UP: हाथरस कांड में इंसाफ के लिए ‘दलित संकल्प यात्रा’ निकाल रहे कई कांग्रेसी गिरफ्तार


यूपी में “दलित संकल्प यात्रा” निकाली जा रही थी जहाँ कांग्रेस के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया हैं। कांग्रेस ने इस घटना की निंदा करते हुए तुरंत उनकी रिहाई की मांग की है. कांग्रेस ने कहा है कि दलित कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष योगी जाटव समेत कई ज़िला अध्यक्षों को गिरफ्तार कर लिया है.

वहीं दलित कांग्रेस सहारनपुर जिला अध्यक्ष और पूर्व जिला अध्यक्ष लोकेश कटारिया को पुलिस ने सुबह से हाउस अरेस्ट किया है. वहीं, मेरठ दलित कांग्रेस जिला अध्यक्ष राहुल फंफूदा को मेरठ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

कांग्रेस नेता पी एल पुनिया ने कहा:

योगी सरकार के राज में दलितों पर हो रहे अत्याचार, बलात्कार अपनी हद पार कर चुके हैं, अब इसको बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है ,मैं पूरे प्रदेश के समाज के लोगों से आह्वान करता हूं कि अन्याय के खिलाफ आगे आइए.

गोरखपुर में दलित संकल्प यात्रा को रोके जाने की खबर है. दलित कांग्रेस प्रदेश प्रभारी प्रदीप नरवाल ने ट्वीट कर कहा है –

गोरखपुर में दलित संकल्प यात्रा करने से हमें रोका जा रहा है. योगी सरकार के राज में दलितों पर हो रहे अत्याचार, बलात्कार अपनी हद पार कर चुके है, अब इसको बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.हाथरस की दलित बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी है. न रुके है, न रुकेंगे.

कांग्रेस छात्र संघ एनएसयूआइ के अध्यक्ष नीरज कुंदन ने ट्वीट कर कहा:

हाथरस के बेटी को न्याय दिलाने के लिए यूपी में “दलित संकल्प यात्रा” निकाली जा रही थी जहाँ कांग्रेस के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया हैं.जो कि योगी सरकार का एक निंदनीय कृत्य हैं. हम जल्द से जल्द उनकी रिहाई की मांग करते हैं.


About जनपथ

जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

View all posts by जनपथ →