चंडीगढ़ : सरकारी नीतियों के खिलाफ सिलसिलेवार आंदोलनों का KMM का ऐलान


किसान मज़दूर मोर्चा (KMM) द्वारा किसान भवन, चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पंजाब एवं देश भर में लागू किए जा रहे किसान–मज़दूर विरोधी क़ानूनों और सरकारी नीतियों के खिलाफ आगामी आंदोलनों की घोषणा की गई।

KMM चैप्टर पंजाब की बैठक, पंजाब सरकार के साथ पंजाब भवन, चंडीगढ़ में बेनतीजा रहने के बाद, गुरुद्वारा अंब साहिब, मोहाली में मनजीत सिंह राय की अध्यक्षता में हुई, जिसमें आने वाले समय की संघर्षात्मक रणनीति तय की गई।

आगामी आंदोलन

  1. 13 जनवरी 2025 को बिजली संशोधन बिल 2025, बीज क़ानून 2025 तथा VB ग्राम योजना से जुड़े संशोधन क़ानूनों की प्रतियां पंजाब के गांव स्तर पर लोहड़ी की आग में जलायी जाएंगी।
  2. 21 और 22 जनवरी 2025 को स्मार्ट मीटर उतारकर नज़दीकी बिजली दफ्तरों में दूसरे चरण के तहत जमा करवाए जाएंगे।
  3. 18 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री भगवंत मान के मजीठा (अमृतसर) दौरे के दौरान शंभू–खनौरी मोर्चा उजाड़ने, ट्रॉलियों की चोरी तथा अन्य मांगों को लेकर सवाल किए जाएंगे।
  4. 5 फरवरी 2025 को पंजाब के मंत्रियों और विधायकों के घरों के सामने धरने दिए जाएंगे।
  5. 24–25 जनवरी 2025 को राजस्थान में KMM चैप्टर भारत की बैठक आयोजित की जाएगी।

सरकार की नाकामी की निंदा

प्रेस को संबोधित करते हुए KMM नेताओं ने कहा कि भगवंत मान सरकार बैठक का न्योता देकर भूल गई, जिसकी मोर्चा कड़े शब्दों में निंदा करता है। शंभू–खनौरी मोर्चों के दौरान हुए नुकसान का मुआवज़ा देने से सरकार पीछे हट रही है, जबकि कई मांगों पर पहले ही सहमति बन चुकी थी।

मोर्चे ने निम्नलिखित मांगों को तुरंत लागू करने की मांग की:

  1. आंदोलनों के दौरान शहीद हुए किसानों और मज़दूरों के परिवारों को मुआवज़ा तथा सरकारी नौकरियां।
  2. दिल्ली आंदोलन-2 (शंभू–खनौरी) के दौरान घायल हुए किसानों–मज़दूरों को मुआवज़ा।
  3. पराली जलाने, रेड एंट्री, जुर्मानों तथा आंदोलनों के दौरान दर्ज पुलिस व रेलवे पुलिस के मामलों को वापस लिया जाए।
  4. बाढ़ से प्रभावित किसानों को बकाया मुआवज़ा तुरंत जारी किया जाए।

बिजली संशोधन बिल और अन्य क़ानून

मुख्यमंत्री द्वारा बिजली संशोधन बिल का केवल बयानात्मक विरोध किया गया है, जबकि KMM की मांग है कि इस बिल के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया जाए। बीज बिल, भारत–अमेरिका समझौते और VB ग्राम योजना पर पंजाब सरकार अपना स्पष्ट रुख सार्वजनिक करे तथा केंद्र सरकार को भेजी गई चिट्ठी को जनता के सामने लाया जाए।

बैठक में पारित प्रमुख प्रस्ताव

  1. पंजाब में नशों की बेरोकटोक बिक्री पर गहरी चिंता जताई गई और इसके लिए केंद्र सरकार, पंजाब सरकार, नशा माफिया और पुलिस के गठजोड़ को जिम्मेदार ठहराया गया। नशों के खिलाफ संयुक्त जन आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया गया।
  2. पंजाब में बिगड़ती कानून व्यवस्था के लिए केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया गया।
  3. प्रेस की आवाज़ दबाने की कोशिशों की निंदा करते हुए पत्रकार समुदाय द्वारा घोषित आंदोलन को समर्थन दिया गया।
  4. हवा और पानी प्रदूषण से मानवता के लिए खतरा बन रही औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

अंत में

KMM ने कहा कि देश और पंजाब में कृषि संकट बेहद गहरा हो चुका है। कर्ज़ के बोझ तले दबे किसान लगातार आत्महत्याएं कर रहे हैं। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के वादे विफल साबित हुए हैं और केंद्र व पंजाब सरकार की कॉरपोरेट समर्थक नीतियां किसानों, मज़दूरों, कर्मचारियों, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों से रोज़गार छीनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

किसान मज़दूर मोर्चा पंजाब के सभी लोगों से अपील करता है कि वे आने वाले आंदोलनों में शामिल हों, क्योंकि इस कॉरपोरेट हमले का मुकाबला केवल संयुक्त संघर्ष से ही किया जा सकता है।

बैठक में उपस्थित नेता एवं संगठन

सरवण सिंह पंदेर (किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब),
मनजीत सिंह राय (बीकेयू दोआबा),
जसविंदर सिंह लोंगोवाल (बीकेयू आज़ाद),
बलदेव सिंह जीरा (बीकेयू क्रांतिकारी),
जंग सिंह भनेड़ी (बीकेयू भनेड़ी),
बलकार सिंह बैंस (बीकेएमयू पंजाब),
बलवंत सिंह बहराम के (बीकेयू बहराम के),
अमरजीत मोहरी (बीकेयू शहीद भगत सिंह),
तथा किसान मज़दूर हितकारी सभा।


(प्रेस विज्ञप्ति, किसान मज़दूर मोर्चा, 8 जनवरी 2025)


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