पुलिस दमन और गुंडागर्दी से किसान आंदोलन नहीं कुचला जा सकता: डॉ. सुनीलम

आजादी के बाद विपक्ष द्वारा सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध करने पर कभी भी इस तरह की हिंसक कार्यवाहियां नहीं की गई जिस तरह भाजपा द्वारा की जा रही है। भाजपा की कार्यवाहियों से पता चलता है कि वह इस हद तक किसान विरोधी एवं लोकतंत्र विरोधी हो गई है कि वह किसानों को विरोध करने के संवैधानिक अधिकार के तहत धरना देने भी पसंद नहीं करती है।

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DUJ और CASR ने की पत्रकारों पर पुलिसिया दमन की निंदा, मनदीप पुनिया की रिहाई की मांग

दिल्ली जर्नलिस्ट यूनियन (DUJ) ने एक बयान जारी कर कहा कि पत्रकार मनदीप पुनिया ने किसानों पर कथित तौर पर भीड़ के हमले में राइट विंग राजनेताओं की मौजूदगी का पर्दाफाश किया था.

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बजट ने साबित किया किसान-मजदूर सरकार की अंतिम प्राथमिकता: KSS

बजट ने सरकार के किसानों की आय को दुगना करने के दावे की पोल भी खोल दी है। सरकार ने फिर से एक बार झूठ बोला है कि देश में लागत से डेढ़ गुना दाम पर खरीद की जा रही है। जबकि गेहूं और धान भी पूरे देश मे समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जा रहा है। 23 कृषि उत्पादों की समर्थन मूल्य पर खरीद की बात बहुत दूर है।

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पत्रकार मनदीप पुनिया की ज़मानत याचिका पर फैसला सुरक्षित, एडिटर्स गिल्‍ड ने उठायी रिहाई की मांग

सुनवाई के दौरान वहां मौजूद एक अन्‍य पत्रकार के मुताबिक सुनवाई के अंत तक अदालत की ओर से प्रेस कार्ड की मांग होती रही। इसके बाद शाम चार बजे सुनवाई समाप्‍त हुई और अदालत ने फैसला अगले दिन तक के लिए सुरक्षित रख लिया।

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30 जनवरी की शाम सिंघू बॉर्डर पर क्या हुआ था? धर्मेन्द्र ने सुनायी अपनी और मनदीप की पूरी कहानी

दो पत्रकारों धर्मेंद्र सिंह और मनदीप पुनिया के साथ 0 जनवरी की शाम और रात क्‍या हुआ था, यह अब भी रहस्‍य है। हम अब तक यह जानते हैं कि धर्मेंद्र को सुबह छोड़ दिया गया था और मनदीप जेल में हैं। धर्मेंद्र ने हिरासत से रिहा होने के बाद एक वीडियो जारी कर के पूरा घटनाक्रम विस्‍तार से बताया है।

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सरकार अपना मानवीय पक्ष सामने लाए: अनशनरत किसानों के पक्ष में लेखकों-कलाकारों की अपील

ऐसे असहनीय वातावरण में हम संवेदनशील सर्जक किस तरह सुकून से बैठ सकते हैं। प्रतिरोध की जमीन हमारी रचनात्मकता से कैसे वंचित रह सकती है। मानव गरिमा के इस यज्ञ में हम कलाकार, बौद्धिक इस सत्याग्रह में खुद को समर्पित करते सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह हठ त्यागे व अपने देशवासियों की पीड़ा समझे।

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26 जनवरी के बाद 100 से अधिक लोग आंदोलन से लापता, कमेटी का गठन: SKM

संयुक्त किसान मोर्चा ने मनदीप पुनिया और अन्य पत्रकारों की गिरफ्तारी की निंदा की। झूठे और मनगढ़ंत आरोपों की आड़ में अपनी वास्तविक साजिश को दबाने और किसानों में डर पैदा करने के प्रयासों को किसानों ने अपनी बढ़ती ताकत से जवाब दिया।

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बातचीत करने से पहले सरकार को बातचीत के लिए माहौल बनाना चाहिए: किसान नेता

किसान नेताओं ने कहा कि किसान मजदूर जत्थेबंदी ने एक मुफ्त कानूनी सहायता प्रकोष्ठ स्थापित किया है, जो वकीलों का एक पैनल है, जो दिल्ली लीगल सेल के सहयोग से बनेगा। 26 जनवरी की घटना के बाद या उसके बाद सामान खरीदने के लिए बाजार जाते समय सिंघू, टिकरी और गाजीपुर जैसी सीमा से पुलिस द्वारा युवाओं को उठाए जाने की खबरें आई हैं।

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साम्प्रदायिक हिंसा के जिम्मेदार लोगों को राज्य का संरक्षण: MP के स्वतंत्र जांच दल की रिपोर्ट

28, 29 और 30 जनवरी 2021 को सभी प्रभावित इलाकों का दौरा करके और अनेक लोगों से बात करके इस स्वतंत्र जाँच दल ने ये पाया कि अलग-अलग दिखने वाली इन घटनाओं में कुछ समानताएँ भी हैं और इनका स्वरूप एक विशेष प्रकार से एक-दूसरे से मिलता है। चाँदना खेड़ी (गौतमपुरा, इंदौर), बेगम बाग (उज्जैन) और डोराना (मंदसौर) में बहुसंख्यक समुदाय की हथियारबंद भीड़ ने जानबूझकर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों को चुनकर वहाँ से रैली-जुलूस निकाले और अपमानजनक नारे आदि लगाए। नतीजे के तौर पर चाँदना खेड़ी और बेगम बाग में इस तरह के उकसावे से उत्तेजित कुछ लोगों ने पथराव किया।

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दिल्ली: किसान आंदोलन से पुलिस के उठाए दो पत्रकार घंटों से लापता, एक पर FIR, CPJ का अलर्ट जारी

दिल्‍ली में दो पत्रकार पांच घंटे से ज्‍यादा वक्‍त से गायब हैं। एक पर आईपीसी की धारा 186, 332, 353 में एफआइआर की पुष्‍ट सूचना है। अंतरराष्‍ट्रीय एजेंसी कमेटी टु प्रोटेक्‍ट जर्नलिस्‍ट्स (सीपीजे) ने देर रात अलर्ट जारी किया है।

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