गांव छोड़ब नहीं: उड़ीसा के विस्थापन-विरोधी जन आंदोलनों की गाथाएँ

प्रस्तुत पुस्तक मूलत: पालग्रेव मैकमिलन और आकार बुक्स (2020) से प्रकाशित अंग्रेज़ी भाषा में छपी “रसिस्टिंग डिस्पोज़ेशन — द ओडिशा स्टोरी” का हिंदी अनुवाद है। हिंदी और अंग्रेज़ी के अलावा सेंटर फ़ॉर ह्यूमन साइंसेस, भुवनेश्वर द्वारा प्रकाशित (2020) “गां छाड़िबु नहीं” शीर्षक से यह पुस्तक, उड़िया भाषा में भी उपलब्ध है।

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बेदखली का गणतंत्र: G-20 के लिए सुन्दरीकरण के नाम पर उजाड़ी जा रही दिल्ली

महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क को संरक्षित करने के नाम पर दशकों से रह रहे निवासियों को बेदखल किया जा रहा है। लोगों को लंबे और महँगे क़ानूनी दाव-पेंच मे फंसाकर रखना एक पुरानी चाल है। इसी तरह तुग़लकाबाद के निवासियों को एएसआइ द्वारा मिला नोटिस लोगों की नींद उड़ा रहा है।

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हमारी नदियों को बचाने के लिए -20 डिग्री में उपवास कर रहे सोनम वांगचुक ‘नजरबंद’ हैं!

उन्होंने 26 जनवरी से पांच दिन के लिए दुनिया की सबसे ऊंची सड़क 18 हजार फुट पर स्थित खारदुंगला में -40 डिग्री के तापमान में अनशन शुरू करने का ऐलान किया था मगर खराब मौसम और स्थानीय प्रशासन की मनाही के चलते उनका ऐसा करना संभव नहीं हो पाया।

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जोशीमठ के आईने में हिमाचल का दर्दनाक भविष्य और विदेशी वित्तीय पूंजी का तांडव

हिमाचल के अंदर 2019 में हुई इनवेस्टर मीट के तहत जो 95 हजार करोड़ के मेमरोंडम ऑफ अंडरस्टेंडिग (एमओयू) हुए हैं अगर यह लागू हो जाए तो कितने जंगल का नाश होगा इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इतना ही नहीं सरकार हाईड्रो प्रोजेक्ट, मंडी के बल्ह, नांज, तत्तापानी जैसे इलाकों की उपजाऊ भूमि को भी बड़ी परियोजानाओं के लिए दे रही है।

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शरद यादव राजनीति में जिस धारा का प्रतिनिधित्व करते थे वह अब विलुप्तप्राय है

संसदीय राजनीति में प्रवेश का प्रचंड का यह पहला मौका था। उन्होंने शरद जी से कहा कि वह सत्ता संचालन के कुछ ‘टिप्स’ दें और शरद जी ने उनसे अपने बहुत सारे अनुभव साझा किये।

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जोशीमठ क्षेत्र में चल रही सभी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण और विस्फोट पर तत्काल रोक: HC

नंदा देवी बायोस्फेयर में ही पूर्व में 7 फरवरी 2021 को ग्लेशियर के टूटने की घटना हुई थी जिसके बाद पीसी तिवारी द्वारा यह जनहित याचिका माननीय उच्च न्यायालय में योजित की गई, जिसने उनके द्वारा अर्ली वार्निंग सिस्टम, असंतुलित विकास को रोकने संबंधी दिशानिर्देश उच्च न्यायालय से चाहे गए।

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भोपाल: 10 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले अनशन पर बैठीं गैस कांड पीड़ित औरतें

भोपाल में 1984 की यूनियन कार्बाइड गैस हादसे से पीड़ित 10 महिलाओं ने हादसे से हुई मौतों और चोटों के लिए उचित अतिरिक्त मुआवजे की माँग लेकर आज बिना पानी …

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डॉ. मोहनलाल पांडा को सम्मान: अटल के ‘राजधर्म’ से जनमित्र के ‘स्वधर्म’ को मिली मान्यता

राजनीति के जिस दौर में न तो राजधर्म और न ही स्‍वधर्म की परवाह की जा रही हो, डॉ. पांडा को मिला यह पुरस्‍कार इस बात की तसदीक करता है कि स्‍वधर्म से ही राजधर्म को पूरा किया जा सकता है और राजधर्म ही स्‍वधर्म को अपनाने की संभावनाएं पैदा करता है।

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उर्दू इंकलाब या बगावत की नहीं मुहब्बत की ज़बान है

वरिष्ठ पत्रकार उज्जवल भट्टाचार्य ने कहा कि हमें इस बात पर गौर करना चाहिए कि वह कौन से कारण हैं जिससे आजादी के दौरान जो उर्दू अखबार मुख्यधारा के हुआ करते थे आज वह संकट में हैं। वरिष्ठ पत्रकार केडीएन राय ने कहा कि उर्दू न इंकलाब की भाषा है न ही बगावत की, ये मुहब्बत की भाषा है।

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‘साम्प्रदायिकता और कॉरपोरेट, दोनों ही खतरों से लेखक लेंगे लोहा’! प्रलेस सम्मेलन में लेखकों ने लिया संकल्प

‘प्रगतिशील लेखन आंदोलन- चुनौतियां और दायित्व तथा बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में लेखकों की भूमिका’ विषय पर सम्मेलन में अनेक विद्वान वक्ताओं ने अपने विचार रखे। संपन्न आयोजन में साहित्य संस्कृति के अनेक रंग देखे गए।

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