दिकू इतिहासकारों के फुटनोट में सीमित रह गया उलगुलान का नायक बीरसा

अमर शहीद बीरसा मुंडा 19वीं सदी के अंतिम दशक में हुए स्वतंत्रता आंदोलन के महान लोकनायक थे। उनका ‘उलगुलान’ (आदिवासियों का जल-जंगल-जमीन पर दावेदारी का संघर्ष) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के …

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नेशनल लॉ युनिवर्सिटी में ठेका मजदूरों से अन्याय के मुद्दे पर मौन शैक्षिक बिरादरी से कुछ सवाल

शैक्षिक समुदाय का क्या दायित्व बनता है, विशेष रूप से एक विधि विश्वविद्यालय में उसकी स्थापना के वर्ष 2008 से कार्यरत सफाई कर्मचारियों को यदि ठेका परिवर्तन के चलते निष्ठुरता …

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एक विचार की तरह याद किए जाएंगे सम्यक प्रकाशन के संस्थापक शांति स्वरूप बौद्ध

दिनांक 6 जून 2020 को सम्यक प्रकाशन के संस्थापक शांति स्वरूप बौद्ध का परिनिर्वाण हो गया। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1949 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने हिंदी में दलित …

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आज भी अधूरा है मार्टिन लूथर किंग का सपना

वर्ष 1963 में अगस्त 29 को अमरीका की राजधानी वाशिंगटन में एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन का नेतृत्व मार्टिन लूथर किंग जूनियर कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी ‘हमें सम्मान और काम …

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लॉकडाउन के बाद किसानों की कमर तोड़ने आ रहे हैं टिड्डे, समझिए टिड्डी दलों का विज्ञान

यह समझना कि टिड्डी दल कैसे बनते हैं तथा उसे कैसे अलग किया जा सकता है, एक महत्वपूर्ण सवाल है।

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बहुजन समाज के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे बंद करने की तैयारी है ऑनलाइन ओपेन बुक परीक्षा

जब भारत का कमजोर और बहुजन तबका भयानक त्रासदी से गुजर रहा है तब उनके बच्चों को ऑनलाइन ओपेन बुक परीक्षा देने को कहा जा रहा है

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मोदी कैबिनेट के अध्यादेश लागू हुए तो कंपनियों के गुलाम हो जाएंगे किसान

सच्चाई यह है मोदी सरकार के इन निर्णयों से न तो किसानों को कोई फायदा होने जा रहा है और न देश की आम जनता को

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जान ख़तरे में है इंसान की, फिर क्या जल्दी है आस्था के प्रदर्शन की?

क्या हम कभी इसके पीछे की तर्कप्रणाली को जान सकेंगे कि जब मुल्क में कोविड-19 संक्रमण के महज 500 मामले थे तो मुल्क के कर्णधारों ने दुनिया में सबसे सख्त …

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बंकर में ट्रम्प और दुनिया भर में धुर दक्षिणपंथी नज़रिये की खुलती कलई

यह घटना एक संकेत अवश्य है कि वहां पर ट्रम्प उस तरह से अजेय नही हैं जैसा कि अपने हाव भाव से वे जाहिर करते हैं

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युद्ध छेड़ने की हद तक भले न जाए चीन, लेकिन उससे खतरा पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा है

यह सच है कि भारत अब 1962 वाला भारत नहीं है लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि चीन की सैनिक ताकत हमसे कहीं ज्यादा है

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