दो तूफानों ने की मानसून की रफ्तार कम, और गहराएगा जलवायु परिवर्तन व चक्रवातों का असर

इससे पहले मौसम के मॉडल मानसून के सही समय पर पहुंचने का इशारा देते थे। कभी-कभी तो मानसून एक-दो दिन पहले ही दस्तक दे देता था, मगर इस बार बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवाती तूफान यास का निर्माण ऐसे वक्त पर हुआ जब मानसून आने का समय था। इस तूफान की वजह से मानसून की लहर ठहर गयी।

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सामाजिक न्याय और पर्यावरण के लिए जो हितकारी नहीं, वह लक्षद्वीप का ‘विकास’ नहीं

लक्षद्वीप में जो नयी नीतियां सुझायी गयी हैं उनसे मूलत: बड़े उद्योग का ही लाभ होगा. ताज्जुब है कि सरकार क्यों उद्योग हित में जनता के हित को दरकिनार करने पर उतारू है? इन नीतियों से जलवायु परिवर्तन पर किये गये वादों पर भी भारत खरा नहीं उतरेगा, समुद्र का जल स्तर बढ़ेगा और जलवायु संकट गहराएगा.

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G7 देशों की जलवायु वित्त प्रतिज्ञाओं के मामले में वादाखिलाफ़ी बदस्तूर जारी

CARE संस्था ने पेरिस समझौते के तहत विकसित देशों द्वारा पेश की गयी नवीनतम आधिकारिक वित्त योजनाओं का विश्लेषण किया है और पाया है कि G7 और अन्य धनी देशों के कमज़ोर देशों के लिए समर्थन के ज़बानी वादों के बावजूद, सभी 24 मूल्यांकन किये गये डोनर्स द्वारा प्रस्तुत की गयी वास्तविक जानकारी मांगी गयी से बहुत कम है और कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि अमीर देश अपनी जलवायु वित्त प्रतिबद्धताओं को पूरा करेंगे।

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पत्रकारिता के एक माध्यम के रूप में टीवी चैनल भीतर से खोखला हो चुका है!

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के समक्ष इन दिनों जिस तरह साख का संकट उत्पन्न हुआ है उसने पत्रकारिता के इस माध्यम को अंदर तक खोखला कर दिया है। समाचार चैनलों को यह बात जितनी जल्दी हो समझ लेना चाहिए वरना यदि देर हो गयी तो यह उनके अस्तित्व का संकट भी हो सकता है। सोशल मीडिया की बढ़ती ताकत, प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता और वेब जर्नलिज्म की मजबूती ने इस माध्यम की प्रासंगिकता और भरोसे को तोड़ा है।

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जुलाई तक कैसे पूरी हो पाएगी 25 करोड़ आबादी के टीकाकरण की योजना

कोरोना की दूसरी लहर में जहां सबसे बुरे हालात गांव में बने वही हालात फिर से टीकाकरण के दौरान बन रहे हैं। इसके पीछे सरकार की वो प्रक्रिया है, जिस पर चलते हुए टीकाकरण केन्द्र तक पहुंचा जा सकता है। यह प्रक्रिया ही इतनी जटिल है कि आम आदमी टीका लगवाने के बजाय घर में दुबके बैठे रहने को ही एकमात्र रास्ता समझ रहा है।

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वैक्सीन लेने के बाद भी हो रही मौतों के कारण फैलते डर और संदेह के बीच सरकार चुप क्यों है?

सरकार को तत्‍काल वैक्‍सीन के बाद हुए संक्रमण और मौतों के आंकड़े जारी करने होंगे, ताकि इस मामले में पारदर्शिता बनी रहे क्‍योंकि आंकड़े छुपाने से अफ़वाहों को ही बल मिलेगा, उसका कोई लाभ नहीं होगा।

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अवसाद की महामारी: पहले बीमारी का डर, बाद में इलाज के खर्च का दोतरफा तनाव

लोग यह सोच-सोच कर परेशान और अवसादग्रस्त हो रहे हैं कि अगर लाख सावधानी के बावजूद भी उनको कोविड-19 हो गया तो क्या समय पर उनके इलाज के लिए साधन उपलब्ध हो पाएंगे और क्या वह इससे निजात पा सकेंगे।

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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में हादसा, दो मजदूर मृत, ठेकेदार पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग

उन्होंने कहा कि कॉरिडोर का ठेका लेने वाली कंपनी को बंगाल के गरीब मुस्लिम मजदूरों से काम कराना पड़ रहा है क्योंकि मोदी जी के इस धर्मविरोधी काम के लिए कोई भी स्थानीय हिंदू मजदूर तैयार नहीं है. मारे गए दो और घायल सातों मुस्लिम मजदूर बंगाल के निवासी हैं.

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लॉकडाउन में कोयला-चालित संयंत्रों ने जहां-तहां फेंका कचरा, साल भर में घटे 17 हादसे

‘कोल ऐश इन इंडिया- वॉल्यूम 2: ऐन एनवायरमेंटल सोशल एंड लीगल कम्पेंडियम ऑफ़ कोल ऐश मिस मैनेजमेंट इन इंडिया 2020-21’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट की मानें तो बिजली कंपनियों ने कोविड-19 के कारण लागू हुए लॉकडाउन को अपने पावर प्लांट में जमा हुई कोल फ्लाई ऐश को जहां-तहां फेंकने के मौके के तौर पर इस्तेमाल किया और यह एक बड़ी वजह बना प्रदूषण बढ़ने का।

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2020 से भी गरम होंगे आने वाले साल, ‘रेस टु ज़ीरो’ में शामिल हुए दुनिया भर के स्वास्थ्य संस्थान

इस बात का पता चला है वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाइजेशन (डब्लूएमओ) और UKMET यूके (यूनाइटेड किंगडम) मेट (मौसम) कार्यालय की सालाना जारी होने वाली ताज़ा ग्लोबल क्लाइमेट अपडेट नाम की रिपोर्ट में, जो अगले पांच वर्षों के लिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों की भविष्यवाणी करती है।

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