देश के सबसे अमीर 1% लोगों पर 2% आपातकालीन टैक्स लगाने के लिए प्रधानमंत्री से अपील

कोरोना महामारी और उसकी वजह से हुए बहुआयामी सामाजिक-आर्थिक देशव्यापी भारी नुकसान से जूझने हेतु कोष जुटाने के लिए देश के सबसे दौलतमंद एक फ़ीसद लोगों पर 2% आपातकालीन कोरोना कर लगाने की प्रधानमंत्री से अपील

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सीमाएँ खोलना, कुछ रेलगाड़ियाँ शुरू करना भी अपर्याप्त और अर्धसफल!

राज्यों के बीच की सीमाएँ खुलने के बावजूद कई श्रमिक, हर दिन सैकड़ों की तादाद में पैदल ही सीमा पार कर रहे हैं।

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लखनऊ से दिल्ली तक पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर आरोपों की निंदा

दिल्ली पुलिस द्वारा अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करना हो या फिर मानवाधिकार कार्यकर्त्ता अमित अम्बेडकर और पत्रकार मनीष पाण्डे के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई, विरोध के स्वर का दमन है।

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सीएए विरोधी आंदोलन में महिलाओं की गिरफ्तारी के खिलाफ़ 1100 नारीवादियों का संयुक्त बयान

दिल्ली पुलिस तुरंत अपनी कानूनी स्थिति के साथ सभी एफआईआर, गिरफ्तारी, हिरासत को सार्वजनिक करे और हिंसा की सभी घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करे

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‘सोशल डिस्टैंसिंग’ का सरकारी प्रयोग बंद करने सम्बंधी निर्देश के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

नवायन ने अदालत से दरखवास्त की है कि सरकारों को कहा जाए कि “सोशल डिस्टैंसिंग” की जगह वे “फिज़िकल डिस्टैंसिंग”, “इंडीविजुअल डिस्टैंसिंग”, “डिज़ीज़ डिस्टैंसिंग” या “सेफ़ डिस्टैंसिंग” का प्रयोग करें।

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न रैली, न सभा, न आयोजन! 134 साल में पहली बार वेबिनार पर मनाया गया मजदूर दिवस

इंदौर में श्रम संगठनों, जन संगठनों, कला-संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों एटक, सीटू, सन्दर्भ, प्रलेस, इप्टा, एन. एफ. आई. डब्ल्यू. और रूपांकन के संयुक्त तत्वाधान में एक अनूठा और सार्थक कार्यक्रम आयोजित किया।

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प्रेस स्वतंत्रता दिवसः उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और धमकियों पर CPJ की विस्तृत रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की यात्रा के दौरान, पत्रकारों ने सीपीजे को बताया कि उनके ऊपर आपराधिक आरोपों के लगने और शारीरिक हमले होने का खतरा बढ़ गया है।

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दुनिया के मजदूर थके हैं, पस्त हैं, अपनी मुक्ति के बारे में वे नहीं सोच पाएंगे!

मज़दूरों से क्रांति या विरोध की उम्मीद करना. ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ है. उसके लिए या तो क्रांतिकारी मज़दूर की विशेष पृष्ठभूमि होनी चाहिए या फिर उसे अन्य वर्ग से नेतृत्व मिले.

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काश, कोई मजदूर अनुवादक होता तो तुम अभागे न होते, मेरे मजदूर साथियों!

क्या तुम्हें लेनिन के बारे में पता है? मुझे पता है। उनके संकलित कार्य 40 अंकों में प्रकाशित हुए हैं, एक का मूल्य 2,000 रुपए है। क्या कभी उनको, अपने भाग्यविधाता को पढ़ पाओगे? इसलिए अभागे हो तुम।

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