विफल नेतृत्व की गलतियों का असर कम करने के लिए कब तक त्याग करती रहेगी जनता?

प्रधानमंत्री जी ने इस भीषण संकट काल में भी अपने मन की बात ही की। हो सकता है कि उनके काल्पनिक भारत की आभासी जनता को उनका यह एकालाप रुचिकर लगा होगा, लेकिन मरते हुए रोगियों और उनके हताश परिजनों के लिए तो यह एक क्रूर परिहास जैसा ही था।

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महामारी की दूसरी लहर में भी उपेक्षित छात्र समुदाय पर बात कब होगी?

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भी ‘परीक्षा पर चर्चा’ जैसे खोखले प्रवचन से आगे बढ़कर छात्र समुदाय के हित में कुछ ज़रूरी कदम उठाने चाहिए जो असल में उनके काम आएं। सरकार को आगे आकर ‘देश के भविष्य’ को बचाने की सख़्त ज़रूरत है।

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यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है… अश्रु स्वेद रक्त से, लथपथ लथपथ…

क्या हमें भी उन टीवी चैनलों सा संवेदनहीन हो जाना चाहिए जो जलती चिताओं के दृश्य दिखाते-दिखाते अचानक रोमांच से चीख उठते हैं- ‘’प्रधानमंत्री की चुनावी सभा शुरू हो चुकी है, आइए सीधे बंगाल चलते हैं।‘’

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महामारी में चुनाव आयोग की सवालिया भूमिका और टी. एन. सेशन की याद

मान लेते हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए तो महज चुनाव आयोग ही काफी है. और जब देश में सभी परीक्षाएं स्थगित हैं, योजनाएं स्थगित हैं, तो फिर चुनाव स्थगित करने में किसी का क्या बिगड़ रहा है?

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“इन 18 महीनों में हमने वो भी खो दिया जो हमारा था”: कश्मीर में विकास के दावों का ज़मीनी सच

जिन समुदायों के साथ यह बातचीत हुई, वे पुराने निज़ाम को फिर से याद करने लगे हैं जबकि कश्मीर के स्थापित परिवारों और खानदानों को लेकर उनके मन में कोई सहानुभूति नहीं है बल्कि वे तो यह मानते हैं कि ‘उनके साथ ठीक ही हुआ’।

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प्रदूषण-मुक्त स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए वैश्विक रोड मैप जारी

हेल्थ केयर विदआउट हार्म पूरी दुनिया में मरीजों की सुरक्षा या देखभाल से समझौता किये बगैर स्वास्थ्य क्षेत्र के रूपांतरण को संभव बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि वह पारिस्थितिकीय रूप से सतत बनने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वास्थ्य एवं न्याय का अग्रणी पैरोकार बन सके।

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कोरोना मृत्यु के आंकड़े छुपा रही योगी सरकार: दारापुरी

सरकार महज उत्सव मनाने और अखबारी विज्ञापनों में ही दमदार होने का दावा पेश कर रही है। हालत इतनी बुरी है कि मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए घंटों एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो रही है और कईयों ने तो एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया।

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तम्बाकू महामारी के अंत के लिए क्यों है ज़रूरी अवैध तम्बाकू व्यापार पर रोक?

चूँकि अवैध व्यापार एक वैश्विक समस्या है इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इससे निबटना ज़रूरी है. 180 देशों से अधिक ने वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि को पारित किया है जो कानूनी रूप से बाध्य संधि है (इसका औपचारिक नाम है विश्व स्वास्थ्य संगठन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टुबैको कण्ट्रोल). इस संधि के आर्टिकल 15, सरकारों को ताकत देता है कि आपस में मिलकर अवैध व्यापार पर अंकुश लगाया जा सके.

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कार्बन-सघन वस्तुओं के आयात को दंडित करेगा यूरोपीय संघ

जहाँ एक तरफ़ यूरोपीय संघ अपनी कार्बन डील की रणनीति के अभिन्न अंग के रूप में इस कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को देखता है, क्योंकि इसकी मदद से वो पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों के तहत 2050 तक कार्बन तटस्थता प्राप्त करना चाहता है, वहीँ एक नज़रिया यह भी है कि यह नियम एक तरह का संरक्षणवाद है जिससे व्यापार के लिए सभी को बराबर मौका नहीं मिलेगा।

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बूढ़े होते एक राष्ट्र का लोकतांत्रिक अल्जाइमर

वर्तमान में प्रधानमंत्री को ‘सुप्रीम लीडर’ मानता मीडिया, हर एक आंदोलन को भूलती जनता, विरोध के कर्तव्य को इतिश्री कह चुका विपक्ष, चुनाव पूर्व वादों को भूलती सरकारें और प्राकृतिक न्याय की अवधारणा से विचलित न्यायपालिका इस रोग से पूर्णत: ग्रसित हैं।

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