASAP पूरी ताकत से उतर चुके हैं। चुनावी घमासान के बीच प्रमुख संगठनों ने अपने घोषणापत्रों और प्रचार पोस्टरों के जरिए छात्रों के सामने अपने वादे और तेवर साफ कर दिए हैं। ABVP ने अपने 2026-27 के घोषणापत्र को अपने नाम के चार अक्षरों, A-B-V-P की थीम पर केंद्रित किया है:

A (Awas – आवास): कॉलेजों में नए हॉस्टल और विशेष गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण, स्टूडेंट हाउसिंग सेल व हेल्पलाइन की स्थापना, और दिल्ली-एनसीआर में पीजी व रेंट रेगुलेशन एक्ट को सख्ती से लागू करवाना।

B (Bhagidari – भागीदारी): एकेडमिक और एग्जीक्यूटिव काउंसिल में छात्रों का प्रतिनिधित्व, दिव्यांग छात्रों के लिए रैंप, ब्रेल व विशेष सुविधाएं, और छात्र संघों से परीक्षा डेटशीट पर पूर्व चर्चा।

V (Vishwas – विश्वास): विमेंस सेफ्टी, पिंक बूथ, इंटरनल कम्प्लेंट्स कमेटी (ICC) को मजबूत करना और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल की स्थापना।

P (Parinam – परिणाम): समयबद्ध परिणाम (Time-bound Results), ‘प्रवेश, परीक्षा और परिणाम’ के सुधार का संकल्प, छात्र-हितैषी परीक्षा व्यवस्था और केंद्रीकृत प्लेसमेंट सेल की स्थापना। ध्यान देने की बात यह है कि इस बार छात्रों को मेट्रो कन्सेशन कार्ड देने की बात गायब है।



दूसरी तरफ, NSUI ने क्या हुआ तेरा वादा?” शीर्षक से कॉमिक-स्ट्रिप पोस्टर जारी कर सीधे तौर पर ABVP और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। NSUI अपने घोषणापत्र और अभियान में छात्रों से जुड़े बुनियादी संकटों, असुरक्षित व महंगे पीजी, हॉस्टलों की भारी कमी, बंद पड़े मेट्रो कंसेशन पास, कैंपस की बदहाल बुनियादी सुविधाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन को सीधे जनता के बीच ले जा रही है। इसके साथ ही, NSUI 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पैलेट गन हमले व लाठीचार्ज तथा सत्य निकेतन पीजी हादसे को सत्ता और ABVP की उदासीनता का प्रतीक बताते हुए छात्रों से दमन के खिलाफ वोट करने की अपील कर रही है।

चुनावों से ठीक पहले टिकट वितरण को लेकर संगठनों के अंदरखाने काफी उथल-पुथल देखने को मिली है। इसके बावजूद, पिछले साल के परिणामों को देखें तो ABVP ने चार में से तीन सीटों पर कब्जा जमाया था, जिसमें अध्यक्ष पद भी शामिल था। हाल ही में पंजाब यूनिवर्सिटी के हुए चुनावों में भी ABVP के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी, जिसके कारण इस बार का मुकाबला और भी अधिक टक्कर का माना जा रहा है।

इस बार के चुनावी मैदान में सामाजिक न्याय और विभिन्न जातियों के समीकरणों को साधने की भी पूरी कोशिश की गई है। अगर पिछले कुछ सालों का चुनावी डेटा उठाकर देखा जाए, तो यह साफ नजर आता है कि यहां अमूमन जाट और गुर्जर जातियों का वर्चस्व रहा है और वही लगातार जीतते आए हैं। इस बार का समीकरण पूरी तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है।



कांग्रेस के छात्र संगठन ने अध्यक्ष पद के लिए राजस्थान के आदिवासी समुदाय से आने वाले विजय शंकर मीणा पर भरोसा जताया है, वहीं एबीवीपी ने यश डबास को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि आम आदमी पार्टी के संगठन ‘असाप’ ने एक गुर्जर उम्मीदवार अस्मित पवार को टिकट दिया है, और वामपंथी संगठन आइसा ने अध्यक्ष पद पर एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।

पदABVP  NSUIAISA-SFIASAPप्रमुख निर्दलीय प्रत्याशी
अध्यक्षयश डबासविजय शंकर मीणा  अनन्या रतूड़ीअश्मित कुमार पवारदीपांशु शौकीन
उपाध्यक्ष ईशू मौर्यवीर चतरथअक्षत शिखर
सचिव रिया छावड़ीनम्रता चौधरीस्टैनजिन डेस्कियोंगपंकज कुमार
संयुक्त सचिवलक्ष्य राज सिंहगोपाल चौधरीबी. पारिजातविशेष यादव

पिछले वर्षों के डूसू चुनाव परिणामों के विस्तृत मतों के आंकड़े (वोट टर्नआउट 42.8% के साथ), पिछले साल (2025) के केंद्रीय पैनल के मतों और पिछले पांच वर्षों के विजेता-उपविजेता के विस्तृत आंकड़ों को नीचे दी गई तालिकाओं में देखा जा सकता है.

वर्षविजेता उम्मीदवार (अध्यक्ष)संगठनमतदान प्रतिशत (%)
2011अजय छिकारा (जाट)NSUI32
2012अरुण हुड्डा (जाट)NSUI40
2013अमन अवाना (गुर्जर)ABVP43.3
2014मोहित नगर (गुर्जर)ABVP44.4
2015सतेंदर अवाना (गुर्जर)ABVP43
2016अमित तंवर (गुर्जर)ABVP37
2017रॉकी तुसीद (जाट)NSUI42.8
2018अंकित बैसोया (गुर्जर)ABVP44.5
2019अक्षत डियाह (जाट)ABVP40
2023तुषार डेडा (गुर्जर)ABVP42
2024रौनक खत्री (जाट)NSUI35
2025आर्यन मान (जाट)ABVP39.5
पदवार मतों का विवरण
पदउम्मीदवारपार्टीप्राप्त वोट
अध्यक्ष आर्यनABVP28,841
 जोशलीनNSUI12,645
 उमांशी लांबाIND5,522
 अंजलिAISA-SFI5,385
 NOTA3,175
उपाध्यक्ष राहुल यादवNSUI29,339
 गोविंद तंवरABVP20,547
 सोहन यादवAISA-SFI4,163
 NOTA5,820
सचिव कुणाल चौधरीABVP23,779
 कबीर गिरसाNSUI16,117
 अभिनंदना उम्मीदवारAISA-SFI9,538
 NOTA7,365
सह-सचिवदीपिका झाABVP21,825
 लवकुश भड़ानाएनएसयूआई17,380
 अभिषेक कुमारआईसा-एसएफआई8,425
 NOTA7,314
1. DUSU चुनाव 2025-26 (सितंबर 2025) (ABVP ने 3 पद जीते, NSUI ने 1)
पदविजेता (पार्टी) एवं प्राप्त वोटउपविजेता उम्मीदवार (पार्टी) एवं प्राप्त वोट  अंतर (Margin)
अध्यक्षआर्यन मान (ABVP) – 28,841जोसलीन नंदिता चौधरी (NSUI) – 12,645  ~16,196
उपाध्यक्षराहुल झांसला (NSUI) – 29,339  गोविंद तंवर (ABVP) – 20,5478,792
सचिवकुणाल चौधरी (ABVP) – 23,779  कबीर (NSUI) – 16,1177,662
सह-सचिवदीपिका झा (ABVP) – 21,825  लवकुश भड़ाना (NSUI) – ~17,3804,445
2. DUSU चुनाव 2024-25 (सितंबर 2024) (NSUI ने 2 पद जीते, ABVP ने 2)
पदविजेता (पार्टी) एवं प्राप्त वोटउपविजेता उम्मीदवार (पार्टी) एवं प्राप्त वोट  अंतर (Margin)
अध्यक्षरौनक खत्री (NSUI) – 20,207ऋषभ चौधरी (ABVP) – 18,8681,339
उपाध्यक्षभानु प्रताप सिंह (ABVP) – 24,166  यश नंदन (NSUI) – 15,4048,762
सचिवमित्रविंदा करनवाल (ABVP) – 16,703  नम्रता जेफ (NSUI) – 15,2361,467
सह-सचिव  लोकेश चौधरी (NSUI) – 21,975अमन कापसिया (ABVP) – 15,2496,726
3. DUSU चुनाव 2023-24 (सितंबर 2023) (ABVP ने 3 पद जीते, NSUI ने 1)
पदविजेता (पार्टी) एवं प्राप्त वोटउपविजेता उम्मीदवार (पार्टी) एवं प्राप्त वोट  अंतर (Margin)
अध्यक्षतुषार डेडा (ABVP) – 23,460  हितेश गुलिया (NSUI) – 20,3453,115
उपाध्यक्षअभि दहिया (NSUI) – 22,331  सुशांत धनकड़ (ABVP) – 20,5021,829
सचिवअपराजिता (ABVP) – 24,534  यक्षणा शर्मा (NSUI) – 11,59712,937
सह-सचिवसचिन बैसला (ABVP) – 24,955  शुभम कुमार (NSUI) – 14,9609,995
4. DUSU चुनाव 2019-20 (सितंबर 2019) (ABVP ने 3 पद जीते, NSUI ने 1)
पदविजेता (पार्टी) एवं प्राप्त वोटउपविजेता उम्मीदवार (पार्टी) एवं प्राप्त वोट  अंतर (Margin)
अध्यक्षअक्षत डियाह (ABVP) – 29,685  चेतना त्यागी (NSUI) – 10,64619,039
उपाध्यक्षप्रदीप तंवर (ABVP) – 19,858अंकित भारती (NSUI) – 11,2848,574
सचिवआशीष लांबा (NSUI) – 20,934  राठी (ABVP) – 18,8812,053
सह-सचिवशिवांगी खरवाल (ABVP) – 17,234  अभिषेक छपराना (NSUI) / योगी – 14,3202,914
5. DUSU चुनाव 2018-19 (सितंबर 2018) (ABVP-3, NSUI-1 : फर्जी डिग्री विवाद के कारण अध्यक्ष अंकित बैसोया ने बाद में इस्तीफा दे दिया था)
पदविजेता (पार्टी) एवं प्राप्त वोटउपविजेता उम्मीदवार (पार्टी) एवं प्राप्त वोट  अंतर (Margin)
अध्यक्षअंकित बैसोया (ABVP) – 20,467  सनी छिल्लर (NSUI) – 18,7231,744
उपाध्यक्षशक्ति सिंह (ABVP) – 23,046  लीना (NSUI) – 15,3737,673
सचिवआकाश चौधरी (NSUI) – 20,198  सुधीर डेडा (ABVP) – 14,1096,089
सह-सचिवज्योति चौधरी (ABVP) – 19,353  सौरभ यादव (NSUI) – 14,0635,290
6. DUSU चुनाव 2017 – मतदान विवरण (Vote Turnout: 42.8%)
पदएबीवीपी उम्मीदवार   वोटएनएसयूआई उम्मीदवार वोटअंतर (Margin)
अध्यक्ष  रजत चौधरी15,709रॉकी (विजेता)16,2991,590
उपाध्यक्ष  पार्थ राणा16,356कुणाल (विजेता)16,431175
सचिव महामेधा नागर (विजेता)  17,156मीनाक्षी मीणा14,5322,624
सह-सचिव  उमाशंकर (विजेता)16,691अविनाश यादव16,349342
नोट : आंकड़े DU की आधिकारिक वेबसाइट से लिए गए है और वोटिंग बिहेवियर को दर्शाते है।

शिक्षा व्यवस्था की बदतर हालत पर बात करते हुए नेल्सन मंडेला का प्रसिद्ध कथन प्रासंगिक हो जाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि किसी देश को बर्बाद करना है तो उसके ऊपर परमाणु बम गिराने की कोई आवश्यकता नहीं है, बस आप उस देश की शिक्षा व्यवस्था को खराब कर दीजिए, वह देश अपने आप ही बर्बाद हो जाएगा। आज हम साफ देख रहे हैं कि वर्तमान सरकार द्वारा किस प्रकार शिक्षा का तेजी से निजीकरण किया जा रहा है। विश्वविद्यालयों पर लगातार नए-नए प्रयोग थोपे जा रहे हैं, HEFA के माध्यम से विश्वविद्यालयों को भारी-भरकम लोन दिए जा रहे हैं और हर साल लगातार फीस में बढ़ोतरी की जा रही है। ये तमाम चुनौतियां आज उच्च शिक्षण संस्थानों की गर्दन पर लटकी हुई हैं। जिस हिसाब से दिल्ली विश्वविद्यालय का भगवाकरण किया जा रहा है और लगातार फीस बढ़ाई जा रही है, वह इस बात को पूरी तरह से स्पष्ट कर देता है कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का ठेका भारतीय जनता पार्टी ने ले रखा है।



दिल्ली विश्वविद्यालय पूरी दुनिया में अपनी प्रतिष्ठित ग्रेजुएशन की डिग्री के लिए जाना जाता था, लेकिन मौजूदा समय में इस डिग्री के मूल्य को भी कमजोर करने का काम किया गया है। इसलिए इस बार का दिल्ली विश्वविद्यालय का आम छात्र इन चुनावों में सीधे तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन से कड़ा हिसाब मांग रहा है। छात्र देश और दिल्ली की सरकार से पूरी जवाबदेही और अकाउंटेबिलिटी की मांग कर रहा है। वे लोग जवाब मांग रहे हैं कि आखिर किन लोगों के इशारे पर जंतर-मंतर पर छात्रों के ऊपर पैलेट गन और गोलियां चलाई गईं? वे यह भी पूछ रहे हैं कि सत्य निकेतन में साउथ कैंपस के पास जो बिल्डिंग गिरी और जिसके मलबे में दबकर सात मासूम छात्रों की जान चली गई, उसके पीछे फर्जी एनओसी देने वाले कौन लोग थे और इस हादसे में कौन-कौन शामिल था।

यदि सत्ता के समीकरणों को गहराई से देखा जाए तो एक अजीब स्थिति नजर आती है क्षेत्र का पार्षद भाजपा का, वहां का मेयर भाजपा का, विधायक भाजपा का, सांसद भाजपा का, दिल्ली में मुख्यमंत्री भाजपा का, देश में प्रधानमंत्री भाजपा का, और यहाँ तक कि एमसीडी में जो कमिश्नर नियुक्त किया जाता है जिसे अमित शाह नियुक्त करते हैं वह भी भाजपा के ही हैं। यानी सत्ता की हर एक धुरी पर आज भाजपा का कब्जा है। ऐसे में दिल्ली विश्वविद्यालय का आम छात्र इस चुनाव के माध्यम से इस पूरे तंत्र से तीखे सवाल पूछ रहा है, उसकी पूरी जवाबदेही तय करवाना चाहता है और यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इन तमाम ज्वलंत मुद्दों के बीच आखिरकार छात्र अपना अंतिम भरोसा किस पर जताते हैं।


अखिलेश यादव, पूर्व उपाध्यक्ष, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, PhD Scholar, Centre for Historical Studies (CHS), जेएनयू


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