आर्टिकल 19: जनता पहले अपना मीडिया बदलेगी, फिर बारी आएगी सियासत की! क्रोनोलॉजी समझिए…
तीन कानूनों की वापसी के लिए शुरू हुआ आंदोलन इनकी वापसी पर खत्म होने वाला नहीं है। ये नई राजनीति की सिर्फ शुरुआत है। इस पर किसी को भ्रम नहीं होना चाहिए।
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तीन कानूनों की वापसी के लिए शुरू हुआ आंदोलन इनकी वापसी पर खत्म होने वाला नहीं है। ये नई राजनीति की सिर्फ शुरुआत है। इस पर किसी को भ्रम नहीं होना चाहिए।
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कृषि मंत्री द्वारा लिखे गये खुले पत्र की आलोचना करते हुए एआईकेएससीसी ने कहा है कि यह पत्र काँग्रेस, आप, अकाली और इतिहास पर उनकी समझ का हवाला देता है, जो किसान आन्दोलन के मसले ही नहीं हैं।
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श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले नेताओं ने सरकार पर किसानों की हत्या का आरोप लगाते हुए आमजन से बेरहम और बेशर्म सरकार के खिलाफ किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को खुले मन से समर्थन देने की अपील की और कहा कि ये आंदोलन किसानों के हित से नहीं बल्कि 138 करोड़ जनता के हितों से जुड़ा हुआ है जिसे पूंजीपरस्त सरकार कुचलने पर आमादा है।
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मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने अटॉनी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा, ‘’क्या सरकार यह कह सकती है कि बातचीत को सहज बनाने के लिए वह कानूनों के तहत कोई कार्यकारी कदम नहीं उठाएगी?” वेणुगोपाल ने कहा कि वे सरकार से बात कर के इसका जवाब देंगे।
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उस समय इस संधि को लेकर देश में खासतौर से पंजाब में गंभीर बहस हुई थी। कप्तान अमरिन्दर सिंह ने उस समय इस संधि का खुलकर समर्थन किया था। विश्व व्यापार संगठन का समर्थन करते हुए उन्होंने पंजाब ट्रिब्यूनल में एक लेख लिखा था। अब कांग्रेस पार्टी इस तरह का दिखावा कर रही है कि वह इन जनविरोधी कानूनों के खिलाफ है।
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मोदी कैबिनेट की पूर्व मंत्री और अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने ट्वीट कर लिखा है कि केंद्र सरकार की जिद और किसानों की हालत को नजरअंदाज करने के कारण सिंघरा वाले बाबा राम सिंह जी ने ख़ुदकुशी कर ली।
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अगर आपने मुख्यधारा की मीडिया में होने वाली विशेषज्ञ चर्चाओं और वहां परोसे जाने वाले दृश्यों को अपनी सारी बुद्धि पहले से ही गिरवी नहीं रखी है, तो आप परी कथा की तरह सवाल पूछ सकते हैं: “आईना, दीवार पर आईना, मुझे दिखाओ कि इन सबके पीछे कौन है”। और फिर, आईना सत्तारूढ़ पार्टी के दो सबसे शक्तिशाली राजनेताओं (दोनों गुजरात से) को नहीं दिखाएगा, बल्कि दो अन्य चेहरे, देश के दो सबसे अमीर कारोबारी (दोनों ही गुजरात से) को दिखाएगा।
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किसान आंदोलन का पहला अध्याय वार्ताओं का रहा। वार्ता विफल होने के बाद दूसरा अध्याय प्रदर्शनों का था। सोमवार को यह चरण भी अनशन के साथ समाप्त हो गया। इस बीच सरकार ने चारों तरफ से आंदोलन को घेर लिया है और किसानों का दिल्ली घेरने का कार्यक्रम विफल हो चुका है। आगे क्या होगा, कोई नहीं जानता…
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की भावना को जागृत करने के लिए पंजाब के किसानों ने हाईवे के डिवाइडर पर धनिया, गाजर, मूली बोनी शुरु की
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ये तीनों सुधार मौजूदा कृषि उत्पादों के बाजार की संरचना पर से सरकार का नियंत्रण हटाने के मकसद से किये गए हैं। जब कोविड और लॉकडाउन की वजह से खेती में पहले से चले आ रहे संकट में और भी इज़ाफ़ा हो गया, और जब वंचितों और हाशिये पर मौजूद परिवारों को राज्य की सहायता की जरूरत थी ताकि निर्दयी और निरंकुश बाजार की अनिश्चितताओं और क्रूरताओं से राज्य उनकी रक्षा करे तब मोदी सरकार ने बाजार को और अधिक खोलकर और अपना नियंत्रण हटाकर समाज के कमजोर तबकों को बाजार के सामने पूरी तरह असहाय छोड़ दिया। वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश की जनता को आत्मनिर्भर बनाने का एजेंडा यही था।
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