हरियाणा: घर में नशे का हाहाकार, मुख्यमंत्री कर रहे पड़ोस में प्रचार


हरियाणा में नशा उन्मूलन के भाजपा सरकार के दावे अपनी जगह, लेकिन हकीकत अपनी जगह। चरखी दादरी जिला हाई रिस्क जोन में तब्दील होने लगा है। दक्षिण हरियाणा के चरखी दादरी जिले में बढ़ते नशे के खिलाफ समसपुर गांव के ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। धरना पिछले 13 दिनों से चल रहा है। फोगाट खाप के साथ-साथ अन्य आसपास के गांवों ने भी सामूहिक रूप से धरने का समर्थन किया है।

दादरी के विधायक सुनील सांगवान ने ग्रामीणों को बार-बार आश्वासन दिया है कि नशा माफियाओं की संपत्ति जब्त की जाएगी और तस्करों को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन ग्रामीण विधायक पर कोई विश्वास अब कर नहीं रहे। ग्रामीणों ने बताया कि भाजपा के स्थानीय विधायक सांगवान से गांव के लोग पहले कई बार मिल कर स्थिति से अवगत करवा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान विधायक करवा नहीं पाए। विधायक स्वयं लंबे समय तक हरियाणा में जेल अधीक्षक के बतौर राजकीय सेवा में रह चुके हैं। अपराधियों की प्रवृत्ति और अपराध के खतरे से समाज पर प्रभाव को भी अच्छी तरह समझते हैं, लेकिन अपने क्षेत्र में नशे के व्यापार को रुकवाने में असहाय हैं।   

पंजाब से लगते दो तीन जिलों में या दिल्ली से सटे गुरुग्राम और फरीदाबाद में मादक पदार्थों के विस्तार की बात पहले सामने आती थी, लेकिन अब दक्षिण हरियाणा भी नशे की चपेट आने लगा है। सबसे पहले नशामुक्त जिला घोषित होने वाले चरखी दादरी को नशा धीरे-धीरे अपनी जकड़ में लेने लगा है। अधिकतर युवा इसका शिकार बन रहे हैं। माता-पिता के साथ परिवारों की परेशानियां एक बड़े संकट के रूप में उभरने लगी हैं। नशे के विस्तार से पूरा जिला अछूता नहीं। प्रशासन और पुलिस के लिए एक नई चुनौती नशे को खत्म करने की निरंतर बनी हुई है। हाल ही में 18 से 30 वर्ष की आयु के 1 .84 लाख युवाओं ने राज्य में नशामुक्ति केंद्रों में चिकित्सा सहायता ली जो राज्य में बढ़ते संकट को उजागर करता है।



इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार दिसंबर 2022 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक पी के अग्रवाल ने हरियाणा में नशा उन्मूलन की एक रिपोर्ट जारी करके बताया था कि पुलिस ने प्रदेश में 20 टन से अधिक मादक पदार्थ जब्त किए हैं और पुलिस ने 2022 में मादक औषधि एवं मनोरोग पदार्थ अधिनियम के तहत कुल 3636 मामले दर्ज किए हैं, जबकि 2021 में 2583 मामले दर्ज किए गए थे। अग्रवाल के अनुसार, एनडीपीएस अधिनियम के तहत सबसे अधिक 587 मामले सिरसा में दर्ज किए गए, उसके बाद फरीदाबाद में 349, करनाल में 273, फतेहाबाद में 240 और कुरुक्षेत्र में 220 मामले दर्ज किए गए।

फरवरी 2022 में हरियाणा के मुख्य सचिव संजीव कौशल ने प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राज्य सर्वोच्च समिति की बैठक की अध्यक्षता की और स्पष्ट किया था कि सरकार का उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी को रोकना, नियंत्रित करना और नशा के शिकार लोगों का पुनर्वास करना है।

जून 2019 में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उत्तरी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) की “नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी” पर आयोजित समन्वय बैठक के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को समाज से नशीली दवाओं के खतरे से निपटने के लिए उपचार, प्रवर्तन और जागरूकता (टीईए) नामक तीनस्तरीय रणनीति अपनाने को निर्देशित किया था। नशीली दवाओं और पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को सफल बनाने के लिए उत्तरी क्षेत्र में नशीले पदार्थों के खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आंकड़ों और सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु पंचकूला में एक अंतरराज्यीय नशीली दवाओं पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए सचिवालय पहले ही स्थापित किया जा चुका है।

इतने प्रयासों के बावजूद चरखी दादरी के समसपुर गांव के बस स्टैंड पर ग्रामीणों ने नशा माफिया के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया हुआ है। उनका आरोप है कि जिला प्रशासन नशामुक्त होने के दावे कर रहा है, जबकि धरातल पर नशे का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है जिसकी चपेट में आसपास के गांवों के युवा भी आ रहे हैं। इस धरने को क्षेत्र की प्रमुख फोगाट खाप का भी पूरा समर्थन मिला, जिसके बाद पुलिस व प्रशासन पर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने का दबाव बना।

धरना दे रहे ग्रामीणों द्वारा दी गई सूची के आधार पर पुलिस ने कई नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो आरोपी पकड़े नहीं गए हैं, उनकी संपत्तियां जब्त की जाएंगी। पुलिस ने अब जाकर ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की है क्‍योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंजाब में प्रचार कर रहे हैं कि आम आदमी पार्टी की सरकार नशे को नियंत्रित करने में सफल नहीं है और भाजपा युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। बाद में हरकत में आई हरियाणा सरकार ने जिले में स्पेशल नार्कोटिक्स यूनिट का गठन कर दिया है। सूखे नशे पर मंथन के साथ ही पुलिस प्रशासन द्वारा जिले में नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और पुलिस गश्त बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप चरखी दादरी में अलग नार्कोटिक्स यूनिट (NCB) तैनात कर दी गई है।

बुधवार को जिला पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में पुलिस पब्लिक समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य जिले में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना, अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना तथा पुलिस और आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। बैठक में शहर के रोज गार्डन तथा अन्य संवेदनशील और हॉट स्पॉट क्षेत्रों में बढ़ रही गैरकानूनी गतिविधियों पर भी चर्चा की गई। विशेष रूप से सूखे नशे के बढ़ते प्रचलन को लेकर सदस्यों ने कठोर कार्रवाई की मांग की।

गांव में नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए ग्रामीण कई बार पुलिस प्रशासन को भी अवगत करवा चुके हैं, लेकिन नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होने के कारण वे आसानी से बच निकलते हैं। जून 2025 में तत्कालीन प्रदेश पुलिस प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने दादरी को प्रदेश का पहला नशा मुक्त जिला घोषित किया था। चरखी दादरी पुलिस की नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति क्यों प्रभावी साबित नहीं हो रही यह इस तरह के धरने से स्पष्ट हो जाता है।

नशीले पदार्थों की बरामदगी और नशा तस्करों की गिरफ्तारी के लिए जिला पुलिस ने जून 2025 में सर्च अभियान चलाया था। पुलिस अधीक्षक अर्श वर्मा के निर्देशानुसार सभी थाना प्रबंधकों ने अपने अधिकार क्षेत्र में टीमों के साथ विभिन्न जगहों पर दबिश दी। सर्च अभियान के लिए पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार 7 टीमें बनाई गईं जिनमें 150 पुलिस कर्मचारियों को शामिल किया गया। इसके बाद इन टीमों ने एक साथ मादक पदार्थों की बरामदगी व नशा तस्करों पर दबिश दी थी। हालत में अपेक्षाकृत सुधार होने के दावे तो किये गये लेकिन स्थितियां काबू के बाहर अभी भी बनी हुई है।

नशे के व्यापार को लेकर 2025 में ही पुलिस ने दादरी शहर में एक अपराधी को पकड़ा था जिससे पांच पिस्तौल और कुछ जिंदा कारतूस मौके से बरामद किए गए थे। यह व्यक्ति कबीर नगर का निवासी पाया गया। पिछले साल दादरी शहर में दो गुटों के नशे के व्यपार पर अपना वर्चस्व कायम करने की आपसी रंजिश में दिनदिहाड़े बीच सड़क पर घेर कर एक तस्कर को गोलियां मारी गयी थीं।

पेन किलर के इंजेक्शन, अन्य दवाई इंजेक्ट, स्मैक, हैरोइन, गांजा, पारा, कूल लिप, नशीली गोलिया कैप्सूल आदि कई तरह के नशे का प्रचलन बढ़ गया है। हरियाणा में नशे का व्यापार कितना फ़ैल चुका है इसका अंदाजा पुलिस द्वारा साल दर साल जब्त किए जा रहे मादक पदार्थों की मात्रा से अलग कुल हो रही बिक्री और खपत से लगया जा सकता है। पारंपरिक प्राकृतिक मादक पदार्थों (जैसे अफीम और गांजा) से इंजेक्शन द्वारा लिए जाने वाले पदार्थों में और घातक बदलाव आया है। नशेड़ी  अक्सर ट्रामडोल, टैपेंटाडोल और अन्य गोलियों को पीसकर इंजेक्शन द्वारा लेते हैं।

हरियाणा में 32 विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) हैं जो मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के औद्योगिक गलियारा परियोजना के अंदर स्थित हैं जिसमें दक्षिण हरियाणा के कई जिले आते हैं। बेरोजगारी के मामले में हरियाणा एक अग्रणी प्रदेश बन चुका है। ऐसे में गंभीर सवाल सामाजिक असंतोष और युवाओं के भविष्य का बना हुआ है।



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