लगातार दूसरे साल देश में कोयला आधारित बिजली उत्पादन कम हुआ: अध्ययन

इस गिरावट का सिलसिला 2018 से शुरू हुआ जब उत्पादन ने अपने ऐतिहासिक शिखर पर पहुँचने के बाद नीचे का रुख कर लिया। पिछले साल कोविड की वजह से लगे लॉकडाउन ने इस गिरावट को मज़बूत कर दिया और अब यह सुनिश्चित करने का एक अवसर है कि COVID-19 महामारी से उबरने के दौर में देश वापस कोयला बिजली के उत्पादन को बढ़ने का मौका न दे।

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जितने में नयी संसद बना रहे हैं, उतने में तो पूरे देश के गन्ना किसानों का बकाया चुक जाता: प्रियंका

सहारनपुर के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा आज बिजनौर के चांदपुर में आयोजित दूसरी किसान पंचायत में पहुंचीं, गन्ना किसानों के बकाये पर उन्होंने सरकार को खरी-खोटी सुनायी और कहा, “मेरे भाई राहुल गांधी आपके साथ हैं।”

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‘टूलकिट’ केस: मुंबई की वकील सहित एक अन्‍य के खिलाफ़ दिल्‍ली पुलिस का गैर-ज़मानती वॉरंट

इस मामले में दिल्‍ली पुलिस ने विस्‍तार से जानकारी देते हुए बताया कि पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के संस्‍थापक एमओ धालीवाल ने निकिता से अपने सहयोगी पुनीत के माध्‍यम से संपर्क किया था। इसका उद्देश्‍य गणतंत्र दिवस के ठी‍क पहले एक ट्विटर स्‍टॉर्म आयोजित करना था।

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एक घटना को छुपाने के लिए दूसरी को अंजाम देने का उदाहरण है गिरधारी एनकाउंटर: रिहाई मंच

बलिया के सिकंदरपुर थाने में दलित युवक की बेरहमी से पिटाई, कासगंज में अपराधियों द्वारा पुलिस को बंधक बनाकर हत्या-घायल करना, आज़मगढ़ में बीडीसी आलम की दिन दहाड़े हत्या, जौनपुर में कृष्णा यादव की हिरासत में मौत के बाद राजधानी में गिरधारी का एनकाउंटर यूपी में ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था का उदाहरण है.

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बीमार माँ से मिलने के लिए पत्रकार सिद्दीक कप्पन को SC से पांच दिन की अंतरिम ज़मानत

अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस केरल में उनकी मां से मिलाने के लिए कप्पन को ले जाएगी. इस दौरान कप्पन को रिश्तेदारों, डॉक्टरों और करीबी परिवार के सदस्यों को छोड़कर किसी से बात करने की इजाजत नहीं होगी.

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म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के खिलाफ़ और लोकतंत्र के लिए जुट रहा वैश्विक समर्थन

सैन्य शक्तियां म्यांमार में एक लम्बे अरसे से वैश्विक मानवाधिकार पटल कर खरे नहीं उतरी हैं. सैन्य तख्तापलट के बाद भी सेना, मानवाधिकार उल्लंघन जारी रखे हुए है और सामाजिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, जनजाति और अन्य समुदाय, धार्मिक समुदाय आदि की लोकतंत्र के लिए उठती आवाजें दबा रही है.

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उत्तराखंड के 85 फ़ीसद जिलों की आबादी प्राकृतिक आपदा से खतरे के मुहाने पर: CEEW

सीईईवी विश्लेषण ने यह भी बताया कि उत्तराखंड में 1970 के बाद से सूखा दो गुना बढ़ गया था और राज्य के 69 प्रतिशत से अधिक जिले इसकी चपेट में थे। साथ ही, पिछले एक दशक में, अल्मोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों में बाढ़ और सूखा एक साथ आया।

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गरीबों को गरीबी की जवाबदेही से मुक्त कर के विमर्शकार क्या अपना अपराधबोध कम करते हैं?

अगर हम बनर्जी महोदय की बातें मान लेते हैं, तो हमें मानना होगा कि गरीबों का स्वभाव ही गरीबी के लिए जिम्मेदार है। तो क्या गरीबी एक चारित्रिक दुर्गुण है? यह एक नया विचार है जिस पर सब लोग सहमत नहीं हो सकते!

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यह आम बजट नहीं, औद्योगिक घराना स्पेशल बजट है! मोबाइलवाणी पर ग्राउन्ड से जनता की राय

जब वित्त मंत्री ने बजट का पिटारा खोला तो गरीब और मध्यम वर्ग के चेहरे पर मायूसी छा गई. सरकार ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के बजट से 45 फीसदी से ज्यादा कटौती कर ली है.

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पेरिस समझौते के लक्ष्य पूरे होने से बच सकती हैं लाखों जानें: लैंसेट

अध्ययन में नौ देशों पर शोध किया गया है और ये वो देश हैं जो दुनिया की आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और 70 फ़ीसद कार्बन उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार हैं।

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