वजूद की जंग: चौथी किस्‍त

पत्रकार साथी अभिषेक रंजन सिंह के साथ ”ऊपर” के गांवों की ओर  हमें 16 अगस्त की सुबह ”ऊपर” जाना था और हमें भी अंगद ने यही बताया था कि वहां पैसा, मोबाइल, एटीएम, संपर्क, कुछ नहीं …

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वजूद की जंग: तीसरी किस्‍त

डोंगरियों की दुश्‍मन कंपनी वेदांता का लांजीगढ़ में मुख्‍य गेट  जब 15 अगस्त को देश भर में मनाई जा रही आज़ादी की सालगिरह का जश्न भी राजुलगुड़ा की चुप्पी को नहीं …

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वजूद की जंग: दूसरी किस्‍त

बढ़ती उम्र के साथ विकास की लहर निगल गई सोमनाथ की कला को  यहां हम जिस घर में रुके, वह गांव का इकलौता गैर-आदिवासी घर था। इसमें सोमनाथ गौड़ा (यहां गौड़ा …

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वजूद की जंग: पहली किस्‍त

अभिषेक श्रीवास्‍तव  नियमगिरि के पहाड़ों से लौटने के बाद बड़े संक्षेप में कुछ कहानियां मैंने लिखी थीं जिनमें एक प्रभात खबर और जनसत्‍ता में छपी। मेरे साथी अभिषेक रंजन सिंह …

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डॉ. धर्मवीर पर मित्ररंजन का मूल लेख यहां पढ़ें

रविवार 11 अगस्‍त के जनसत्‍ता में मित्ररंजन का एक लेख छपा था ”गढ़े हुए तथ्‍यों का तूमार”, जिसमें डॉ. धर्मवीर के लिखे की आलोचना की गई थी। यह लेख जनसत्‍ता …

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ख्यातिलब्ध चिन्तक कँवल भारती की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रतिरोध पत्र

हम लेखक, कवि, बुद्धिजीवी, ब्लॉगर, फेसबुक यूजर्स वरिष्ठ चिन्तक कँवल भारती की गिरफ्तारी की कार्यवाही की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. यह अभिव्यक्ति के अधिकार पर हमला है. कँवल …

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