यूपी की जेलों में टीकाकरण संबंधी PIL पर राज्य सरकार को इलाहाबाद हाइकोर्ट का नोटिस

कार्यवाहक जज जस्टिस मुनीश्‍वर नाथ भंडारी और न्‍यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने इस सम्‍बंध में 14 दिनों के भीतर राज्‍य सरकार को एक स्‍टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिये हैं।

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सारकेगुड़ा कांड में मृत आदिवासियों को CBA की श्रद्धांजलि, किसान आंदोलन ने भेजा समर्थन संदेश

नौ वर्ष पहले वर्ष 2012 में नक्सलियों के नाम पर एक फर्जी मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 7 नाबालिगों सहित 17 आदिवासियों की हत्या कर दी थी। इस जनसंहार के खिलाफ गठित एक जांच आयोग ने इन सभी आदिवासियों की हत्या के लिए सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया है, इसके बावजूद न तो पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने और न ही वर्तमान कांग्रेस सरकार ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही की है।

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इंदौर ने तोड़ी कोरोनाकाल की चुप्पी, जंगल बचाने के लिए पेड़ों की तरह खड़े होकर भीगते रहे लोग

दो साल पहले 2019 में मध्य प्रदेश की सरकार ने हीरा खनन परियोजना के लिए जंगल की नीलामी का टेंडर जारी किया था जिसमें आदित्य बिड़ला समूह की एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को ठेका मिला और सरकार ने 62.64 हेक्टेयर क़ीमती वन भूमि कंपनी को अगले पचास वर्षों के लिए पट्टे पर दे दी।

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बंद सामुदायिक रसोइयों, भ्रष्ट PDS और गहराती भुखमरी के आईने में मुफ़्त राशन का सरकारी वादा

दिवाली तक 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्‍ध करवाने की प्रधानमंत्री की घोषणा की ज़मीनी हकीकत बहुत जुदा है। अगर लोगों को निशुल्क राशन और कम्युनिटी किचन जैसी सुविधाएं मिल पा रही होतीं तो ग्राउंड से वो आवाजें नहीं आती जो मोबाइलवाणी तक पहुंच रही हैं।

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बनारस: जान जोखिम में डाल के लोगों को बचाने वाले ग्रामीण चिकित्सकों और पत्रकारों का सम्मान

जब सरकारी अस्पतालों और बड़े अस्पतालों में बेड और आक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ था उस समय दूरदराज के गाँवों में चिकित्सकजन ने बड़े ही जिम्मेदारी से पीड़ित और संक्रमित लोगों को चिकित्सा सुलभ करायी। इन चिकित्सकों के पास प्रायः बड़ी डिग्री नहीं होती लेकिन इनका विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज करने का अनुभव कहीं बहुत ज्यादा है और यही कारण था कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान इन चिकित्सकों ने ग्रामीण क्षेत्र में हजारों लोगों की जान बचायी।

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Vaccine Internationalism: एक नयी अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था का आग़ाज़ हो चुका है!

जो नयी अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था कायम होगी, उसमें 1970 के दशक में दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से रखे गये उन प्रस्तावों की अनुगूंज निहित है जो न्यू इंटरनेशनल इकनॉमिक ऑर्डर के रास्ते आने वाले आर्थिक साम्राज्यवाद और निर्भरता को अंत करने का आह्वान करते थे।

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वैक्सीन अन्तर्राष्ट्रीयतावाद पर शिखर सम्मेलन: महामारी के अंत के लिए एक वैश्विक गठबंधन

आज की स्थिति में जी-7 राष्ट्रों ने विश्व की कुल वैक्सीन आपूर्ति का एक-तिहाई से अधिक क्रय कर लिया है जबकि वैश्विक आबादी में उनकी हिस्सेदारी केवल 13 प्रतिशत है। इस बीच अफ़्रीका, जिसकी आबादी 134 करोड़ है, अपनी आबादी के मात्र 1.38 प्रतिशत को ही वैक्सीन लगा सका है। परिणाम- प्रगति की वर्तमान दर पर, न्यून-आय राष्ट्रों को अपने हर नागरिक को पूरी तरह से वैक्सीन लगा चुकने के लिए 57 वर्ष तक इंतज़ार करना होगा।

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पत्रकार की संदिग्ध मौत का PCI और EGI ने लिया संज्ञान, यूनियनें रोष में, विपक्ष सक्रिय, CBI जांच की मांग

एडिटर्स गिल्‍ड ने पुलिस की इस थ्‍योरी पर सवाल उठाया है कि श्रीवास्‍तव की मोटरसायकिल हैंडपम्‍प में टकराने से हुए हादसे में उनकी मौत हुई। इससे कहीं ज्‍यादा चौंकाने वाली बात ये है कि पत्रकार ने अपनी मौत से पहले पुलिस को पत्र लिखकर अपनी जान को शराब माफिया से खतरा बताया था और अंदेशा जताया था कि उनका पीछा किया जा रहा है।

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क्या तीसरी लहर से पहले खुल पाएंगे ग्रामीण PHC और CHC में लटके ताले?

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टर नहीं है, वहां मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल रहा है। जो लोग गरीब हैं वो शहरों में जाकर इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में उनके पास एक ही चारा है झोलाझाप डॉक्टर। गांव के गरीब परिवारों का इलाज तो इन्हीं के भरोसे है। कोरोना के दौरान गांव में जैसे हालात बन रहे हैं, उसके दबाव में कोई इन झोलाझाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं कर सकता।

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आजमगढ़: प्रवासी श्रमिकों के भरण-पोषण और रोजगार के सरकारी दावों पर सर्वे ने उठाये सवाल

रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने बताया कि पहली कोरोना लहर के कारण लगाये गये लॉकडाउन के बाद घर वापस आये प्रवासी मजदूरों के साथ संवाद स्थापित किया गया. आजमगढ़ के गौसपुर, सहदुल्लापुर, मोइयां मकदूमपुर, टेलीपुर, शुकुरपुर, शेखपुर हिसाम, हटवा खालसा, अहियायी, बेनुपुर, लहुआ खुर्द, कोइलाड़ी, हाजीपुर, हड़िया मित्तूपुर, रुस्तमपुरा अशरफ पट्टी, संगम नगर, घिनहापुर, देवयित उस्मानपुर, बसिला, इनवल, बासुपुर, कसेहुआँ गांवों के 225 प्रवासी मजदूरों के साथ एक सर्वे/संवाद हुआ.

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