सोनभद्र: हत्याकांड की पहली बरसी पर उम्भा के लोग गांव में ही नज़रबंद, ज़मीन के बदले मिला धोखा
सोनभद्र के उम्भा गांव में आदिवासियों के हत्याकांड का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर आज पूरे गांव को ही नजरबंद कर दिया गया है. लोगों को काम पर …
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सोनभद्र के उम्भा गांव में आदिवासियों के हत्याकांड का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर आज पूरे गांव को ही नजरबंद कर दिया गया है. लोगों को काम पर …
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उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 181 आशा ज्योति वूमेन हेल्पलाइन के 351 कर्मियों के एक साल से बकाया वेतन के भुगतान व उन्हें नौकरी से निकालने पर रोक लगाने की …
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मिर्जापुर टोल प्लाजा पर कांग्रेस नेता राजेश मिश्रा, अजय राय, प्रदेश महासचिव विश्वविजय सिंह, प्रदेश सचिव सरिता पटेल समेत सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता गिरफ्तार किये गये हैं। ये सभी नेता उम्भा में शहीद हुए आदिवासियों को पुष्पांजलि अर्पित करने जा रहे थे।
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प्रेस को जारी बयान में टीम ने बताया कि गरीबी रेखा के नीचे आने वाले घघरा निवासी आदिवासी वासुदेव खरवार की बेदखल की जा रही भूमि पुश्तैनी है। इसकी पुष्टि आस-पास बसे ग्रामीणों ने लिखित रूप से टीम से की।
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आज 17 दिन की जेल के बाद ज़मानत पर रिहा होकर बाहर आये युवा नेता शाहनवाज़ का लखनऊ के जिला कारागार के बाहर उनका पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, नेता दिनेश सिंह सहित अन्य नेताओं ने फूल माला से स्वागत किया। इस मौके पर उन्होंने फोन पर जनपथ से बात करते हुए राजनीति में जेल जाने के महत्व पर प्रकाश डाला।
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न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव, जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जन नाट्य मंच, इप्टा, प्रतिरोध का सिनेमा और संगवारी की ओर से निम्नांकित बयान जारी किया गया:
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उन्होंने कहा कि लखनऊ में ही बिना कानून के अवैध ढंग से वसूली की कार्यवाही की गई, लोगों को जेल भेजा गया तथा कुर्की तक की गई. योगी सरकार की इस मनमानी कार्रवाई पर माननीय हाईकोर्ट तक ने सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने कहा कि आरएसएस भाजपा की यह कार्यवाही देश में प्रतिभाओं को नष्ट कर देगी जो समाज व राष्ट्र की अपूरणीय क्षति होगी.
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हम सरकार को याद दिलाना चाहते हैं कि उसे किसी भी व्यक्ति को जीवन के अधिकार से वंचित करने का कोई अधिकार नहीं है, एक विचाराधीन बन्दी को तो बिल्कुल ही नहीं।
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विषय: Trajectory of India’s Democracy and Contemporary Challenges
वक्ता: प्रोफेसर सुहास पलशीकर (मुख्य संपादक, स्टडीज इन इंडियन पॉलिटिक्स और सहनिदेशक: लोकनीति, सेन्टर फार द स्टडी आफ डेवलपिंग सोसायटीज)
“मीडिया द्वारा दुष्प्रचार का जो अभियान नेपाल द्वारा अपने राजनीतिक मानचित्र में लिंपियाधुरा को शामिल करने के ऐतिहासिक निर्णय के सम्बंध में चलाये गये फर्जी समाचारों से शुरू हुआ था, वह प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बदनाम करने तक जा पहुंचा है जिसके बारे मैं आश्वस्त हूं कि आप इसे पत्रकारिता के नाम पर कलंक मानेंगे।”
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