अत्यंत खतरनाक कीटनाशकों का संकट: हिमाचल प्रदेश को क्यों चाहिए एक सुरक्षित कृषि भविष्य

हिमाचल प्रदेश में यह संकट अन्य राज्यों की कृषि चुनौतियों से अलग है। सेब और बेमौसमी सब्जियों जैसी नकदी फसलों की खेती, तथा वर्षाकालीन मटर उत्पादन के लिए सामुदायिक और वन भूमि को शाकनाशियों के माध्यम से साफ करने की प्रथा, रासायनिक कृषि पर अत्यधिक निर्भरता पैदा करती है।

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भोपाल: व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, मणिपुर, असम, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मजदूर संगठनों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, समुदाय के प्रतिनिधियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय नुकसान और मजदूरों के अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की।

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पर्यावरण दिवस पर ओडिशा का नारा- ‘मिट्टी बेचने के लिए नहीं, पहाड़ मुनाफे के लिए नहीं’!

सिजिमाली का पूरा इलाका फरवरी के बाद से ही संघर्ष का क्षेत्र बन चुका था। आसमान में ड्रोन उड़ रहे थे, सड़कों पर पुलिस की गाड़ियां गश्‍त लगा रही थीं और गांवों में  पुलिस मार्च कर रही थी। सिजिमाली में वेदांता और कुटरुमाली में अदाणी को तीन साल पहले जब बॉक्साइट के भंडार पट्टे पर दिए गए थे, तभी से लोगों का लगातार दमन जारी है और उनके ऊपर मनगढ़ंत मुकदमे थोपे गए हैं।

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तटीय इलाकों में गहरा रहा है जलवायु परिवर्तन का संकट: रिपोर्ट

 महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय इलाके एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संक्रमण के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इससे मुंबई उपनगर के गर्मियों के समय के अधिकतम तापमान में 1.3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है। यह गर्मी से बचने की योजनाओं की बढ़ती जरूरत पर जोर देता है।

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हरियाणा : महिला सुरक्षा के ढांचे की कमियों पर सखी मंडल के अनुभव

सखी मंडल के साथ कार्य करते हुए, हरियाणा के विभिन्न जिलों में यह बार-बार सामने आया है कि समस्या संसाधनों या योजनाओं की अनुपस्थिति से अधिक, प्रक्रियाओं की असंगति और क्रियान्वयन की अनिश्चितता से जुड़ी है। किसी भी नीति की प्रभावशीलता उसके डिजाइन से कम, और उसके क्रियान्वयन की संरचना से अधिक निर्धारित होती है।

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भोपाल गैस कांड: पर्यावरण मंत्री के बयान की पीड़ित संगठनों द्वारा कड़ी निंदा

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की रशीदा बी ने कहा, “मंत्री का दावा सच्चाई से बहुत दूर है। वास्तविकता यह है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर से 400 मीट्रिक टन से भी कम जहरीला कचरा हटाया गया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह भोपाल में फैक्ट्री परिसर के अंदर और बाहर दबे कुल खतरनाक कचरे का मात्र 1 प्रतिशत है।”

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इंदौर: आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करता नाटक

नाटक 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से लेकर 1947 में देश की आजादी तक के कई आंदोलनों के बारे में दर्शकों को बताता है। नाटक आंदोलन के दौरान तीन अलग- अलग स्थानों पर जनता के संघर्ष की अनजानी सी पर सच्ची घटनाएं भी दर्शकों के सामने लाता है।

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भोपाल : वैश्विक वित्तीय और आर्थिक संकट तथा उभरते विकल्पों पर परिचर्चा

‘जोशी-अधिकारी इस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल स्टडीज़’, ‘हम सब’ और ‘गांधी भवन’ द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में श्रोताओं की उपस्थिति उत्साहजनक रही, जिनमें राजेश जोशी, कुमार अम्बुज, राम प्रकाश त्रिपाठी, पलाश सुरजन, आरती, बालेंदु परसाई, शैलेंद्र शैली, सुधीर सजल, उपासना बेहार, स्मिता सत्यमेव आदि शामिल रहे।

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काशी: पुस्तक परिचर्चा के दौरान शहर की बहुलतावादी संस्कृति पर सघन बहस

काशी की समावेशी छवि पर सवाल उठाते हुए उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ दिया कि वर्ष 1957 से पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में दलितों के प्रवेश को लेकर पाबंदियां थीं। यह मान लेना कि काशी हमेशा से पूरी तरह समरस और समानतापूर्ण रही है, इतिहास की जटिलताओं को नजरअंदाज करना होगा।

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काशी के कुशवाहा ‘कान्‍त’: साहित्य में खामोश कर दिए गए एक अध्‍याय का 75वें साल में जगना

विजय विनीत ने सितम्‍बर 2022 में पहली बार कुशवाहा ‘कान्‍त’ को इतिहास की धूल से निकाला और उनके ऊपर न्‍यूजक्लिक पर एक लंबी कहानी लिखी थी। उसके बाद से ही वे कान्‍त पर किताब लिखने में लगे हुए थे।

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