तीन साल में 25 से ज्‍यादा शिक्षक छोड़ गए अम्बेडकर युनिवर्सिटी, फैकल्टी एसोसिएशन ने जारी किया विस्‍तृत मांगों का चार्टर

फैकल्‍टी एसोसिएशन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में वह विश्वविद्यालय द्वारा अनुभव की गई लगातार गिरावट पर संकट को दर्शाता रहा है और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को परेशान करने वाले कारकों को एयूडी प्रशासन से साझा करता रहा है। एयूढीएफए ने अपने चार्टर में जिन गंभीर मुद्दों को उठाया है उनमें एयूडी की गिरती रैंकिंग, आवेदनों में गिरावट, बाह्य वित्‍तपोषित परियोजनाओं की समाप्ति, और फैकल्‍टी का शोषण है।

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AISA का दसवां राष्ट्रीय सम्मेलन कोलकाता में सम्पन्न, सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ लड़ने का संकल्प

भाकपा (माले-लिबरेशन) के महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, “ऐसे समय में जब आइसा अपना ऐतिहासिक सम्मेलन कर रहा है, उमर खालिद, गुलफिशा फातिमा जैसे कई स्टूडेंट एक्टिविस्ट, जिन्होंने लोकतांत्रिक कैंपस और नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया, को झूठे मुकदमे में जेलों में बंद कर दिया गया है। भीमा कोरेगांव की तरह, सीएए विरोधी प्रदर्शनों को आपराधिक बनाने की साजिश अंबेडकर के भारत को नष्ट करने की बड़ी योजना का हिस्सा है।”

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सांप्रदायिकता से लड़ने वालों को अपनी लड़ाई साम्राज्यवाद की ओर मोड़नी होगी: विनीत तिवारी

सांप्रदायिकता से लड़ने वालों को अपनी लड़ाई साम्राज्यवाद की ओर मोड़ना होगी क्योंकि वही सभी समस्याओं के मूल में है। फ़िदेल कास्त्रो ने इसीलिए तीसरी दुनिया के देशों की एकता की बात की थी क्योंकि तीसरी दुनिया के मुल्क़ इकट्ठे होकर साम्राज्य्वाद को कड़ी चुनौती दे सकते हैं।

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‘गांधी, विनोबा, जेपी की विरासत को हर हाल में बचाएंगे’: अगस्त क्रांति दिवस पर बनारस में संकल्प

मणिपुर की घटना पर सम्मेलन की तरफ से निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। सर्वोदय समाज व प्रकाशन के पूर्व संयोजक आदित्य पटनायक ने भी अपने विचार रखे और कहा कि एकजुटता में ही ताकत है। हमें देश भर में गांधी विचार और गांधियन संस्थाओं पर हो रहे हमलों का विरोध करना चाहिए।

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कनहर: 1976 का अधूरा बांध, 2015 का दमन-चक्र और अब नए आंदोलन की तैयारी

1976 में सोनभद्र की दुद्धी तहसील के ग्राम अमवार में कनहर और पांगन नदी पर कनहर सिंचाई परियोजना का शिलान्यास किया गया था। उस समय किसानों को जमीन का मुआवजा दिया गया लेकिन मकान और भूमिहीन लोगों को कोई मुआवजे का वितरण नहीं किया गया। बाद में सरकार ने इस परियोजना का काम रोक दिया और लंबे समय तक परियोजना लंबित पड़ी रही।

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प्रेमचंद और परसाई को पढ़ना क्यों जरूरी है?

जब देश में गुलामी का दौर था तब साहित्य, विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिले। आजाद भारत में आज का युवा धार्मिक यात्राओं में ही लीन हैं। प्रेमचंद को पहले ब्राह्मण विरोधी प्रचारित किया गया अब उन्हें दलित विरोधी बताया जा रहा है।

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यूपी: असंगठित मजदूरों के 100 संगठन आए साथ, 9-10 अगस्त को होगा महापड़ाव

प्रदेश के 100 से ज्यादा संगठनों ने एक साथ आकर साझा मंच का निर्माण किया है और सरकार से ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत 8 करोड़ 30 लाख असंगठित मजदूरों को आयुष्मान कार्ड, आवास, पेंशन, बीमा, मुफ्त शिक्षा व रोजगार की मांग की है।

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फरीदाबाद: मणिपुर हिंसा के विरोध में आयोजित छात्र-मजदूर रैली पर हमला, मुकदमा दर्ज

हर जगह मोदी सरकार की थू-थू हो रही है। ऐसे में देश के भीतर अपने विरोध से बौखलाई बीजेपी और पूरी संघ मंडली अपने खिलाफ उठ रही हर आवाज को दबाने पर आमादा हैं। गोछी में इमके व पछास के साथियों पर हुआ हमला इसी की तसदीक करता है।

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बैंकों में लाए जा रहे बदलाव आम जन के नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट के हित में: डॉ. देवीदास

तुलजापुरकर ने कहा कि अब बैंकें ग्रामीण इलाकों में ऋण वितरण नहीं करती। ऋण ले चुके किसान भी इस उम्मीद में कर्जा नहीं लौटाते कि सरकारें उसे माफ कर देगी। इसके चलते जरूरतमंद किसान साहूकारों के जाल में फंस कर ऊंचे ब्याज पर ऋण लेने पर विवश हो जाते हैं और उसे चुका पाने में असफल रहने पर आत्महत्या कर लेते हैं। इस मामले में महाराष्ट्र का विदर्भ एवं मराठवाड़ा क्षेत्र सुर्खियों में रहा है।

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मणिपुर हिंसा में सीएम और गृहमंत्री की भूमिका की हो जांच: राष्ट्रपति को आइपीएफ का अनुरोध पत्र

अनुरोध पत्र में कहा गया कि मणिपुर की घटना पर लम्बे समय तक मौन रहने वाले सवाल पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी आश्चर्य नहीं पैदा करती। ऐसे मामलों में चुप रहना ही उनकी राजनीति रही है, गुजरात इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

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