दिल्लीः लॉकडाउन में अम्बेडकर युनिवर्सिटी के सफाईकर्मियों पर ड्यूटी के लिए बनाया जा रहा है दबाव


सफाई कामगार यूनियन ने दिल्ली श्रम मंत्री को लिखा ज्ञापन

सफाई कामगार यूनियन (एसकेयू) ने अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली (एयूडी) द्वारा सफाई कामगारों को जबरन लॉकडाउन में काम पर बुलाने को लेकर दिल्ली श्रम मंत्री गोपाल राय को ज्ञापन लिखा। 

ज्ञात हो कि कोरोना के फैलाव को रोकने व संक्रमण को कम करने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया गया है। दिल्ली में भी प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना के खतरे को देखते हुए लॉकडाउन को अंतरिम तौर पर 3 मई तक बढ़ा दिया गया है। इस समयावधि के दौरान स्कूल, कॉलेज आदि के साथ-साथ तमाम ऐसे कार्य जो गैर-जरूरी श्रेणी के हैं, को बंद रखे जाने का फैसला लिया गया है लेकिन एयूडी में सफाई कर्मचारियों पर बार-बार अनधिकारिक रूप से फ़ोन, मैसेज, व्हाट्सएप आदि के माध्यम से काम पर लौटने और ड्यूटी ज्वाइन करने का दबाव बनाया जा रहा है।

लॉकडाउन के चलते विश्वविद्यालय को बंद रखा गया है जिसके कारण न तो छात्र, न ही शिक्षक, न ही कर्मचारी और न ही प्रशासनिक अधिकारी विश्वविद्यालय आते हैं लेकिन बावजूद इसके सफाई कर्मचारियों को ड्यूटी ज्वाइन करने को कहा जा रहा है।

लॉकडाउन के चलते सफाई के कुछ जरुरी कामों जैसे मोहल्ले की सफाई का काम, अस्पताल की सफाई का काम अनिवार्य रूप से जारी रखा गया है, लेकिन सफाई कर्मचारी तो विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं और चूँकि विश्वविद्यालय बंद है, ऐसे में उनका कार्य अनिवार्य कार्य की श्रेणी के बाहर का कार्य है। किन्तु विश्वविद्यालय प्रशासन मनमाने तरीके से उनके स्वास्थ्य की परवाह किये बैगर बार-बार काम पर आने का आदेश दे रहा है।

सफाई कर्मचारी समाज के सबसे वंचित हिस्से से आते हैं। ऐसे में कोरोना का खतरा होने के बावजूद उनको काम पर बुलाना, एयूडी प्रशासन का उदासीन रवैया साफ ज़ाहिर करता है। 

यूनियन ने श्रम मंत्री से इस विषय में विश्वविद्यालय पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है और आने वाले दिनों में ऐसे तानाशाही फैसलों के खिलाफ संघर्ष तेज़ करने का ऐलान किया है|

हरीश गौतम
सफाई कामगार यूनियन (एसकेयू)
संपर्क: 9953132396


About जनपथ

जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

View all posts by जनपथ →

4 Comments on “दिल्लीः लॉकडाउन में अम्बेडकर युनिवर्सिटी के सफाईकर्मियों पर ड्यूटी के लिए बनाया जा रहा है दबाव”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *