“न कोई घुसा है, न किसी का कब्ज़ा है” कहने के पीछे प्रधानमंत्री का आशय क्या है

शुक्रवार को चीन के साथ जारी सीमा विवाद पर हुई ऑनलाइन सर्वदलीय बैठक से धीरे-धीरे छन कर जानकारियां बाहर आ रही हैं. विपक्षी दलों की तमाम दुश्चिंताओं के बीच मीडिया ने जिस ख़बर को सबसे ज्यादा तवज्जो दी वह है प्रधानमंत्री का बयान.

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शिक्षा पर STARS परियोजना का लोन रद्द करने के लिए अकादमिकों ने लिखा विश्व बैंक को पत्र

1400 बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों एवं नागरिक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भारतमें “स्टार्स” (स्ट्रेंथेनिंग टीचिंग लर्निंग एंड रिजल्ट्स फॉर स्टेट्स-STARS) शिक्षा परियोजना के स्थगन के लिए विश्व बैंक को लिखा खत

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अवसाद को समझने में जाति, धर्म, रंग, लिंग के भेद पूंजीवाद का पर्दा हैं

मजदूर अपनी ही मेहनत से खुद को कटा हुआ पाता है, वह परिपूर्ण नहीं खालीपन का अनुभव करता है। खुश नहीं दुखी रहता है। वह अपनी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का उपयोग नहीं, अपना शरीर तोड़ रहा होता है, अपने दिमाग को बर्बाद होते देख रहा होता है।

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औपनिवेशिक लूट के साझा अतीत बावजूद अश्वेतों के प्रति हमारा व्यवहार अहंकारपूर्ण क्यों है?

उपनिवेशवाद की विरासत ने दोयम दर्जे के भारतीयों की एक ऐसी राष्ट्रीय पहचान को मजबूती प्रदान की जो आज भी श्वेत रंग को अश्वेत रंग से ऊंचा मानने के जरिये अभिव्यक्त होती है

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‘जूनटीन्थ’ दिवस: आज़ादी और इंसाफ़ के नारों तले दबे हैं नाइंसाफ़ी के कंकाल

1865 में दासता से कथित आज़ादी का ऐलान और आज इतने बरस बाद 2020 में एक बार फिर अश्वेत लोगों का खुलेआम क़त्ल हो रहा है- अश्वेत वर्ग रोज़ ही पूछता होगा कि आखिर वह कैसी आजादी थी।

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कोरोना की आपदा के बीच कोल ब्लॉक की नीलामी किसको आत्मनिर्भर बनाने के लिए है?

कोरोना की आपदा को क्या खनन कंपनियों के लिये अवसर में बदलने की तैयारी चल रही है? कोल ब्लॉक को लेकर केंद्र सरकार जो कुछ करने जा रही है, उससे …

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सुशांत सिंह राजपूत: डुबोया मुझ को होने ने…?

एक अच्छा-भला सफल सितारा! बहुत कम संघर्ष में जिसने सेलिब्रिटी का स्टेटस पा लिया था, जिसके जीवन से संघर्ष का दौर खत्म हो चुका था। सुशांत सिंह ‘राजपूत’! अपने घर …

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वर्ण व्यवस्था के आईने में लॉकडाउन और श्रमिक विभाजन का ऐतिहासिक सच

आज विश्व संकट के दौर से गुजर रहा है। इस संकट से उबरने के लिए विभिन्न देशों ने मजबूत कदम उठाया है, अपने लोगों को विश्वास में लेकर ये देश …

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प्रवासी मेहनकशों का लॉकडाउन में हुआ उत्पीड़न और भुला दिए गए कुछ नैतिक सवाल

बारह साल की जमलो मकदम के परिवार को हम क्या समझा सकते हैं? क्या विवरण और स्पष्टीकरण दे सकते हैं उसके अंत का? जमलो, एक आदिवासी बालिका, तेलंगाना में मिर्चों …

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