महामारी में ‘उम्मीद’: महाराष्ट्र के पिसवली गांव में 25 युवाओं के संघर्ष की प्रेरक कहानी

महाराष्ट्र के कल्याण क्षेत्र के एक गांव पिसवली के ये युवा अपनी बस्ती के लोगों के स्वास्थ्य को लेकर शुरुआत से ही सचेत थे और तब से लेकर आज तक में वे लगातार सक्रिय रहे। आइए, इन युवाओं की कहानी और इनकी चिंताओं से आपको रूबरू कराते हैं।

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NHRC ने COVID-19 की दूसरी लहर में स्वास्थ्य अधिकार पर जारी की दूसरी एडवाइजरी

मानवाधिकार आयोग ने कोविड-19 महामारी का मानवाधिकारों पर प्रभाव और भविष्य के परिणामों का आकलन करने के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई थी जिसमें सामाजिक संस्थाओं, नागरिक संस्थाओं, स्वतंत्र विशेषज्ञ और संबंधित मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधि शामिल थे।

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ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि लाशों के ढेर पर सम्पन्न कराया गया यूपी का पंचायत चुनाव?

वहां किसी तरह की कोई सोशल डीस्टेंसिंग नहीं थी, बहुत सारे लोग वहां बिना मास्क के घूम रहे थे, सामग्री वितरण, हस्ताक्षर करते समय लोग एक दूसरे के ऊपर चढ़ जा रहे थे। मैं क्या कोई भी चाह कर भी किसी तरह की सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रख सकता था। यहीं से मुझे कोरोना से मरने वाले शिक्षकों के कारण नजर आने लगे।

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स्मृतिशेष: ‘दिल्ली की सेल्फ़ी’ के जुनूनी प्रकाशक जतिंदर, जिनमें ‘अखबार निकालने का कीड़ा’ था!

जतिंदर जी को अख़बार निकालने का इतना जूनून था कि आज से 20 साल पहले उन्होंने ‘अलर्ट टाइम्स’ नाम से अंग्रेजी साप्ताहिक शुरू किया था और उसके लोकार्पण के लिए पूर्व सीबीआई प्रमुख जोगिन्दर सिंह को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया था।

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“स्वाभिमान को ताक पर रख के मैं हाथ जोड़ती हूं, आप कुर्सी से हट जाइए”!

अगर आप पद से नहीं हटते हैं तो हम में से लाखों लोग बिना किसी वजह के मारे जाएंगे। इसलिए अब आप जाइए। झोला उठा के। अपनी गरिमा का ध्यान रखते हुए। ध्यान करते हुए और एकांतवास में आप अपनी आगे की जिन्दगी सुकून से जी सकते हैं।

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बीते दो हफ्ते में कोरोना के हाथों मारे गए सौ बेनाम पत्रकारों को क्या आप जानते हैं?

बीते दो हफ्तों में भारत में मारे गए 50 पत्रकारों की सूची बहुत छोटी है। अगर इसमें राज्‍यों में स्‍थानीय स्‍तर पर मारे गए पत्रकारों की उपलब्‍ध सूचनाओं को जोड़ लें तो संख्‍या 96 तक पहुंचती है यानी रोजाना छह से ज्‍यादा पत्रकारों की मौत।

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”सस्ती जान की कुछ कीमत होती होगी, हमारी वह भी नहीं है” : UP के एक अध्यापक का पत्र

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कोरोना का विस्फोट जब होगा तो क्या होगा, इसकी केवल कल्पना की जा सकती है। अभी केवल गोरखपुर, आजमगढ़, बनारस, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद में लोग ऑक्सीजन और हॉस्पिटल बेड के लिए दौड़ रहे हैं और जब यह दृश्य उत्तर प्रदेश की ग्रामीण जनता के साथ घटेगा तब क्या होगा?

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SKM की हरियाणा सरकार के साथ बैठक, सिंघु बॉर्डर पर एक तरफ से हटेगा बैरिकेड

संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने आज शाम हरियाणा प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक विस्तृत बैठक की। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ऑक्सिजन, एम्बुलेंस व अन्य जरूरी सेवाओं के लिए GT करनाल रोड़ का एक हिस्सा खोला जाएगा जिस पर दिल्ली पुलिस ने कठोर बैरिकेड लगाए हुए हैं।

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IIT-BHU प्रशासन PhD के छात्र-छात्राओं से हॉस्टल खाली करने का आदेश वापस ले: SFC

हॉस्टल में रह रहे PhD के कुछ छात्र-छात्राओं ने प्रशासन के इस फैसले के विरुद्ध हॉस्टल के अंदर ही आंदोलन शुरू कर दिया है और खाली करने से इनकार किया है।

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भारत में कानून के राज की अवमानना हो रही है: SC के पूर्व जस्टिस मदन लोकुर

हर साल सिविल सोसायटी वॉचडॉग कॉमन कॉज़, सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज़ (सीएसडीएस) के सहयोग से स्टेटस ऑफ पुलिसिंग रिपोर्ट (एसपीआईआर) जारी करती है. रिपोर्ट के पहले खंड का 19 अप्रैल को एक कार्यक्रम में विमोचन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व और कार्यरत पुलिसकर्मियों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया. इस रिपोर्ट को नीचे पढ़ा जा सकता है.

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