भोपाल गैस कांड: पर्यावरण मंत्री के बयान की पीड़ित संगठनों द्वारा कड़ी निंदा


भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस हादसे के पीड़ितों के  बीच काम कर रहे  चार संगठनों ने आज केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा दिए गए उस दावे का कड़ा खंडन किया, जिसमें उन्होंने कहा कि भोपाल में यूनियन कार्बाइड के “पूरे जहरीले कचरे” की सफाई हो चुकी है। संगठनों ने इस दावे को “झूठा और भ्रामक” बताया।

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की रशीदा बी ने कहा, “मंत्री का दावा सच्चाई से बहुत दूर है। वास्तविकता यह है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर से 400 मीट्रिक टन से भी कम जहरीला कचरा हटाया गया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह भोपाल में फैक्ट्री परिसर के अंदर और बाहर दबे कुल खतरनाक कचरे का मात्र 1 प्रतिशत है।”

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने याद दिलाया कि, “स्वयं केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने 19 जून 2023 को एक बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें यह स्वीकार किया गया था कि बंद पड़ी फैक्ट्री और उसके आसपास मौजूद प्रदूषण के आकलन और उपचार का कार्य अभी लंबित है।” उन्होंने आगे कहा, “स्पष्ट है कि मंत्री को यह पता था कि उनका बयान सच्चाई के अनुरूप नहीं है।”

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के बालकृष्ण नामदेव ने कहा, “भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (IITR) की वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार फैक्ट्री परिसर और उसके आसपास दबे खतरनाक कचरे ने बंद पड़ी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के 4 किलोमीटर दायरे तक के भूजल को प्रदूषित कर दिया है (https://water.bhopal.net/) । संबंधित मंत्रियों और उनके पूर्ववर्तियों की उदासीनता और निष्क्रियता के कारण यह स्थिति पैदा हुई है कि भूजल प्रदूषण अब भोपाल की प्राकृतिक विरासत झीलों की ओर फैल रहा है।”

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा की नसीरीन बी ने कहा, “भोपाल में जारी इस पर्यावरणीय आपदा के प्रति राज्य और केंद्र सरकारों की प्रतिक्रिया दिसंबर 1984 की गैस त्रासदी के समय की प्रतिक्रिया से भी बदतर है, और यह केवल सरकारी झूठों की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “जिस राज्य सरकार के पास यह जमीन है, उसने आज तक पर्यावरणीय क्षति के लिए यूनियन कार्बाइड या उसकी मालिक डॉव केमिकल से मुआवज़ा मांगने की पहल नहीं की है। वहीं केंद्र सरकार ने अब तक प्रदूषण की गहराई, फैलाव और प्रकृति का वैज्ञानिक आकलन भी नहीं कराया है, ताकि वास्तविक सफाई कार्य शुरू हो सके।”


नवाब खान एवं नसरीन
भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा

रशीदा बी
गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ

बालकृष्ण नामदेव
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा

रचना ढींगरा
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन

अधिक जानकारी के लिए www.bhopal.net और https://water.bhopal.net/ पर जाए


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