तकनीक, समाज और राजनीति: जासूसी प्रकरण से उपजे कुछ बुनियादी सवाल

क्या पेगासस जैसे प्रकरणों में तकनीकी के सम्पूर्ण नकार का संदेश निहित है? समय उस पुरानी अवधारणा पर भी सवाल उठाने का है जो यह विश्वास करती है कि तकनीकी अविष्कार निष्पक्ष, निरपेक्ष और स्वतंत्र होते हैं तथा मनुष्य अपनी प्रवृत्ति के अनुसार उनका अच्छा बुरा उपयोग करता है।

Read More

उत्तर प्रदेश में विपक्ष क्या संगठित होकर चुनाव को चेहरे से हटा कर मुद्दों पर खड़ा कर पाएगा?

अगला चुनाव बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा होगा जिसमें जीत कम सीटों के फासले से होगी, हालांकि भाजपा की जीत की संभावना प्रबल है लेकिन बिना अथक प्रयास किये यह भी आसान नहीं है।

Read More

कोरोना-काल में बढ़ा प्रशासनिक और राजनीतिक भ्रष्टाचार जनता के लिए कोई मुद्दा नहीं है?

। हाल ही में स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक ने वार्षिक डाटा जारी किया है जिसमें बताया गया कि 2020 में स्विस बैंकों में भारतीयों का पैसा बढ़कर 20700 करोड़ रुपए जमा हुआ है जो पिछले 13 साल में सबसे अधिक है।

Read More

कोरोनाकाल में स्कूली शिक्षा के अभाव ने बच्चों का भविष्य अंधेरे में छोड़ दिया है

आभासी कक्षा उनके लिए वरदान सिद्ध हुई हैं जो घर बैठे पढ़ना चाहते हैं-जैसे विवाह के बाद तमाम लड़कियों की शिक्षा बाधित हो जाती है, तो वे इसका लाभ ले सकती हैं। पैर टूट जाए तो भी कोई छात्र घर पर कक्षाएं कर सकता है पर सामान्‍य स्थिति में बच्चों के लिए यह बिल्कुल कारगर नहीं है। गाँधी जी ने जो ट्रिपल एच (मस्तिष्क, हृदय और हाथ) के विकास की अवधारणा दी है उसमें यह बिल्कुल असफल है। ऑनलाइन कक्षा केवल विकल्प है, इससे केवल काम चलाया जा सकता है, यह पूर्ण समाधान नहीं है।

Read More

भाषा-चर्चा: अंग्रेजी न जानने की औपनिवेशिक कुंठा हमारी अपनी भाषाओं को मार रही है

भाषा से बौद्धिकता का विकास नहीं, बौद्धिकता से भाषा का विकास होता है। आधुनिक भारत में लोग यह बात भूल गए हैं कि भाषा विचारों को रखने का साधन है, वह माध्यम है बातों को रखने का और सुनने का।

Read More

भाषा-चर्चा: तकनीक की ‘अंधाधुन’ गोलीबारी में टूटता हिंदी का संयुक्त परिवार

जिस तरह एकल परिवारों की वजह से चाचा-चाची, मौसा-मौसी, फुआ-फूफा जैसे रिश्ते सिमटते गए और एक ‘अंकल’ और ‘आंटी’ में समा गए, उसी तरह विष, ज़हर, हलाहल आदि का भी समायोजन एक ‘प्वाइज़न’ में हो गया। हम हिंदी वाले अब ‘कज़न ब्रदर’ या ‘कज़न सिस्टर’ का प्रयोग करते हैं।

Read More

सुरक्षा बलों से फर्जी गिरफ्तारियां करवा कर क्या हम उन्हें भ्रष्ट नहीं बना रहे हैं?

सत्तापक्ष के लोग यह कह रहे हैं कि आतंकवादियों का समर्थन करने वाले लोग सुरक्षा बलों का मनोबल गिरा रहे हैं। सवाल यह है कि अभी जो अभियुक्त हैं उनका आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। आतंकवाद निरोधक दस्ता या संचार माध्यमों द्वारा उनको अभी से आतंकवादी बताना क्या न्यायोचित है?

Read More

पश्चिमी यूपी में भाजपा की राह का कांटा बन सकती है रालोद

इस बार मुख्यमंत्री योगी के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश जीतना सबसे कठिन होने वाला हैI राकेश टिकैत द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश खड़े किये किसान आंदोलन की वजह से भाजपा नेताओं का गाँवों में घुसना मुश्किल हो रहा है तो चुनाव प्रचार दूर की कौड़ी लग रही हैI

Read More

क्या बैंकों का निजीकरण एक व्यवहार्य विकल्प है?

एक ऐसे देश में जहां औसत नागरिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ सबसे अधिक आरामदायक और सुलभ बैंकिंग सुविधा का उपभोग कर रहा है, बैंकों का निजीकरण क्यों? ये सवाल आज आम बैंक कर्मचारियों और आम जनता के मन में है।

Read More

दिलीप कुमार: मेरे जीवन भर की प्रेमासक्ति

मैंने कभी इस उम्मीद को नहीं छोड़ा कि एक दिन वो अपने घर के किसी कोने में एक दुबली-पतली शर्मीली लड़की जिसकी आँखों में उनके लिए प्यार था ज़रूर महसूस करेंगे।

Read More