कोरोना के बहाने मीडिया में छंटनी और वेतन कटौती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल


कोरोना महामारी के कारण सरकार द्ववारा किए गए लॉकडाउन और मंदी के बहाने मीडिया में हो रही वेतन कटौती और छंटनी के खिलाफ़ पत्रकार संगठनों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है।

नेशनल अलायंस आफ जर्नलिस्ट्स, दिल्ली यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स और बृहन्मुंबई यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स ने 16 अप्रैल को भारत की सर्वोच्च अदालत में नौकरियों की छंटनी और वेतन कटौती को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की है।

पीआइएल में केंद्र सरकार, इंडियन न्यूज़पेपर सोसायटी और न्यूज़ ब्रॉडकास्टर असोसिएशन से अपील की गयी है कि वे सुनिश्चित करें कि मीडिया के मालिकान कोरोना और उसके कारण हुए लॉकडाउन को कर्मचारियों के उत्पीड़न का बहाना न बनावें और दुरुपयोग न करें।

पीआइएल में कहा गया है कि इस दौर में जितनी भी नौकरियां गयी हैं, जितने इस्तीफ़े हुए हैं और जितने मीडियाकर्मियों के वेतन में कटौती की गयी है, सबको वापस लिया जाए।


About जनपथ

जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

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