भरत-अमेरिका FTA के खिलाफ कई राज्यों से हजारों किसानों का दिल्ली कूच


देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर 21 जुलाई 2026 को दिल्ली के किसान घाट पर भारत–अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को रद्द करवाने की मांग को लेकर विशाल महारैली आयोजित की जाएगी। इसके लिए पंजाब सहित देश के विभिन्न राज्यों से किसानों के काफिले दिल्ली की ओर रवाना हो रहे हैं।

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि किसान मजदूर संघर्ष समिति, पंजाब के अमृतसर और गुरदासपुर जिलों से सैकड़ों बसों और अन्य वाहनों का काफिला आज ब्यास पुल से रवाना हो रहा है। इसके अलावा किसान मजदूर मोर्चा (पंजाब चैप्टर), संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष तथा अन्य किसान संगठनों के काफिले भी पंजाब के विभिन्न जिलों से दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। सभी काफिले अपने-अपने कार्यक्रम के अनुसार रात के समय अलग-अलग स्थानों पर विश्राम करेंगे, जबकि किसान मजदूर संघर्ष समिति का काफिला फतेहगढ़ साहिब–सरहिंद में रात्रि विश्राम करेगा और अगले दिन तड़के शंभू बॉर्डर के रास्ते दिल्ली के लिए प्रस्थान करेगा।



पंधेर ने कहा कि फरवरी 2025 में अमेरिका और भारत द्वारा जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने “Negotiating the first tranche of a mutually beneficial, multi-sector Bilateral Trade Agreement (BTA) by fall 2025” तथा एक “wide-ranging Bilateral Trade Agreement” की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। इसका अर्थ है कि यह समझौता केवल कुछ वस्तुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि, डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, निवेश, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा सेवा क्षेत्र सहित अनेक क्षेत्रों को अपने दायरे में ला सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा पहले जारी किए गए व्यापारिक दस्तावेजों और अमेरिकी व्यापार रिपोर्टों में भारत से कृषि और डेयरी क्षेत्र में बाजार पहुंच बढ़ाने की लगातार मांग की गई है। इन दस्तावेजों में सोयाबीन, मक्का (कॉर्न), कपास, एथेनॉल, सेब, बादाम तथा अन्य कृषि उत्पादों पर शुल्क (टैरिफ) कम करने और अमेरिकी डेयरी उत्पादों, पोल्ट्री, फल, मत्स्य उत्पादों तथा नारियल जैसे उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने की मांग की जाती रही है।

किसान नेताओं ने कहा कि अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जबकि भारत के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत किसान हैं। यदि सस्ते अमेरिकी कृषि एवं डेयरी उत्पाद बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में प्रवेश करते हैं, तो इससे भारत के किसानों, दुग्ध उत्पादकों, छोटे व्यापारियों और लघु उद्योगों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत की डेयरी व्यवस्था लगभग 8 करोड़ ग्रामीण परिवारों की आय से जुड़ी हुई है। इस क्षेत्र को किसी भी प्रकार का झटका ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। इसी प्रकार बीज क्षेत्र, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, छोटे व्यापार तथा कृषि आधारित उद्योगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

देश बचाओ मोर्चा ने केंद्र सरकार से मांग की कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं तथा किसानों, मजदूरों, दुग्ध उत्पादकों, छोटे व्यापारियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा किए बिना कोई भी समझौता न किया जाए।

इस अवसर पर काफिले के साथ संगठन के अन्य प्रमुख नेताओं में हरविंदर सिंह मसाणियां (गुरदासपुर), स्विंदर सिंह चुताला, लखविंदर सिंह वरियाम नंगल, जर्मनजीत सिंह बंडाला, रणजीत सिंह कलेर बाला, कंवरदलीप सैदो लेहल तथा गुरदासपुर जिला अध्यक्ष हरभजन सिंह वैरो नंगल शामिल रहे।

गोइंदवाल साहिब से रवाना हो रहे जत्थे की अगुवाई सतनाम सिंह मानोचाहल और हरजिंदर सिंह शकरी ने की।


जारीकर्ता
सरवन सिंह पंधेर


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