आजमगढ़ के दलितों पर मंडरा रहा है आतंक का साया, क्या ‘नौ और हत्याओं’ के बाद जागेगा कानून?

अभी दलित ग्राम प्रधान की लाश की राख ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि एक बार फिर सवर्ण सामन्तों ने दलित समुदाय पर रौनापार गांव में हमला कर दिया और पूरे परिवार को मार डालने की चेतावनी देकर चले गये। इन दोनों ही मामलों में रिहाई मंच ने त्‍वरित प्रतिक्रिया देते हुए दोनों घटनास्‍थलों का दौरा किया और अपनी रिपोर्ट जारी की है।

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यूपी में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ राज्य भर में कर्मचारियों का प्रदर्शन

निजीकरण समेत देश के सार्वजनिक उधोगों को बेचने के खिलाफ आयोजित विरोध में वर्कर्स फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने आगरा, फिरोजाबाद, अनपरा, ओबरा मऊ आदि जगहों पर कार्यक्रम किये

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सोनभद्र में 64 परिवारों की बेदखली का मामला पहुंचा NHRC, कांग्रेस ने भी जताया विरोध

वाराणसी (स्नातक खंड) विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी ने योगी सरकार से एमएलसी केदारनाथ सिंह की विधायक निधि से बेटे और बहू को लाभ पहुंचाने के आरोप की जांच कराने की मांग की है

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उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ी हिंसा पर AIPF और भाकपा-माले चिंतित, राज्यपाल को भेजा पत्र

भाकपा-माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि यह सरकार, जो बेहतर कानून व्यवस्था के वादे के साथ आई थी, अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है। जो सरकार महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा नहीं कर सकती, उसे सत्ता में रहने का हक भी नहीं है।

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फेसबुक की अधिकारी आंखी दास के खिलाफ पत्रकार आवेश तिवारी ने करवायी FIR, दो और नामजद

सोमवार रात 11.45 बजे दर्ज करवायी गयी एफआइआर संख्‍या 0157/2020 में आंखी दास सहित राम साहू और विवेक सिन्‍हा के ऊपर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 295ए, 505(1)(सी), 506, 500 और 34 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है।

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किसी को ‘मुर्दाबाद’ कहना क्‍या जान की धमकी माना जाएगा अब? समझें आंखी दास की पूरी शिकायत

फेसबुक कंपनी में पब्लिक पॉलिसी की निदेशक (भारत, दक्षिण एशिया और मध्‍य एशिया) आंखी दास ने 16 अगस्‍त की रात जिन लोगों के खिलाफ दिल्‍ली पुलिस की साइबर सेल में ‘अपनी जान को खतरे का अंदेशा’ बताकर शिकायत की है, वह प्रथम दृष्‍टया कमज़ोर जान पड़ती है।

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15 अगस्त को नारीवादी पूछें, “क्या हम सच में ‘आज़ाद’ हैं?”

आज दिल्ली सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, वकीलों, मीडियाकर्मियों आदि के ख़िलाफ़ पूछताछ, गिरफ्तारी, उत्पीड़न द्वारा व्यवस्थित हमले का भी केंद्र बन गया है

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हम रॉलेट एक्ट के जमाने में चले गए जहां वकील, अपील, दलील की बात करना ही बेमानी- रिहाई मंच

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, प्रोफेसर अपूर्वानंद जैसे देश के प्रतिष्ठित बुद्धिजीवियों पर हो रही कार्रवाइयां बताती हैं कि संविधान-लोकतंत्र पर बात करना भी अब गुनाह हो गया है.

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हम सभै भारत देस औ हियाँ के सब मानुस के सेवा की ताईं जुहाइ कै किरिया उठावा जाय…

अब हम अपने भारतमाता का हिरदय से नमन करत हई, जेका अपने सब सबसे ज्यादा पियार कीन जात है, जउन बहुत पुरान अहै, जउन जनम-जनम से जगमगात अहै, औ जउन सबसे नई अहै

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प्रशांत भूषण को सज़ा लोकतंत्र के लिए अशुभ: AIPF

इसके खिलाफ आज सोनभद्र, चंदौली, गोण्डा, लखनऊ, लखीमपुर खीरी, इलाहाबाद, आगरा समेत कई जगहों पर आइपीएफ ने विरोध किया। सोनभद्र में तो गांव स्तर तक इस फैसले का प्रतिवाद शुरू हो गया है।

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