लोकतंत्र आइसीयू में है, लोकतंत्र की सभी संस्थाएं और समाज बीमार हैं: प्रो. रूपरेखा वर्मा

नागरिक समाज, वाराणसी द्वारा भगत सिंह की 117वीं जयंती पर “लोकतंत्र की चुनौतियां एवं नए भारत का निर्माण” विषय पर पराड़कर भवन, मैदागिन, वाराणसी में सेमिनार का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो।. रूपरेखा वर्मा और विशिष्ट वक्ता पीयूसीएल की उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सीमा आज़ाद रहीं।

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एनकाउंटर राज लोकतंत्र के लिए खतरा है: PUCL, UP

उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार के कार्यकाल में एक हज़ार से अधिक एनकाउंटर के मामलों में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है और इस पर अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था, उसके बावजूद इस तरह की घटनाओं का रुकने की बजाय बढ़ते जाना बेहद चिंता की बात है। यह कानून के राज को खत्म करने की खुली घोषणा है।

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कोलकाता बलात्कार और हत्याकांड पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को संगठनों का खुला पत्र

अब नारीवादी आंदोलनों और लोगों के विरोध को हाईजैक (अपहरण) करने की बेतहाशा कोशिश की जा रही है। हम सत्तारूढ़ राष्ट्रीय पार्टी की चुनावी राजनीति में अंतर्निहित पितृसत्तात्मक चालों, जाति और सांप्रदायिक अत्याचारों को उजागर करने के लिए दृढ़ हैं।

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नदियों के किनारे बसे समुदायों के जीवन को नीतिगत सच्चाई का हिस्सा बनाया जाए: रमाशंकर सिंह

इतिहासकार डॉ. शुभनीत कौशिक ने कहा कि इतिहास की विविध व्याख्याएं और इतिहास लेखन की विभिन्न धारणाएं कई ऐतिहासिक शोध प्रविधियों का रास्ता खोलती हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर कुछ इतिहासकार मानते हैं कि इतिहास अतीत और वर्तमान के मध्य अंतहीन संवाद है और दूसरी ओर कुछ इतिहासकार मानते हैं कि इतिहास अतीत को वैसे ही दिखाना है जैसे वह कभी घटित हुआ था। इन दोनों परिप्रेक्ष्यों के अलावा उन्होंने इतिहास में क्यों की तलाश को जानना इतिहासकार का दायित्व माना।

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उत्तराखंड : महिला हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, अश्लील संस्कृति का पुतला दहन

देहरादून, रामनगर, सितारगंज,व हल्द्वानी में भी इसी तरह की घटना को अंजाम दिया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि जो सरकार खुद अपने बलात्कारी सांसदों और विधायकों को बचाती हो उनसे हम न्याय की उम्मीद नहीं कर सकते।

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दिल्ली के 200 दलित परिवारों का राष्ट्रपति को खुला पत्र- हमें इच्छामृत्यु दे दीजिए!

बीते 1 मार्च 2024 को केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले भूमि एवं विकास विभाग ने हमारे घरों पर एक नोटिस चस्पा किया जिसमें हमें अपने मकान खाली करने का आदेश दिया गया था। साथ ही इस नोटिस में हमे अतिक्रमणकारी और अवैध कब्ज़ाधारी कह कर संबोधित किया गया था।

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ग़सान कनाफ़ानी: फ़िलिस्तीन मुक्ति संघर्ष का राइटर और फाइटर

कनाफ़ानी ने जितना लिखा, उसका अभी तक कुछ अंश ही हासिल किया जा सका है। उन्होंने अनेक अखबारों में लिखा। अनेक नामों से लिखा। उनके लिए लेखन अपना नाम बनाने का नहीं, बल्कि फ़िलिस्तीन की आज़ादी के मक़सद को हासिल करने के लिए तर्क का औजार था, दुश्मन के ख़िलाफ़ मोर्चा था और लोगों को लामबंद करने की पुकार थी।

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इजरायली रंगभेद अफ्रीका से अधिक खतरनाक है: इरफान इंजीनियर

इजरायल फलस्‍तीन युद्ध 1948 से जारी है, जब यूरोपीय देशों ने इंग्लैंड के संरक्षण में इजरायल राष्ट्र की स्थापना की थी। सारी दुनिया से यहूदियों को बुलाकर फलस्‍तीन में बसाया गया और वहां के मूल निवासियों को अपना ही देश छोड़ने पर विवश किया गया।

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सुदामा प्रसाद: एक ऐसा उम्मीदवार जिसे जनस्वास्थ्य, पर्यावरण व पुस्तकालयों की भी चिंता है

जनता के मुद्दों को लेकर किसानों, मज़दूरों, विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ बिहार के आरा से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक लड़ने वाली पार्टी के नुमाइंदे को अपना नुमाइंदा बनाना आरा के प्रबुद्ध मतदाताओं के हाथ में है। तीन तारों वाले चुनाव चिह्न में संघर्षों की लालिमा है, सतरंगी इंडिया गठबंधन से जुड़ा यह रंग जनता जनार्दन को पसंद है या नहीं ये 4 जून को ही पता चलेगा।

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“राबर्ट्सगंज की जनता भाजपा और उसके सहयोगियों के खिलाफ खड़ी है” – दिनकर कपूर

उन्होंने कहा कि इस इलाके की नदी, पहाड़, जंगल की चौतरफा लूट हो रही है। स्थानीय निवासियों की कोऑपरेटिव बनाकर यदि खनन कार्य दिया जाए तो लाखों लोगों के लिए रोजगार सृजन हो सकता है

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