किसान आंदोलन: वीएम सिंह की मनमानी के चलते AIKSCC ने संयोजक का पद किया खत्म, पढ़ें बयान
की भावना को जागृत करने के लिए पंजाब के किसानों ने हाईवे के डिवाइडर पर धनिया, गाजर, मूली बोनी शुरु की
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की भावना को जागृत करने के लिए पंजाब के किसानों ने हाईवे के डिवाइडर पर धनिया, गाजर, मूली बोनी शुरु की
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हिन्दी के मानिंद कवि और वरिष्ठ संपादक मंगलेश डबराल का आज शाम दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे और कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। जनपथ उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देते हुए उन्हीं की लिखी एक कविता को पुनः प्रकाशित कर रहा है।
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बुधवार शाम हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान संगठनों ने अगले कुछ दिनों की अपनी रणनीति की घोषणा की, जिसमें सबसे बड़ा ऐलान रिलायंस और अडानी के खिलाफ खुलेआम मोर्चा खोलना है।
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गौतम का चश्मा जेल में 27 नवंबर को चोरी हो गया था। उसके बाद तीन दिन तक उन्हें अपने परिवार फोन नहीं करने दिया गया। उनकी पत्नी ने बाद में जब चश्मा डाक से भेजा, तो जेल अधिकारियों ने उसे लेने से इनकार कर दिया।
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कायदे से छठे दौर की बैठक का दिन आज तय था, लेकिन जाने किस जल्दबाज़ी और उम्मीद में गृहमंत्री ने बैठक एक दिन पहले बुलवा ली। बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने पहले से तय आज की बैठक को रद्द करते हुए कहा कि किसान संगठनों को सरकार एक प्रस्ताव लिखित में भेजेगी। उसके बाद उक्त प्रस्ताव पर बैठक गुरुवार को होगी।
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आज न्यू सोशलिस्ट इनीशिएटिव, दलित लेखक संघ, अखिल भारतीय दलित लेखिका मंच, प्रगतिशील लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, इप्टा, संगवारी, प्रतिरोध का सिनेमा और जनवादी लेखक संघ ने किसान आंदोलन की माँगों और 8 दिसंबर के भारत बंद के समर्थन में बयान जारी किया।
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मीडिया के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक और कुछ नहीं हो सकता कि देश की सबसे बड़ी आबादी और अन्नदाताओं के प्रति पत्रकारिता कैसे की जाय, उसकी सलाह मूर्धन्य संपादकों को जारी करनी पड़ रही है।
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लगातार सात घंटे तक चली किसान संगठनों के नुमाइंदों और कृषि मंत्री की वार्ता आज भी बेनतीजा समाप्त हो गयी और अगली तारीख दे दी गयी। दोनों पक्ष अब परसों यानी 5 दिसम्बर को फिर बैठेंगे। उस दिन किसान संगठनों ने देश भर में कृषि कानूनों का पुतला फूंकने का आह्वान किया है।
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उनका आखिरी संपादकीय 9 अप्रैल, 2020 को कोरोना पर आया था। इस संपादकीय में उन्होंने कोरोना के बाद बनने वाली दुनिया को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठाये थे। ये सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। जनपथ अपने समय के इस महान संपादक प्रकाशक को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सम्मान में उनका 9 अप्रैल को छपा संपादकीय पुनर्प्रकाशित कर रहा है।
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पत्र में कहा गया है कि किसान संगठनों को एक्सपर्ट पैनल वाला प्रस्ताव नामंजूर है और वे कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए एक संसदीय सत्र बुलाने की अपनी मांग को दुहराते हैं।
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