सहारनपुर किसान पंचायत में प्रियंका गांधी, शुरू हुआ ‘जय जवान जय किसान’ अभियान

हर जिले के तहसीलों के बड़े गांवों से जय जवान-जय किसान अभियान की शुरुआत कांग्रेस कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस के लिए पश्चिमी यूपी मजबूत जमीन रही है। कई बड़े कांग्रेसी नेता पच्छिमी यूपी की राजनीति में मजबूत दखल रखते हैं। कांग्रेस इस अभियान से किसान जातियों खासकरके हिन्दू मुस्लिम जाटों और गुर्जरों में कांग्रेस मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

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कृषि कानूनों के सही या गलत होने से शुरू हुई बहस पटरी छोड़ कर इतनी दूर कैसे निकल आयी?

26 जनवरी को वो हुआ जिसने इस आंदोलन को शक की नज़र से देखने की एक वजह दे दी और मासूम जनता को किसान दंगाई नज़र आने लगे।

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हिमालय में अनियंत्रित विकास योजनाएं चमोली त्रासदी के लिए जिम्मेदार: UPP

चिपको, वन बचाओ आंदोलन और हिमालयी संवेदनशीलता को समझने वाले तमाम विरोध के बावजूद सरकार पूंजीपतियों, माफियाओं व कम्पनियों के हाथों में खेल रही है। जलवायु परिवर्तन की विभीषिका ने इस प्रक्रिया को और तीव्र किया है जिससे उत्तराखंड में भारी तबाही की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

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देश की इस फ़िल्म में नायक और डॉक्टर दोनों ही नदारद हैं!

कोई सवाल नहीं करना चाहता कि इस समय बड़े-बड़े फ़ैसलों की असली ‘लोकेशन’ कहाँ है! देश को सार्वजनिक क्षेत्र के मुनाफ़ा कमाने वाले उपक्रमों की ज़रूरत है या नहीं और उन्हें रखना चाहिए अथवा उनसे सरकार को मुक्त हो जाना चाहिए, इसकी जानकारी बजट के ज़रिए बाद में मिलती है और संकेत कोई बड़ा पूर्व नौकरशाह पहले दे देता है। हो सकता है आगे चलकर यह भी बताया जाए कि राष्ट्र की सम्पन्नता के लिए सरकार को अब कितने और किस तरह के नागरिकों की ज़रूरत बची है।

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मोदी-योगी के खिलाफ टिप्पणियों पर देश में अब तक राजद्रोह के कुल 293 केस दर्ज

वेबसाइट आर्टिकल 14 ने 1 जनवरी 2010 से 31 दिसंबर 2020 के बीच दायर राजद्रोह के मामलों को ट्रैककर ये डेटा जारी किया है।

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क्या टल सकती थी चमोली में ग्लेशियर फटने से हुई तबाही?

साल 2019 के इस अध्ययन में साफ़ कहा गया है कि भारत, चीन, नेपाल और भूटान में 40 वर्षों के उपग्रह अवलोकन से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन हिमालय के ग्लेशियरों को खा रहा है।

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सुरक्षित सड़क की जो परिभाषा बाज़ार हमें समझाता है वैसी सड़कें सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं

दुनिया में मृत्यु के सबसे बड़े कारणों में से 10वें नंबर पर है सड़क दुर्घटना, जिसके कारणवश 13 लाख से अधिक लोग हर साल मृत होते हैं और 5 करोड़ से अधिक लोग ज़ख़्मी होते हैं, या शारीरिक/ मानसिक विकृति के साथ जीने को मजबूर होते हैं. सार्वजनक आवागमन या परिवहन ज़रूरी है और मौलिक अधिकार है, पर इसकी कीमत हमें अपने हाथ-पैर तुड़वा के या जान गवां के देने की क्या ज़रूरत है?

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ज़मानत देने के बाद भी मुनव्वर फारुकी की रिहाई के लिए SC जज को करना पड़ा फोन!

शुक्रवार को जहां सुप्रीम कोर्ट ने केवल पंद्रह मिनिट में उन्हें जमानत दी थी इसके बाद उम्मीद थी कि उन्हें जल्दी ही रिहाई दे दी जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शुक्रवार को रिहाई नहीं हुई और इसके बाद मुनव्वर के वकील शनिवार रात को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने इंदौर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को फोन कर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए ऑर्डर देखने की अपील की। जिसके बाद उन्हें रिहा किया गया।

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टिकरी बॉर्डर पर एक और किसान मृत, लिखा-सरकार के रवैये से हो गया था परेशान!

कृषि कानूनों के खिलाफ बीते ढाई महीने से जारी किसानों के आंदोलन में एक और किसान ने अपनी क़ुरबानी दे दी. दिल्ली-हरियाणा के टिकरी बॉर्डर पर बीती देर रात एक किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी. मरने से पहले मृतक किसान कर्मबीर ने सुसाइड लिखा जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के खराब रवैये से परेशान होने की बात लिखी है.

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पेरिस: कोर्ट ने कहा फ़्रांस जलवायु परिवर्तन निष्क्रियता का दोषी, देना होगा मुआवज़ा!

मामला है दो मिलियन नागरिकों द्वारा समर्थित गैर सरकारी संगठनों के एक समूह का जिसने फ्रांसीसी सरकार पर जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए क़दम उठाने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज की थी, जिसे “केस ऑफ़ द सेंचुरी” करार दिया गया है। अदालत ने राज्य को मुआवज़े के रूप में 1 यूरो की प्रतीकात्मक रकम का भुगतान करने का आदेश भी दिया।

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