हजारों के घाटे में बर्बाद होते गन्ना किसान बनाम 6000 रुपये का पीएम किसान सम्मान!

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिकांश किसानों के पास औसतन दस बीघा भूमि है। यानी इन किसानों को अब एक साल में 50,400 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है। इस घाटे की भरपाई के लिए मोदी सरकार जितनी किस्तें दे रही है, वह किसी भी तरह से नाकाफी है।

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कलंकित अतीत और धुँधला भविष्य: न्याय की तलाश में विमुक्त जन

इन समुदायों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानिए। वे सब आपके भाई-बहन हैं, उनसे प्यार कीजिए। उनकी सहायता कीजिए। उनको हर तरह का न्याय मिले, इसमें मदद दीजिए।

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यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टियों की सीटवार चुनावी रणनीति और सपा-बसपा की दिक्कत

सपा-बसपा के पास एक ही काट है- अतिपिछड़ों को व्यापक प्रतिनिधित्व और सीटें देते हुए उनके मान-सम्मान व सुरक्षा हेतु एससी/एसटी एक्ट जैसे प्रावधान और लाभकारी योजनाओं में स्पेशल कम्पोनेंट जैसी विशेष योजनाएं संचालित करने का ऐलान।

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आरक्षण अर्थात घर में नहीं है खाने को, अम्मा चली…

सरकार क्योंकि विश्व बैंक-अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के ढांचागत समायोजन कार्यक्रम के क्रियान्‍वयन या उनसे कर्ज़ लेने पर लादी गयी शर्तों के अनुपालन में लगी हुई है जिसके तहत सरकारी क्षेत्र के आकार और उसके रोज़गार में कटौती की जाती है इसलिए उसने यह जानते हुए भी कि इस सरकारी क्षेत्र में रोज़गार पाने के अवसर ही नहीं बचे या बचने हैं, सबको खुश करने के लिए नौकरी का निमंत्रण पत्र बांटना शुरू कर दिया। वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग को खुश करने के लिए किया जाने वाला संशोधन इसी तरह का चुनावी प्रयास है।

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पेरिस समझौते के बाद IMF ने एक-तिहाई देशों को ऊर्जा पर सब्सिडी खत्म करने को कहा था: रिपोर्ट

आइएमएफ सर्विलांस एंड क्लाइमेट चेंज ट्रांज़िशन रिस्क्स शीर्षक की यह रिपोर्ट दिसंबर 2015 में पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर और इस साल मार्च के बीच आइएमएफ के 190 सदस्य देशों में आयोजित सभी 595 अनुच्छेद IV रिपोर्टों के विश्लेषण पर आधारित है। अनुच्छेद IV रिपोर्टों में उन देशों के लिए नीतिगत सलाह शामिल है जो आने वाले वर्षों के लिए अपनी अर्थव्यवस्थाओं को आकार देती हैं।

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जलवायु संकट की आग को भड़का रहे हैं RBI समेत कई केंद्रीय बैंक: रिपोर्ट

अनेक केंद्रीय बैंकों ने सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा है कि वे प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के लिए सबसे सशक्त वित्तीय संस्थानों को प्रेरित करेंगे, मगर इस रिपोर्ट से जाहिर होता है कि उनमें से एक भी बैंक पेरिस समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के आसपास भी नहीं नजर आता। केंद्रीय बैंकों के पास जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाने के लिए उत्प्रेरक के तौर पर काम करने की अकूत शक्तियां होती हैं लेकिन वे इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

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UP: सरकार से ब्राह्मण वोटर की नाराजगी का मुद्दा क्या फर्जी है?

ब्राह्मण वोटर सामान्‍यत: मंदिर निर्माण, हिंदुत्व, अनुच्‍छेद 370 के जम्‍मू-कश्‍मीर से हटाए जाने, तीन तलाक, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर काफी उत्साहित नजर आते हैं। कई ऐसे ब्राहमण हैं जो बीजेपी सरकार की बहुत सी नीतियों, महंगाई, बेरोजगारी से काफी नाराज भी हैं, लेकिन वोट के सवाल पर मुद्दा बदल जाता है।

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प्रधानमंत्री का भाषण: महिमा-मंडन का कल्पनालोक बनाम यथार्थ की भयावहता

प्रधानमंत्री जी का कल्पना लोक जितना सुंदर है देश का यथार्थ उतना ही भयानक। यदि प्रधानमंत्री जी को इस अंतर का बोध नहीं है तो यह चिंताजनक है किंतु यदि उन्हें वास्तविक परिस्थिति का ज्ञान है फिर भी वे रणनीतिक रूप से स्वयं के महिमामंडन में लगे हैं तो परिस्थितियां डराने वाली हैं।

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उनकी तुरबत पर नहीं है एक भी दीया, जिनके खूँ से जलते हैं ये चिरागे वतन…

सम्भवतः देश को स्वतंत्रता यदि सशस्त्र क्रांति के द्वारा मिली होती तो भारत का विभाजन नहीं हुआ होता, क्योंकि सत्ता उन हाथों में न आई होती, जिनके कारण देश में अनेक भीषण समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। जिन शहीदों के प्रयत्नों व त्याग से हमें स्वतंत्रता मिली, उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला। अनेक को स्वतंत्रता के बाद भी गुमनामी का अपमानजनक जीवन जीना पड़ा।

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बीसवीं सदी के इतिहास में फिदेल की विरासत और उसका महत्व

बीसवीं सदी के इतिहास में क्यूबा की क्रांति का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसने यह दिखाया कि किस तरह युवा लड़ाके गुरिल्ला छापामार युद्ध के द्वारा सत्ता में बदलाव कर सकते हैं। अमेरिका के विरोध के बावजूद क्रांतिकारी सफल हुए। अमेरिका ने क्रांति के बाद काफ़ी कोशिशें कीं लेकिन वह क्यूबा में फ़िदेल के शासन और प्रभाव को ख़त्म नहीं कर पाया।

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