छान घोंट के: भारतीय राष्ट्रवाद के खिलाफ हिंदू और मुस्लिम सांप्रदायिकता का साझा इतिहास

मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा दो-राष्ट्र सिद्धांत अपनाने के बहुत पहले से सावरकर इस सिद्धांत का प्रचार कर रहे थे और दोनों ही भारतीय राष्ट्रवाद के खिलाफ थे। एक खास गौरतलब तथ्य है कि मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन (मार्च 1940) में पाकिस्तान प्रस्ताव पारित करते समय जिन्ना ने अपने दो-राष्ट्र सिद्धांत के पक्ष में सावरकर के उपरोक्त कथन का हवाला दिया था।

Read More

हर्फ़-ओ-हिकायत: खेल के मैदान में सियासत का मास्टर स्ट्रोक

ध्यानचंद की लोकप्रियता का अंदाजा केवल इस बात से लगाइए कि वे आज से करीब सौ साल पहले 1928 के दौर के खिलाड़ी हैं। उनके बाद दारा सिंह, पीटी उषा, सुनील गावस्कर, कपिल देव और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर जैसे बहुत से नाम आये, लेकिन वो अदब और वो सम्मान किसी को नहीं मिला दो दद्दा को मिला।

Read More

बात बोलेगी: पापड़ी चाट के बहाने ताज़ा बौद्धिक विमर्श

जहां तक सब जानते हैं, कोई बुरा महसूस करने के लिए इस तरह प्रधानमंत्री नहीं बनता। आप भी नहीं बने होंगे। तो क्यों बार-बार ऐसा करते हैं? अच्छा कीजिए कुछ, तो लोग भी अच्छा बोलेंगे। आप भी अच्छा महसूस करेंगे।

Read More

तन मन जन: कोरोना ने प्राइवेट बनाम सरकारी व्यवस्था का अंतर तो समझा दिया है, पर आगे?

स्वास्थ्य और उपचार का सवाल जीवन से जुड़ा है और यह हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। स्वास्थ्य सेवाओं को निजीकरण के जाल से बाहर निकाले बगैर आप स्वस्थ मानवीय जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। अभी भी वक्त है। जागिए और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गारन्टी के लिए आवाज बुलंद कीजिए।

Read More

पंचतत्व: बाढ़ से डरिए मत, इसी बहाने नदी में कुछ तो साफ पानी बहे…

यमुना जहां अभी बह रही है, यह उसी का रास्ता है। उफान मारते पानी को देखकर हम डर इसलिए रहे हैं क्योंकि हमने अवैध रूप से उसके पेटे में अपना घर बसा लिया है।

Read More

हर्फ़-ओ-हिकायत: राष्ट्रवाद के भीतर पनपता हिंसक राज्यवाद और अपने अतीत से विमुख समाज

जिन राज्यों के बीच सीमा विवाद या जल विवाद है उनका अस्तित्व ही ज्यादा से ज्यादा पचास वर्षों का है। ऐसे में अगले पचास वर्षों में कौन सा राज्यवाद आकार लेगा ये कहना मुश्किल है, लेकिन इतिहास बता रहा है कि हमारे समाज को अपने अतीत में कोई दिलचस्पी नहीं है या फिर हमने इतिहास लेखन में भारी गलती कर दी है, जो लोगों को प्रेरणा देना तो दूर समझ ही में नहीं आ रहा है।

Read More

बात बोलेगी: बिगड़ा हुआ है रंग जहान-ए-ख़राब का…

मौसम पर ये तोहमत लगती है कि एक-सा नहीं रहता। माशूकाएं अपने आशिक पर ये संदेह करती रहती हैं कि ‘मौसम की तरह तुम भी बदल तो न जाओगे’? मौसम …

Read More

राग दरबारी: मुसलमान ही नहीं, कई जातियों को बीजेपी ने अछूत बना दिया है

सवाल यह नहीं है कि लोकतांत्रिक पद्धति में मुसलमानों की हैसियत खत्म हो गयी है या नहीं हो पायी है। सवाल यह है कि मुसलमानों की हैसियत कितनी रह गयी है? और इसका जवाब यह है कि मुसलमानों की हैसियत पिछले सात वर्षों में बिहार व उत्तर प्रदेश के यादवों, हरियाणा के जाटों, महाराष्ट्र के महारों और उत्तर प्रदेश के जाटवों से थोड़ी ज्यादा ही बुरी है।

Read More

हर्फ़-ओ-हिकायत: जाति-वर्चस्व के खांचे में आजादी के नायकों को याद करने की राजनीति

मजिस्ट्रेट ने नाम पूछा तो तिवारी जी ने कहा- आजाद! मजिस्ट्रेट ने पूछा पिता का नाम तो तिवारी जी ने कहा- स्वतंत्रता! अब मजिस्ट्रेट ने पूछा घर का पता? तिवारी जी ने कहा- जेलखाना। तिवारी जी तब से चंद्रशेखर आजाद हो गए, लेकिन सौ साल बाद सोशल मीडिया के क्रांतिकारियों ने उन्हें तिवारी जी और पंडित जी घोषित कर दिया।

Read More

पंचतत्व: रासायनिक उर्वरकों में फंसी तितली रानी की जान

मिट्टी और पौधों के जरिये नाइट्रोजन के तितलियों में पहुंचने का यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ बासेल ने किया है। यह अध्ययन स्विट्जरलैंड में किया गया है, लेकिन शोध साफ तौर पर नाइट्रोजन जमाव से तितलियों की विविधता में आने वाली कमी की तरफ इशारा करता है।

Read More