खुल जाए शहर का ताला: अहमदाबाद और सूरत में प्रवासी मजदूरों पर आजीविका ब्यूरो का अध्ययन

यह अध्ययन दो प्रमुख भारतीय शहरों अहमदाबाद और सूरत में कोविड के महामारी का रूप लेने से पहले किया गया। प्रस्तुत है अध्ययन का सार

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वर्धाः खराब खाने की शिकायत पर विश्वविद्यालय ने छात्रा से लिया माफ़ीनामा, ABVP को उजागर कर दी पहचान

विश्वविद्यालय के करीब 200 छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जो लॉकडाउन की वजह से परिसर में ही फंस कर रह गये

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कोरोना से उपजे आर्थिक संकट पर राहुल गांधी और रघुराम राजन के बीच हुई पूरी बातचीत यहां पढ़ें

कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस दौर में कुछ जानकारों के साथ कुछ विशिष्ट विषयों पर वीडियो चर्चा शुरू की है। इस कड़ी में उन्होंने विश्व के जानेमाने अर्थशास्त्री और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से आधे घंटे की बातचीत की जिसे विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर लाइव स्ट्रीम किया गया।

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अगर लॉकडाउन नहीं होता तो क्या ऋषि कपूर आज ज़िंदा होते? उनकी ट्विटर टाइमलाइन कुछ कहती है…

जनता कर्फ्यू से लेकर रामनवमी के बीच गुजरे 10 दिन के लॉकडाउन में हम देखते हैं कि काफी तेज़ी से ऋषि कपूर की मानसिक स्थिति बदल रही है। एक जद्दोजेहद दिखलायी देती है, विचार प्रक्रिया अस्पष्ट है और सबके कल्याण के लिए वे बंदिशाें को और मज़बूत करने के हक में भी हैें।

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नग़ीब माहफूज़ की कहानी “आधा दिन”

कायरो, मिस्र में 1911 में जन्मे नग़ीब माहफूज़ ने 17 वर्ष की उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनका पहला नाविल 1939 में शाया हुआ और 1952 में मिस्र की क्रांति से पहले उनकी लिखी दस और किताबें शाया हो चुकी थीं

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सुलतान क्या होता है, ये आपने कभी सोचा है? महमूद गज़नी को अल-बिरूनी उर्फ़ इरफ़ान का जवाब

प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के लिखे डिस्कवरी आफ इंडिया पर बने दूरदर्शन के सीरियल भारत एक खाेज में इरफ़ान खान जिन छह अध्यायों में हमें नज़र आते हैं, उनमें एक एपिसोड महमूद गज़नी पर है। इसमें वे दार्शनिक अल-बिरूनी के किरदार में हैं।

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किसी ने पीठ पर ठोंक कर कहा था, “आपका स्टेशन आ रहा है, प्लीज़ उतर जाएं”!

कैंसर के इलाज के दौरान उन्होंने अजय ब्रह्मात्मज को एक चिट्ठी लिखी थी। उस चिट्ठी को दोबारा पढ़ा जाना चाहिए आज।

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एशिया के राष्ट्राध्यक्षाें से कैद पत्रकारों को छोड़ने की अपील, 74 अपीली संगठनों में CPJ, CAAJ और PVCHR

अभियान शुरू किये जाने के बाद से लेकर 31 मार्च तक कम से कम पांच पत्रकारों को रिहा किया गया है हालांकि उसके बाद भी कुछ देशाें में पत्रकारों की गिरफ्तारी की गयी है।

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वह शख्स जो अनंत को जानता थाः श्रीनिवासन रामानुजन पर प्रो. रवि सिन्हा का पूरा लेक्चर

यह लेक्चर दो हिस्सों में हैं। जनपथ के पाठकों के लिए हम पूरा लेक्चर दो हिस्सों के वीडियो में नीचे प्रकाशित कर रहे हैं।

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