गालीबाज व्‍यवस्‍था में गाली-विमर्श: क्या लड़कियां गाली सुनकर गजल गाएं?

पिछले 15 साल से समस्त भारत में ‘आधी आबादी’ आत्मनिर्भर होने के लिए अपनी चारदीवारी को लांघ चुकी है। यह न्यू इंडिया है। बाहर की दुनिया में उसे बस, मेट्रो, ऑटो, चौराहा, चाय-पान की दुकान, स्कूल, कॉलेज आदि में भी मर्दों के द्वारा गालियों को सुनना एक सामान्य बात हो गई है, लेकिन इस देश के सामंती समाज से लेकर बहुसंख्यक अंधभक्त चाहेंगे कि लड़कियां गाली सुनकर ग़ज़ल गाएं?

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ईरान युद्ध से बहुध्रुवीय दुनिया का मार्ग हुआ मज़बूत

भले ही अमेरिकी वर्चस्व अभी पूरी तरह इतिहास न बना हो, किंतु ईरान-चीन-रूस का यह नया रणनीतिक गठबंधन, वैश्विक दक्षिण गोलार्ध की बढ़ती आवाज़ और बहुध्रुवीय संस्थाओं का सशक्तिकरण, उस वर्चस्व की नींव खोद रहे हैं

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