स्मृतिशेष: हिंदीपट्टी के युवाओं में वाम-इतिहासबोध रोपने वाले एक अभिभावक का जाना

दिल्ली के बौद्धिक सर्किल ने लाल बहादुर जी को उस तरह से सपोर्ट नहीं किया जैसा उन्हें करना चाहिए था। शायद दिल्ली की अंग्रेजी दुनिया में ऐसे लोगों को ज्यादा सर नहीं चढ़ाया जाता जो गैर-अंग्रेजी फलक से क्रांतिकारी चेतना का विश्वविद्यालयी दुनिया से बाहर विस्तार चाहते हैं।

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स्वास्थ्य के क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश में बढ़ोतरी करे UP सरकार: जन स्वास्थ्य अभियान

जन स्वास्थ्य अभियान (JSA), जो कि स्वास्थ्य अधिकारों के लिए काम करने वाले नागरिक संगठनों और जन संगठनों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क है, ने अपनी मांगों को बेहद जरूरी बताते हुए कहा है कि स्वास्थ्य और स्वास्थ्य देखभाल एक बुनियादी मानवाधिकार हैं और इनपर सभी सरकारों, चाहे वह केंद्र सरकार हो या राज्य की सरकारें, को सर्वोच्च प्राथमिकता देना चाहिए।

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जेल में बंद DU के शिक्षक हैनी बाबू की जिंदगी खतरे में, परिवार ने जारी की अपील

आज भी वकील पायोशी राय के जरिये कई बार जेल में फोन करने के बाद भी हमें किसी तरह का जवाब नहीं मिला है। हमें यह भय है कि यह मलिन व्यवस्था कई जेलों में होगी और वहां भी लोगों को इस तरह का अपूरणीय नुकसान उठाना पड़ रहा होगा।

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के. सच्चिदानंदन पर 24 घंटे के फेसबुक सेंसर का बुद्धिजीवियों ने किया विरोध

उन्हें फेसबुक ने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बारे में एक व्यंग्यात्मक पोस्ट करने के कारण 24 घंटे के लिए ब्लॉक कर दिया था। यह समय-अवधि समाप्त होने के बाद फेसबुक ने उनका अकाउंट बहाल कर दिया है।

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महामारी में ‘उम्मीद’: महाराष्ट्र के पिसवली गांव में 25 युवाओं के संघर्ष की प्रेरक कहानी

महाराष्ट्र के कल्याण क्षेत्र के एक गांव पिसवली के ये युवा अपनी बस्ती के लोगों के स्वास्थ्य को लेकर शुरुआत से ही सचेत थे और तब से लेकर आज तक में वे लगातार सक्रिय रहे। आइए, इन युवाओं की कहानी और इनकी चिंताओं से आपको रूबरू कराते हैं।

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NHRC ने COVID-19 की दूसरी लहर में स्वास्थ्य अधिकार पर जारी की दूसरी एडवाइजरी

मानवाधिकार आयोग ने कोविड-19 महामारी का मानवाधिकारों पर प्रभाव और भविष्य के परिणामों का आकलन करने के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई थी जिसमें सामाजिक संस्थाओं, नागरिक संस्थाओं, स्वतंत्र विशेषज्ञ और संबंधित मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधि शामिल थे।

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ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि लाशों के ढेर पर सम्पन्न कराया गया यूपी का पंचायत चुनाव?

वहां किसी तरह की कोई सोशल डीस्टेंसिंग नहीं थी, बहुत सारे लोग वहां बिना मास्क के घूम रहे थे, सामग्री वितरण, हस्ताक्षर करते समय लोग एक दूसरे के ऊपर चढ़ जा रहे थे। मैं क्या कोई भी चाह कर भी किसी तरह की सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रख सकता था। यहीं से मुझे कोरोना से मरने वाले शिक्षकों के कारण नजर आने लगे।

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स्मृतिशेष: ‘दिल्ली की सेल्फ़ी’ के जुनूनी प्रकाशक जतिंदर, जिनमें ‘अखबार निकालने का कीड़ा’ था!

जतिंदर जी को अख़बार निकालने का इतना जूनून था कि आज से 20 साल पहले उन्होंने ‘अलर्ट टाइम्स’ नाम से अंग्रेजी साप्ताहिक शुरू किया था और उसके लोकार्पण के लिए पूर्व सीबीआई प्रमुख जोगिन्दर सिंह को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया था।

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“स्वाभिमान को ताक पर रख के मैं हाथ जोड़ती हूं, आप कुर्सी से हट जाइए”!

अगर आप पद से नहीं हटते हैं तो हम में से लाखों लोग बिना किसी वजह के मारे जाएंगे। इसलिए अब आप जाइए। झोला उठा के। अपनी गरिमा का ध्यान रखते हुए। ध्यान करते हुए और एकांतवास में आप अपनी आगे की जिन्दगी सुकून से जी सकते हैं।

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बीते दो हफ्ते में कोरोना के हाथों मारे गए सौ बेनाम पत्रकारों को क्या आप जानते हैं?

बीते दो हफ्तों में भारत में मारे गए 50 पत्रकारों की सूची बहुत छोटी है। अगर इसमें राज्‍यों में स्‍थानीय स्‍तर पर मारे गए पत्रकारों की उपलब्‍ध सूचनाओं को जोड़ लें तो संख्‍या 96 तक पहुंचती है यानी रोजाना छह से ज्‍यादा पत्रकारों की मौत।

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