UAPA को तुरन्त निरस्त किया जाय: समाजवादी जन परिषद
फादर स्टेन स्वामी की हत्या की जाँच उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश के द्वारा शुरू करने की मांग सजप करती है। उनकी हत्या का मुकदमा दायर हो और दोषियों को सजा मिले।
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फादर स्टेन स्वामी की हत्या की जाँच उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश के द्वारा शुरू करने की मांग सजप करती है। उनकी हत्या का मुकदमा दायर हो और दोषियों को सजा मिले।
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किसान सभा नेताओं ने कहा कि वनाधिकार कानून बनने के बाद भी वन मंत्रालय वनों पर अपने आधिपत्य को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। यही कारण है कि उसने वन अधिनियम में आदिवासी विरोधी संशोधनों को प्रस्तावित किया था।
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चौरासी वर्षीय फादर स्टेन स्वामी जीवन भर दलित आदिवासियों के लिए कार्यरत रहे। जेल जाने से पूर्व वे लगातार सभी सामाजिक मुद्दों पर सरकार के सामने हमेशा खड़े हुए। हमेशा गांधी के मूल्यों को लेकर अहिंसक रास्ते को सही मानते हुए वे काम करते रहे।
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कार्यवाहक जज जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने इस सम्बंध में 14 दिनों के भीतर राज्य सरकार को एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिये हैं।
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नौ वर्ष पहले वर्ष 2012 में नक्सलियों के नाम पर एक फर्जी मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 7 नाबालिगों सहित 17 आदिवासियों की हत्या कर दी थी। इस जनसंहार के खिलाफ गठित एक जांच आयोग ने इन सभी आदिवासियों की हत्या के लिए सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया है, इसके बावजूद न तो पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने और न ही वर्तमान कांग्रेस सरकार ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही की है।
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दो साल पहले 2019 में मध्य प्रदेश की सरकार ने हीरा खनन परियोजना के लिए जंगल की नीलामी का टेंडर जारी किया था जिसमें आदित्य बिड़ला समूह की एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को ठेका मिला और सरकार ने 62.64 हेक्टेयर क़ीमती वन भूमि कंपनी को अगले पचास वर्षों के लिए पट्टे पर दे दी।
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दिवाली तक 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध करवाने की प्रधानमंत्री की घोषणा की ज़मीनी हकीकत बहुत जुदा है। अगर लोगों को निशुल्क राशन और कम्युनिटी किचन जैसी सुविधाएं मिल पा रही होतीं तो ग्राउंड से वो आवाजें नहीं आती जो मोबाइलवाणी तक पहुंच रही हैं।
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जब सरकारी अस्पतालों और बड़े अस्पतालों में बेड और आक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ था उस समय दूरदराज के गाँवों में चिकित्सकजन ने बड़े ही जिम्मेदारी से पीड़ित और संक्रमित लोगों को चिकित्सा सुलभ करायी। इन चिकित्सकों के पास प्रायः बड़ी डिग्री नहीं होती लेकिन इनका विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज करने का अनुभव कहीं बहुत ज्यादा है और यही कारण था कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान इन चिकित्सकों ने ग्रामीण क्षेत्र में हजारों लोगों की जान बचायी।
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जो नयी अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था कायम होगी, उसमें 1970 के दशक में दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से रखे गये उन प्रस्तावों की अनुगूंज निहित है जो न्यू इंटरनेशनल इकनॉमिक ऑर्डर के रास्ते आने वाले आर्थिक साम्राज्यवाद और निर्भरता को अंत करने का आह्वान करते थे।
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आज की स्थिति में जी-7 राष्ट्रों ने विश्व की कुल वैक्सीन आपूर्ति का एक-तिहाई से अधिक क्रय कर लिया है जबकि वैश्विक आबादी में उनकी हिस्सेदारी केवल 13 प्रतिशत है। इस बीच अफ़्रीका, जिसकी आबादी 134 करोड़ है, अपनी आबादी के मात्र 1.38 प्रतिशत को ही वैक्सीन लगा सका है। परिणाम- प्रगति की वर्तमान दर पर, न्यून-आय राष्ट्रों को अपने हर नागरिक को पूरी तरह से वैक्सीन लगा चुकने के लिए 57 वर्ष तक इंतज़ार करना होगा।
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