किसान आंदोलन: रंजीत सिंह को जमानत, मोर्चे ने किया हरियाणा विधानसभा के निंदा प्रस्ताव का विरोध


संयुक्‍त किसान मोर्चा प्रेस नोट
111वां दिन, 16 मार्च 2021

संयुक्‍त किसान मोर्चा हमेशा बातचीत के पक्ष में रहा है। सरकार विभिन्न रुकावटों को दूर कर बातचीत का रास्ता खोले। सरकार द्वारा दिया गया प्रस्ताव किसान पहले ही अस्वीकार कर चुके हैं।

हरियाणा विधानसभा में जजपा व भाजपा विधायकों के सामाजिक बहिष्कार सम्बंधी किसानों के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है जिसका हम विरोध करते हैं। यह हरियाणा के किसानों का जजपा व भाजपा विधायकों पर बनाये गए दबाव का नतीजा है।

हरियाणा सरकार द्वारा हाल ही में आन्दोलन से सम्बंधी लाये गए कानून (लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान संपत्ति क्षति वसूली विधेयक 2021) की हम निंदा व विरोध करते हैं। इस कानून के मुताबिक आन्दोलनकारियों को गलत केसों में फंसाकर जनता की आवाज़ को दबाया जाएगा। यह प्रयास वर्तमान किसान आंदोलन को खत्म करने व किसानों को झूठे केसों में फंसाने के लिए किए जा रहे हैं। संयुक्‍त किसान मोर्चा इस कानून को हरियाणा सरकार की बौखलाहट करार देता है जहां खुद मुख्यमंत्री तक का जनता ने सामाजिक बहिष्कार किया हुआ है।

आन्दोलन को देशव्यापी स्तर पर तेज करने के सम्बंध में संयुक्‍त किसान मोर्चा की अध्यक्षता में कल देशभर की ट्रेड यूनियनों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों एवं अन्य जनाधिकार संगठनों का संयुक्‍त अधिवेशन किया जाएगा और आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस संबंध में इन सभी संगठनों को एक पत्र भी लिखा गया है।

सिंघु बॉर्डर पर हिंसा मामले में रंजीत सिंह को एफआइआर नं 49/2021 पी.एस. अलीपुर, सेशंस जज, रोहिणी कोर्ट में आज जमानत दी गयी है। रंजीत सिंह की जमानत के लिए अपना प्रयास करने वाले अधिवक्ताओं में वरिष्ठ अधिवक्ता राजिंदर सिंह चीमा और उनकी टीम में जसप्रीत राय, वरिंदरपाल सिंह संधू, राकेश चाहर, जसदीप ढिल्लों, प्रतीक कोहली और संकल्प कोहली शामिल हैं। रंजीत सिंह के कल जेल से बाहर आने की संभावना है।

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ओडिशा में चल रही किसान अधिकार यात्रा कल गजापति जिले के काशीपुर पहुंची। किसानों व स्थानीय लोगों से मिल रहे भारी समर्थन से यात्रा और मजबूत हो रही है, वहीं किसान छोटी-छोटी बैठकें करके भी आन्दोलन तेज कर रहे हैं।

सभी 7 यात्राएं बिहार के तकरीबन 35 जिलों का दौरा करके पटना वापस लौट आई हैं। इस क्रम में उन्होंने 300 से अधिक छोटी-बड़ी नुक्कड़, आम व ग्राम किसान सभाएं आयोजित की और किसान-मजदूरों को महापंचायत में शामिल होने का आमंत्रण दिया। इसने बिहार में लगभग 5000 किलोमीटर की यात्रा तय की और 2 हजार गांवों व तकरीबन 1 लाख किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया।

आन्दोलन को तीन महीने से ज्यादा समय हो गया है। राजनैतिक राय से परे सरकार सामान्य मानवीय व्यवहार भी ठीक से नहीं निभा रही है। इस आंदोलन में 300 के करीब किसानों की मौत हो गयी है। अनेक किसानों का सड़क दुर्घटनाओं भारी नुकसान हुआ है। सरकार अपना घमंडी रवैया तोड़े व किसान आंदोलन में शहीद हुए व क्षतिग्रस्त हुए किसानों को हरसंभव मदद मुहैया करवाये।

डॉ. दर्शन पाल
संयुक्त किसान मोर्चा


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